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गुजरात में जीत का पंच लगाने को भाजपा तैयार
संजय मिश्र, नई दिल्ली
Updated Wed, 25 Oct 2017 05:12 PM IST
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केंद्रीय चुनाव आयोग ने गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करते हुए सूबे के चुनाव का बिगुल बजा दिया है। 9 और 14 दिसंबर को दो चरणों में गुजरात विधानसभा के चुनाव संपन्न होंगे। पहले चरण में दक्षिण और सौराष्ट्र के इलाकों से चुनाव की शुरुआत कर आयोग ने भाजपा की राह आसान कर दी है।
यह वो इलाके हैं, जहां भाजपा को कांग्रेस के जातिगत कार्ड से कोई मुश्किल नहीं है। पार्टी की रणनीति सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात से अपने पक्ष में बयार बहाकर मध्य और उत्तर गुजरात के जातीय गणित को भेदने की रहेगी। दूसरे चरण में मध्य और उत्तर गुजरात के इलाकों में चुनाव होने हैं। ये वो इलाका है, जहां भाजपा अभी जातीय गणित में मुश्किलों का सामना कर रही है।
उत्तर गुजरात में पटेल आंदोलन के अगुवा हार्दिक पटेल का आधार है तो मध्य गुजरात में अल्पेश ठाकोर के रूप में ओबीसी फैक्टर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा रहा है। पहले चरण के तहत होने वाले चुनाव के इलाकों दक्षिण और सौराष्ट्र में इन नेताओं का आधार ज्यादा नहीं है, इसीलिए पहले चरण का चुनाव भाजपा के पाले का चुनाव माना जा रहा है। दक्षिण गुजरात में आदिवासी समुदाय का बोलबाला है, तो सौराष्ट्र में भाजपा के लिए राहत बताई जा रही है। यहां पीएम मोदी ने हाल ही में तमाम योजनाओं का उद्घाटन भी किया है। वैसे चुनाव के ऐलान से पहले ही भाजपा ने अपनी तैयारियां सुनिश्चित कर रखी हैं।
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जीत के लिए भाजपा का होमवर्क पूरा
चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद जीत का दावा करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने कहा है कि वे राष्ट्रवाद और विकास के मुद्दे पर जनता के बीच जाएंगे। उन्होंने दो तिहाई बहुमत के साथ भाजपा की जीत का दावा किया है। यदि भाजपा गुजरात में अपनी जीत दर्ज कर पाने में कामयाब रहती है तो उसकी यह लगातार पांचवी जीत होगी। वर्ष 1998 से लगातार सूबे में भाजपा की सरकार चली आ रही है।
पढ़ें: मोदी या राहुल किसके लिए सियासी 'वाटरलू' साबित होगा गुजरात
पार्टी के आला नेताओं का दावा है कि चुनाव की तारीखों के ऐलान से पूर्व ही भाजपा ने जीत का पंच लगाने के लिए अपने होमवर्क को पूरा कर लिया है। कांग्रेस पार्टी के जरिए पैदा किए जा रहे जातिगत दावों के बावजूद भाजपा न सिर्फ अपनी जीत के प्रति आश्वस्त है बल्कि उसे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के मिशन 150 के पूरा होने की उम्मीद है। सूबे में जीत का पंच लगाने के लिए भाजपा ने बूथ स्तर से लेकर जनता को साधने तक की सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
