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Haryana: चुनाव से पहले शाह की रणनीति पर खट्टर ने चला 'जाट-गैर जाट' दांव, JJP की टूट से फायदा उठाएगी भाजपा

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 12 Mar 2024 11:55 AM IST
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सार
प्रदेश की राजनीति के जानकारों का कहना है कि भाजपा और जजपा के बीच गत वर्ष से ही तनातनी चल रही थी। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जजपा को दो टूक शब्दों में कह दिया था कि वह सभी दस सीटों पर चुनाव लड़ेगी। प्रदेश के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने दिल्ली में अपने विधायकों की बैठक बुलाई है...
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Haryana: BJP-JJP alliance in, CM Manohar lal Khattar Resigns
Haryana: Manohar Lal Khattar - फोटो : Amar Ujala/ Rahul Bisht

विस्तार

लोकसभा चुनाव की दहलीज पर हरियाणा की राजनीति में मंगलवार को एक बड़ी हलचल देखने को मिली है। प्रदेश में 2019 से चल रहा भाजपा और जजपा का गठबंधन टूट गया है। सीएम मनोहर लाल खट्टर समेत उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने भी इस्तीफा दे दिया है। साथ ही, भाजपा ने विधायक मंडल की बैठक भी बुला ली है। इतना ही नहीं, जजपा के विधायकों में बड़ी टूट संभावित है। हरियाणा में नए सिरे से खट्टर मंत्रिमंडल का गठन हो सकता है। प्रदेश की राजनीति के जानकारों का कहना है कि भाजपा और जजपा के बीच गत वर्ष से ही तनातनी चल रही थी। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जजपा को दो टूक शब्दों में कह दिया था कि वह सभी दस सीटों पर चुनाव लड़ेगी। प्रदेश के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने दिल्ली में अपने विधायकों की बैठक बुलाई है।

सूत्रों का कहना है कि जजपा के दस विधायकों में से जोगीराम सिहाग, राम कुमार गौतम, ईश्वर सिंह, रामनिवास और देवेंद्र बबली, दिल्ली की बैठक से दूर हो सकते हैं। दूसरी तरफ भाजपा से अर्जुन मुंडा और तरुण चौक पर्यवेक्षक के तौर पर चंडीगढ़ पहुंच चुके हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह के बेटे और हिसार लोकसभा सीट से भाजपा सांसद ब्रजेंद्र सिंह ने रविवार को कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली है। उनके पिता चौ. बीरेंद्र सिंह कई दशक तक कांग्रेस में रहे थे। ब्रजेंद्र सिंह के पाला बदलने के पीछे तीन बड़े कारण बताए गए थे। पहला, इस बार उन्हें खुद की टिकट का भरोसा नहीं था। दूसरा, उचाना कलां विधानसभा सीट, जहां पर 2019 के चुनाव में दुष्यंत चौटाला ने ब्रजेंद्र सिंह की मां प्रेमलता को हराया था, इस बार चौधरी परिवार को उस सीट की दावेदारी की गारंटी भी नहीं मिली थी। तीसरा, चौ. बीरेंद्र सिंह, आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा और जजपा गठबंधन के खिलाफ थे। उन्होंने अक्तूबर 2023 में कहा था, यदि भाजपा-जजपा गठबंधन जारी रहा तो वे पार्टी छोड़ देंगे।

सूत्रों के मुताबिक, जजपा ने लोकसभा चुनाव में दो सीट मांगी थीं। भाजपा ने एक भी सीट देने से मना कर दिया। भाजपा अपने दम पर प्रदेश की सभी दस सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सूत्रों ने बताया है कि भाजपा हाईकमान, लोकसभा चुनाव ही दहलीज पर सीएम मनोहर लाल खट्टर को बदलने का जोखिम नहीं उठाएगी। अगर दोबारा से सरकार का गठन होता है, तो उस स्थिति में खट्टर की मुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। जजपा के साथ भाजपा का गठबंधन टूटना, इसके पीछे जाट और गैर जाट वोट बैंक बताया जा रहा है।

भाजपा, गैर जाटों के वोटों के आधार पर सत्ता में आई थी। मौजूदा हालात में जाट वोट बैंक, पूरे तरीके से कांग्रेस के साथ जाता हुआ नजर आ रहा था। ऐसे में अगर जजपा और भाजपा का गठबंधन रहता है, तो जाट वोट बैंक में सेंध लगना मुश्किल था। इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता था। प्रदेश में जाट वोटर, भाजपा से नाराज चल रहे हैं, यह बात किसी से छिपी नहीं है। अगर भाजपा, अपने दम पर चुनाव लड़ती है, तो उसे गैर जाटों का बड़ा समर्थन हासिल हो सकता है। दूसरी तरफ जाट वोटर, कांग्रेस, जजपा और इनेलो में विभाजित हो जाएंगे। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। यही वजह है कि अब लोकसभा चुनाव की दहलीज पर भाजपा ने जजपा से गठबंधन तोड़ने की बात कही है।

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