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हरेन पांड्या हत्या मामला : सीबीआई, गुजरात सरकार की अपीलों पर शुक्रवार को फैसला सुनाएगा न्यायालय
Fri, 05 Jul 2019 12:20 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 05 Jul 2019 12:20 AM IST
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supreme court
- फोटो : PTI
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उच्चतम न्यायालय गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की साल 2003 में हत्या करने के आरोपों का सामना कर रहे 12 लोगों को बरी करने के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई और गुजरात सरकार की अपीलों पर शुक्रवार को फैसला सुनाएगा।
न्यायाधीश अरुण मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ एनजीओ ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ (सीपीआईएल) की जनहित याचिका पर भी फैसला सुनाएगी जिसमें इस हत्या की अदालत की निगरानी में फिर से जांच कराने की मांग की गई है।
पांड्या गुजरात में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में मंत्री थे। उनकी अहमदाबाद में सुबह की सैर के दौरान लॉ गार्डन के समीप 26 मार्च 2003 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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सीबीआई के अनुसार, राज्य में 2002 के साम्प्रदायिक दंगों का बदला लेने के लिए उनकी हत्या की गई। सीबीआई और राज्य पुलिस ने गुजरात उच्च न्यायालय के 29 अगस्त 2011 के फैसले को गलत बताते हुए अपील दायर की।
उच्च न्यायालय ने 12 लोगों को हत्या के आरोपों से बरी करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा था जिसमें उन्हें आपराधिक साजिश, हत्या की कोशिश और आतंकवाद रोधी कानून (पोटा) के तहत अपराधों में दोषी ठहराया गया।
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न्यायाधीश अरुण मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ एनजीओ ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ (सीपीआईएल) की जनहित याचिका पर भी फैसला सुनाएगी जिसमें इस हत्या की अदालत की निगरानी में फिर से जांच कराने की मांग की गई है।
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पांड्या गुजरात में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में मंत्री थे। उनकी अहमदाबाद में सुबह की सैर के दौरान लॉ गार्डन के समीप 26 मार्च 2003 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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सीबीआई के अनुसार, राज्य में 2002 के साम्प्रदायिक दंगों का बदला लेने के लिए उनकी हत्या की गई। सीबीआई और राज्य पुलिस ने गुजरात उच्च न्यायालय के 29 अगस्त 2011 के फैसले को गलत बताते हुए अपील दायर की।
उच्च न्यायालय ने 12 लोगों को हत्या के आरोपों से बरी करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा था जिसमें उन्हें आपराधिक साजिश, हत्या की कोशिश और आतंकवाद रोधी कानून (पोटा) के तहत अपराधों में दोषी ठहराया गया।