केंद्रीय नेताओं की देखरेख में प्रदेश भाजपा बीते 5-6 महीनों से ही चुनावी मोड में है। पीएम नरेंद्र मोदी का लोकप्रिय चेहरा, माइक्रो प्रबंधन के धनी अमित शाह की रणनीति के बावजूद पार्टी ने अपने सबसे बड़े चुनाव प्रबंधनकार वित्त मंत्री अरुण जेटली को प्रदेश के चुनाव अभियान का प्रभारी बनाया है। तो शाह के सबसे करीबी समझे जाने वाले महासचिव भूपेंद्र यादव राज्य के भाजपा प्रभारी हैं।
नर्मदा यात्रा और गुजरात गौरव यात्रा सरीखी दो यात्राओं के जरिए भाजपा सूबे की जनता के बीच नीचे तक अपनी बात पहुंचा चुकी है। हालांकि सोशल मीडिया में विकास पागल हो गया सरीखा कांग्रेस की ओर से शुरू किया गया प्रचार बेशक उस पर भारी पड़ा है। मगर भाजपा रणनीतिकारों की मानें तो सोशल मीडिया की दीवार भी उन्होंने मजबूत बना ली है। विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन कार्यक्रमों के जरिए पीएम मोदी की क्षेत्रवार सभाएं हो चुकी हैं। आयोग के जरिए चुनाव की घोषणा से पहले ही भाजपा ने अपना चुनावी होमवर्क पूरा कर लिया है।
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यह वो इलाके हैं, जहां भाजपा को कांग्रेस के जातिगत कार्ड से कोई मुश्किल नहीं है। पार्टी की रणनीति सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात से अपने पक्ष में बयार बहाकर मध्य और उत्तर गुजरात के जातीय गणित को भेदने की रहेगी। दूसरे चरण में मध्य और उत्तर गुजरात के इलाकों में चुनाव होने हैं। ये वो इलाका है, जहां भाजपा अभी जातीय गणित में मुश्किलों का सामना कर रही है।
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उत्तर गुजरात में पटेल आंदोलन के अगुवा हार्दिक पटेल का आधार है तो मध्य गुजरात में अल्पेश ठाकोर के रूप में ओबीसी फैक्टर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा रहा है। पहले चरण के तहत होने वाले चुनाव के इलाकों दक्षिण और सौराष्ट्र में इन नेताओं का आधार ज्यादा नहीं है, इसीलिए पहले चरण का चुनाव भाजपा के पाले का चुनाव माना जा रहा है। दक्षिण गुजरात में आदिवासी समुदाय का बोलबाला है, तो सौराष्ट्र में भाजपा के लिए राहत बताई जा रही है। यहां पीएम मोदी ने हाल ही में तमाम योजनाओं का उद्घाटन भी किया है। वैसे चुनाव के ऐलान से पहले ही भाजपा ने अपनी तैयारियां सुनिश्चित कर रखी हैं।
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जीत के लिए भाजपा का होमवर्क पूरा
चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद जीत का दावा करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने कहा है कि वे राष्ट्रवाद और विकास के मुद्दे पर जनता के बीच जाएंगे। उन्होंने दो तिहाई बहुमत के साथ भाजपा की जीत का दावा किया है। यदि भाजपा गुजरात में अपनी जीत दर्ज कर पाने में कामयाब रहती है तो उसकी यह लगातार पांचवी जीत होगी। वर्ष 1998 से लगातार सूबे में भाजपा की सरकार चली आ रही है।
पढ़ें: मोदी या राहुल किसके लिए सियासी 'वाटरलू' साबित होगा गुजरात
