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Hindi News ›   India News ›   Health Workers Safety Must be Ensured, Act Against Those Obstructing Last Rites of COVID-19 Warriors: MHA to States

स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा पर गृह मंत्रालय सख्त, राज्यों को दिया सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश

Wed, 22 Apr 2020 05:46 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Wed, 22 Apr 2020 05:46 PM IST
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Health Workers Safety Must be Ensured, Act Against Those Obstructing Last Rites of COVID-19 Warriors: MHA to States
coronavirus - फोटो : PTI

देश में स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामलों के बीच, गृह मंत्रालय ने बुधवार को राज्यों से स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों, चिकित्साकर्मियों, अग्रिम पंक्ति के कर्मियों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। हाल ही में देश के विभिन्न क्षेत्रों से कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बदसलूकी के मामले सामने आए थे। 

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मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे उन लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करें, जो कोविड-19 के कारण जान गंवाने वाले कोरोना योद्धाओं के अंतिम संस्कार में बाधा डालते हैं। 
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गृह मंत्रालय ने एक पत्र में राज्यों को राज्य स्तर पर और जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा है जो चिकित्सा पेशेवरों के कामकाज के दौरान किसी भी सुरक्षा मुद्दे के समाधान के लिए 24 घंटे और सातों दिन उपलब्ध रहें। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, इन नोडल अधिकारियों को स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा की किसी भी घटना के मामले में तत्काल और सख्त कार्रवाई करनी होगी।
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गौरतलब हो कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों पर हमलों की पृष्ठभूमि में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक अध्यादेश को मंजूरी दी है। इसमें उनके खिलाफ हिंसा को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध बनाया गया है। आज केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस संबंध में जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित अध्यादेश में स्वास्थ्यकर्मियों के घायल होने, सम्पत्ति को नुकसान होने पर मुआवजे का भी प्रावधान किया गया है। जावड़ेकर ने कहा कि प्रस्तावित अध्यादेश के माध्यम से महामारी अधिनियम 1897 में संशोधन किया जाएगा। इससे स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मियों की सुरक्षा और उनके रहने व काम करने की जगह को हिंसा से बचाने में मदद मिलेगी।

यह पूछे जाने पर क्या कोविड-19 के बाद भी नए बदलाव लागू रहेंगे, जावड़ेकर ने कहा कि अध्यादेश को महामारी अधिनियम 1897 में संशोधन के लिए मंजूरी दी गई है। अध्यादेश में हिंसा के दोषी के लिए छह महीने से सात साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। 

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इस महामारी से देश को बचाने की कोशिश कर रहे स्वास्थ्यकर्मी दुर्भाग्य से हमलों का सामना कर रहे हैं। उनके खिलाफ हिंसा या इस तरह की कोई घटना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एक अध्यादेश लाया गया है, इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।






 

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