तिरुवनंतपुरम हवाईअड्डा: केरल सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, केंद्र से फैसला वापस लेने की मांग
केरल सरकार ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के तिरुवनंतपुरम हवाईअड्डे को अडानी एंटरप्राइजेज को पीपीपी के तहत 50 साल के लिए पट्टे पर देने के फैसले का विरोध किया है। केरल सरकार ने तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे के प्रबंधन और संचालन का काम अडानी समूह को सौंपने के केंद्र के फैसले का विरोध करने और उस पर चर्चा करने के लिए बृहस्पतिवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी।
इस बैठक के बाद केरल के सीएमओ ने कहा, 'आज सीएम पिनाराई विजयन द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में अदानी एंटरप्राइजेज को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे के संचालन और पर्यवेक्षण को सौंपने के लिए केंद्रीय कैबिनेट के फैसले को वापस लेने की मांग की गई।
An all-party meeting convened by CM Pinarayi Vijayan today, has demanded to withdraw the union cabinet decision to hand over the operations & supervision of Thiruvananthapuram airport to Adani Enterprises: Kerala CMO pic.twitter.com/q05oQGBJsA
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) August 20, 2020
सर्वदलीय बैठक के बाद केरल के सीएम पिनाराई विजयन ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की। सीएम ने लिखा, 'यह अनुरोध है कि आप राज्य सरकार द्वारा हवाई अड्डों को कुशलता से प्रबंधित करने के लिए अपेक्षित अनुभव होने के बावजूद हवाई अड्डे के प्रबंधन और परिचालन को एक निजी कंपनी को सौंपने के निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए कृपया हस्तक्षेप करें।'
The CM writes, "It is requested you may kindly intervene to reconsider the decision to handover the mgmt & operation of the Airport to a private bidder, despite the State govt having the requisite experience to manage airports efficiently." https://t.co/I9QN1KEEqO
— ANI (@ANI) August 20, 2020
राज्य के वित्त मंत्री डॉ. थॉमस इसाक ने आज ट्वीट किया, 'अडानी की बोली के बराबर बोली के प्रस्ताव के बावजूद केरल सरकार के दावे को खारिज कर तिरुवनंतपुरम हवाईअड्डे को अडानी के हाथों दे दिया गया। केरल के प्रस्ताव को स्वीकार करने के पीएमओ के वादे को तोड़ा गया। केरल के लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे।”
Thiruvananthapuram airport privatised to Adani rejecting the claim of Kerala govt , even after offer to match Adani’s rate . PMO’s promise to accept Kerala proposal broken. People of Kerala will not accept this act of brazen cronyism.#Airportprivatisation
— Thomas Isaac (@drthomasisaac) August 20, 2020
नागर विमानन मंत्री हरदीप पुरी ने दी पूरी प्रक्रिया की जानकारी
हवाईअड्डों की 2019 की निजीकरण प्रक्रिया के बारे में पुरी ने ट्विटर पर कहा, 'पट्टा हासिल करने वाली बोली में प्रति यात्री 168 रुपये शुल्क का जिक्र था जबकि केएसआईडीसी (केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम) ने प्रति यात्री 135 रुपये और बोली लगाने वाली तीसरी कंपनी ने 63 रुपये प्रति यात्री की बोली लगाई थी।'
Winning bid quoted ₹168 per passenger, KSIDC quoted ₹135 per passenger & third qualifying bidder was at ₹63 per passenger.
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) August 20, 2020
Thus, despite special provision of RoFR being given to GoK, they could not qualify in international bidding process carried out in a transparent manner.
प्रति यात्री शुल्क 2019 की शुरुआत में हुई छह हवाईअड्डों की बोली प्रक्रिया का पैमाना था। यह छह हवाईअड्डे- लखनऊ, अहमदाबाद, मैंगलोर, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम थे। अडानी एंटरप्राइजेज ने इन छह हवाईअड्डों के लिए सबसे ज्यादा बोली लगाई थी।
पुरी ने कहा कि बोली प्रक्रिया से पहले केंद्र और केरल सरकार में यह सहमति बनी थी कि अगर केएसआईडीसी की बोली जीतने वाली बोली के 10 प्रतिशत के दायरे में रहती है तो हवाईअड्डे का पट्टा उसे दिया जाएगा। हालांकि अडानी की बोली और केएसआईडीसी की बोली में बोली प्रक्रिया के दौरान 19.64 प्रतिशत का अंतर था इसलिए अडानी को पट्टा हासिल हुआ।
पुरी ने कहा, 'इसलिए केरल सरकार को आरओएफआर (पहले खारिज करने का अधिकार) का विशेष प्रावधान दिए जाने के बावजूद वे पारदर्शी तरीके से हुई बोली प्रक्रिया के लिए अर्हता प्राप्त नहीं कर सके।'