पार्टी के आला नेताओं का दावा है कि चुनाव की तारीखों के ऐलान से पूर्व ही भाजपा ने जीत का पंच लगाने के लिए अपने होमवर्क को पूरा कर लिया है। कांग्रेस पार्टी के जरिए पैदा किए जा रहे जातिगत दावों के बावजूद भाजपा न सिर्फ अपनी जीत के प्रति आश्वस्त है बल्कि उसे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के मिशन 150 के पूरा होने की उम्मीद है। सूबे में जीत का पंच लगाने के लिए भाजपा ने बूथ स्तर से लेकर जनता को साधने तक की सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
केंद्रीय नेताओं की देखरेख में प्रदेश भाजपा बीते 5-6 महीनों से ही चुनावी मोड में है। पीएम नरेंद्र मोदी का लोकप्रिय चेहरा, माइक्रो प्रबंधन के धनी अमित शाह की रणनीति के बावजूद पार्टी ने अपने सबसे बड़े चुनाव प्रबंधनकार वित्त मंत्री अरुण जेटली को प्रदेश के चुनाव अभियान का प्रभारी बनाया है। तो शाह के सबसे करीबी समझे जाने वाले महासचिव भूपेंद्र यादव राज्य के भाजपा प्रभारी हैं।
नर्मदा यात्रा और गुजरात गौरव यात्रा सरीखी दो यात्राओं के जरिए भाजपा सूबे की जनता के बीच नीचे तक अपनी बात पहुंचा चुकी है। हालांकि सोशल मीडिया में विकास पागल हो गया सरीखा कांग्रेस की ओर से शुरू किया गया प्रचार बेशक उस पर भारी पड़ा है। मगर भाजपा रणनीतिकारों की मानें तो सोशल मीडिया की दीवार भी उन्होंने मजबूत बना ली है। विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन कार्यक्रमों के जरिए पीएम मोदी की क्षेत्रवार सभाएं हो चुकी हैं। आयोग के जरिए चुनाव की घोषणा से पहले ही भाजपा ने अपना चुनावी होमवर्क पूरा कर लिया है।
सामाजिक आयोजन से जनता को साधने की कवायद
सुषमा स्वराज
चुनाव के ऐलान से पहले जनता को साधने के लिए भाजपा ने जमीन पर जो अपनी तैयारी की है, उसमें सबसे पहले पार्टी नेता जीतू वघानी के नेतृत्व में उमर गांव से अंबाजी तक निकाली गई यात्रा थी। कांग्रेस के तमाम विरोध के बावजूद वघानी की यह यात्रा सफल रही थी। इससे आदिवासियों के मन में भाजपा के प्रति प्रेम है। दीन दयाल उपाध्याय जन्मशती के जरिए भाजपा ने 15 से 30 सितंबर के बीच सभी बूथों पर सामाजिक आयोजन किए थे।
इसमें केंद्र सरकार की सामाजिक योजनाओं के प्रचार के साथ गरीबों के बीच सेवा कार्य और स्वच्छता अभियान सरीखे कार्यक्रमों का आयोजन कर जनता को जोड़ा गया था। इसके अलावा नर्मदा यात्रा का आयोजन पार्टी ने किया था। नर्मदा बांध की ऊंचाई बढ़ाने और बांध का कार्य शुरू होने से गुजरात को होने वाले फायदे जनता के बीच गिनाने के लिए दो माह पहले पार्टी ने यह यात्रा निकाली थी। यह यात्रा सूबे के सभी विधानसभा से गुजरी थी।
पढ़ें: दो चरणों में होंगे गुजरात विधानसभा चुनाव, 9 और 14 दिसंबर को वोटिंग, 18 को नतीजे
इसके बाद सोशल गणित मजबूत करने के लिए पार्टी ने नाराज पटेलों को साधने की कवायद में गुजरात गौरव यात्रा का आयोजन किया। इस यात्रा की कमान पूरी तरह से सूबे के दो गुजराती नेताओं को दी गई थी। 2 से 16 अक्टूबर तक चली यह यात्रा भी करीब 149 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरी थी। इस यात्रा के तहत पार्टी ने पीएम मोदी समेत अपने सभी बड़े नेताओं को मैदान में उतारा था। राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, शिवराज सिंह चौहान, नितिन गडकरी और स्मृति ईरानी सरीखे सभी नेता इस यात्रा की विभिन्न सभाओं में शामिल हुए थे।
