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ऑपरेशन करते हुए चली गई लाइट, डॉक्टर्स ने टार्च जलाकर की सर्जरी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 22 Jun 2016 01:49 PM IST
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सुनने में यह बड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन ये घटना बिल्कुल हकीकत है। मामला ग्वालियर के कमलाराज अस्पताल का है, जहां डॉक्टरों ने बिजली गुल हो जाने पर टॉर्च की रोशनी में ही सर्जरी कर दी। वह भी एक नहीं बल्कि डॉक्टरों ने दो सर्जरी पूरी की।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक कमलाराज अस्पताल में मंगलवार सुबह दो महिलाओं को सर्जरी के लिए लाया गया।
अलग-अलग ऑपरेशन थिएटर में उनकी सर्जरी की तैयारी चल रही थी इसी दौरान बिजली चली गई। ऑपरेशन थिएटर में अंधेरा छा गया। इस दौरान जेनरेटर से बिजली की व्यवस्था सुचारू करने की कोशिश हुई लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली।
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टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक कमलाराज अस्पताल में मंगलवार सुबह दो महिलाओं को सर्जरी के लिए लाया गया।
अलग-अलग ऑपरेशन थिएटर में उनकी सर्जरी की तैयारी चल रही थी इसी दौरान बिजली चली गई। ऑपरेशन थिएटर में अंधेरा छा गया। इस दौरान जेनरेटर से बिजली की व्यवस्था सुचारू करने की कोशिश हुई लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली।
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टॉर्च की रौशनी में 15 मिनट तक चला ऑपरेशन
बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं होने पर आखिर में डॉक्टरों ने टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन पूरा करने की योजना बनाई।
करीब 15 मिनट तक टॉर्च की रोशनी में ये सर्जरी चली। जिसके बाद विद्युत सप्लाई बहाल हो सकी। सूत्रों के मुताबिक इस मामले की जानकारी जल्द ही अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर जेएस सिकरवार को दी गई।
पूरे मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन मामले की जांच में जुट गया। जिसमें पता चला कि विद्युत ऊर्जा के बहाली में देरी के पीछे जेनरेटर की समस्या नहीं थी बल्कि, इसे चलाने वाला शख्स ही मौके पर नहीं था।
जेनरेटर वाला कमरा भी बंद था। जिस शख्स पर जेनरेटर चालने की जिम्मेदारी थी वह जेनरेटर रुम बंद करके कहीं चला गया था।
करीब 15 मिनट तक टॉर्च की रोशनी में ये सर्जरी चली। जिसके बाद विद्युत सप्लाई बहाल हो सकी। सूत्रों के मुताबिक इस मामले की जानकारी जल्द ही अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर जेएस सिकरवार को दी गई।
पूरे मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन मामले की जांच में जुट गया। जिसमें पता चला कि विद्युत ऊर्जा के बहाली में देरी के पीछे जेनरेटर की समस्या नहीं थी बल्कि, इसे चलाने वाला शख्स ही मौके पर नहीं था।
जेनरेटर वाला कमरा भी बंद था। जिस शख्स पर जेनरेटर चालने की जिम्मेदारी थी वह जेनरेटर रुम बंद करके कहीं चला गया था।