संगठन की माइक्रो तैयारियां
चुनाव से पहले अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने की कवायद में 1 से 10 अक्टूबर तक बूथस्तर पर विस्तारकों का मार्च आयोजित किया गया था। 16 अक्टूबर को पीएम मोदी ने पन्ना प्रमुखों के सम्मेलन को संबोधित कर चुनाव जीतने की भाजपा की सबसे छोटी इकाई में ऊर्जा भरी। इसके अलावा अडि़ख्खम गुजरात (नाम से राजनीतिक टाउन हॉल) कार्यक्रम आयोजित कर भाजपा ने महिला और युवा सरीखे वर्गों को अलग-अलग रिझाने का काम किया।
युवा टाउन हॉल में अमित शाह सीधे 10 लाख से ज्यादा युवाओं से रू-ब-रू हुए तो महिलाओं को साधने के लिए पार्टी ने महिला टाउन हॉल का आयोजन किया था। इसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने महिलाओं के बीच भाजपा की उपलब्धियों को रखा। सुषमा भी करीब लाखों महिलाओं से रू-ब-रू हुईं।
इसमें केंद्र सरकार की सामाजिक योजनाओं के प्रचार के साथ गरीबों के बीच सेवा कार्य और स्वच्छता अभियान सरीखे कार्यक्रमों का आयोजन कर जनता को जोड़ा गया था। इसके अलावा नर्मदा यात्रा का आयोजन पार्टी ने किया था। नर्मदा बांध की ऊंचाई बढ़ाने और बांध का कार्य शुरू होने से गुजरात को होने वाले फायदे जनता के बीच गिनाने के लिए दो माह पहले पार्टी ने यह यात्रा निकाली थी। यह यात्रा सूबे के सभी विधानसभा से गुजरी थी।
पढ़ें: दो चरणों में होंगे गुजरात विधानसभा चुनाव, 9 और 14 दिसंबर को वोटिंग, 18 को नतीजे
इसके बाद सोशल गणित मजबूत करने के लिए पार्टी ने नाराज पटेलों को साधने की कवायद में गुजरात गौरव यात्रा का आयोजन किया। इस यात्रा की कमान पूरी तरह से सूबे के दो गुजराती नेताओं को दी गई थी। 2 से 16 अक्टूबर तक चली यह यात्रा भी करीब 149 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरी थी। इस यात्रा के तहत पार्टी ने पीएम मोदी समेत अपने सभी बड़े नेताओं को मैदान में उतारा था। राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, शिवराज सिंह चौहान, नितिन गडकरी और स्मृति ईरानी सरीखे सभी नेता इस यात्रा की विभिन्न सभाओं में शामिल हुए थे।
संगठन की माइक्रो तैयारियां
चुनाव से पहले अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने की कवायद में 1 से 10 अक्टूबर तक बूथस्तर पर विस्तारकों का मार्च आयोजित किया गया था। 16 अक्टूबर को पीएम मोदी ने पन्ना प्रमुखों के सम्मेलन को संबोधित कर चुनाव जीतने की भाजपा की सबसे छोटी इकाई में ऊर्जा भरी। इसके अलावा अडि़ख्खम गुजरात (नाम से राजनीतिक टाउन हॉल) कार्यक्रम आयोजित कर भाजपा ने महिला और युवा सरीखे वर्गों को अलग-अलग रिझाने का काम किया।
युवा टाउन हॉल में अमित शाह सीधे 10 लाख से ज्यादा युवाओं से रू-ब-रू हुए तो महिलाओं को साधने के लिए पार्टी ने महिला टाउन हॉल का आयोजन किया था। इसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने महिलाओं के बीच भाजपा की उपलब्धियों को रखा। सुषमा भी करीब लाखों महिलाओं से रू-ब-रू हुईं।
भाजपा के सामने चुनौती भी कम नहीं हैं
पीएम नरेंद्र मोदी
क्षेत्रवार हो चुकी हैं पीएम की रैलियां
चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही पीएम मोदी अपने समर्थकों को संदेश दे चुके हैं। विभिन्न योजनाओं के उद्घाटन आयोजनों के जरिए मोदी ने गुजरात के हर क्षेत्र मध्य, सौराष्ट्र, उत्तर और दक्षिण के इलाकों को कवर किया है। अपनी सभाओं के जरिए पीएम मोदी ने गुजरात में किए अपने कार्यों के अलावा केंद्र की उपलब्धियों को भी जनता के बीच रखा है।
अपने संबोधनों में उन्होंने विकास में बाधा पहुंचाने के लिए कांग्रेस पर निशाना भी साधा। साथ में मोदी ने गुजरात अस्मिता का भी लोगों के बीच अहसास कराने का प्रयास किया। वैसे केदारनाथ, द्वारिकाधीश और तमाम मंदिरों में दर्शन के जरिए पीएम मोदी हिंदुत्व के एजेंडे को भी उभारने में सफल रहे हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री विजय रुपानी के जरिए युवाओं के बीच वितरित किए गए टैबलेट का भी जनता में गुणगान हो रहा है। इन तमाम तैयारियों की वजह से ही भाजपा अपनी जीत के पंच का दावा कर रही है।
शाह ने अहमदाबाद में डाल रखा है डेरा
पूर्व में की गई पार्टी की तमाम तैयारियों के बावजूद अमित शाह चुनावी तैयारियों को जमीन पर उतारने, उम्मीदवारों के चयन और कांग्रेस की हर रणनीति का माकूल जवाब देने के लिए पिछले एक हफ्ते से अहमदाबाद में जमे हुए हैं। हर दिन विधानसभा स्तर पर फीडबैक लिए जा रहे हैं। इस कार्य में संगठन के अलावा स्वतंत्र एजेंसियों को कार्य में लगाया गया है। नेताओं के दौरे और जनता में उसके प्रभाव की बारीकी से निगरानी हो रही है।
रास्ते में हैं कुछ चुनौतियां भी
भाजपा के सामने चुनौती भी कम नहीं हैं। सभी कवायदों के बाद नोटबंदी के कुप्रभाव और जीएसटी से नाराज व्यापारियों का गुस्सा भाजपा का खेल खराब कर सकता है। नोटबंदी की वास्तविक तस्वीर और जीएसटी के लागू होने के बाद गुजरात पहला राज्य है, जहां इन मुद्दों की परीक्षा होनी है। देश की नाजुक अर्थव्यवस्था को लेकर भी भाजपा पर सवाल उठ रहे हैं। तो कृषि क्षेत्र की दशा और रोजगार के वायदे भी जुमले साबित हुए हैं।
यही वजह है कि कांग्रेस ने नोटबंदी और जीएसटी को ही भाजपा के खिलाफ मुख्य मुद्दा बना रखा है। मगर भाजपा ने भी आर्थिक मोर्चे पर कांग्रेस को जवाब देने की तैयारी की है। वित्त मंत्री ने मंगलवार को देश के अर्थव्यवस्था की सतरंगी तस्वीर पेश कर बताया की हमारी नींव मजबूत है। इसके अलावा उन्होंने किसानों को साधने की कवायद में रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी बढ़ा दिया है। जीएसटी की दरों में छूट के वक्त भी केंद्र ने सबसे ज्यादा ध्यान गुजरात के व्यापारियों का रखा है।
वस्त्र उद्योग को भारी राहत दी गई है, जीएसटी की दर टेक्सटाइल की वस्तुओं पर से 18 प्रतिशत से कम करके 5 प्रतिशत किया गया है। सेरामिक और मार्बल इंडस्ट्री को राहत देकर कच्छ और सौराष्ट्र के व्यापारियों तक को साधने का प्रयास हुआ है। फाफड़ा और अन्य गुजराती खाद्य वस्तुओं की जीएसटी दर में भी कमी की गई है, ताकि आम गुजराती की भावना सरकार के प्रति नरम रहे। बावजूद उसके केंद्रीय राज्यमंत्री राठवा और मोदी के करीबी सांसद सीआर पाटिल लगातार व्यापारियों के बीच संबंध बनाकर उनकी नाराजगी दूर करने में जुटे हुए हैं।
चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही पीएम मोदी अपने समर्थकों को संदेश दे चुके हैं। विभिन्न योजनाओं के उद्घाटन आयोजनों के जरिए मोदी ने गुजरात के हर क्षेत्र मध्य, सौराष्ट्र, उत्तर और दक्षिण के इलाकों को कवर किया है। अपनी सभाओं के जरिए पीएम मोदी ने गुजरात में किए अपने कार्यों के अलावा केंद्र की उपलब्धियों को भी जनता के बीच रखा है।
अपने संबोधनों में उन्होंने विकास में बाधा पहुंचाने के लिए कांग्रेस पर निशाना भी साधा। साथ में मोदी ने गुजरात अस्मिता का भी लोगों के बीच अहसास कराने का प्रयास किया। वैसे केदारनाथ, द्वारिकाधीश और तमाम मंदिरों में दर्शन के जरिए पीएम मोदी हिंदुत्व के एजेंडे को भी उभारने में सफल रहे हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री विजय रुपानी के जरिए युवाओं के बीच वितरित किए गए टैबलेट का भी जनता में गुणगान हो रहा है। इन तमाम तैयारियों की वजह से ही भाजपा अपनी जीत के पंच का दावा कर रही है।
शाह ने अहमदाबाद में डाल रखा है डेरा
पूर्व में की गई पार्टी की तमाम तैयारियों के बावजूद अमित शाह चुनावी तैयारियों को जमीन पर उतारने, उम्मीदवारों के चयन और कांग्रेस की हर रणनीति का माकूल जवाब देने के लिए पिछले एक हफ्ते से अहमदाबाद में जमे हुए हैं। हर दिन विधानसभा स्तर पर फीडबैक लिए जा रहे हैं। इस कार्य में संगठन के अलावा स्वतंत्र एजेंसियों को कार्य में लगाया गया है। नेताओं के दौरे और जनता में उसके प्रभाव की बारीकी से निगरानी हो रही है।
रास्ते में हैं कुछ चुनौतियां भी
भाजपा के सामने चुनौती भी कम नहीं हैं। सभी कवायदों के बाद नोटबंदी के कुप्रभाव और जीएसटी से नाराज व्यापारियों का गुस्सा भाजपा का खेल खराब कर सकता है। नोटबंदी की वास्तविक तस्वीर और जीएसटी के लागू होने के बाद गुजरात पहला राज्य है, जहां इन मुद्दों की परीक्षा होनी है। देश की नाजुक अर्थव्यवस्था को लेकर भी भाजपा पर सवाल उठ रहे हैं। तो कृषि क्षेत्र की दशा और रोजगार के वायदे भी जुमले साबित हुए हैं।
यही वजह है कि कांग्रेस ने नोटबंदी और जीएसटी को ही भाजपा के खिलाफ मुख्य मुद्दा बना रखा है। मगर भाजपा ने भी आर्थिक मोर्चे पर कांग्रेस को जवाब देने की तैयारी की है। वित्त मंत्री ने मंगलवार को देश के अर्थव्यवस्था की सतरंगी तस्वीर पेश कर बताया की हमारी नींव मजबूत है। इसके अलावा उन्होंने किसानों को साधने की कवायद में रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी बढ़ा दिया है। जीएसटी की दरों में छूट के वक्त भी केंद्र ने सबसे ज्यादा ध्यान गुजरात के व्यापारियों का रखा है।
वस्त्र उद्योग को भारी राहत दी गई है, जीएसटी की दर टेक्सटाइल की वस्तुओं पर से 18 प्रतिशत से कम करके 5 प्रतिशत किया गया है। सेरामिक और मार्बल इंडस्ट्री को राहत देकर कच्छ और सौराष्ट्र के व्यापारियों तक को साधने का प्रयास हुआ है। फाफड़ा और अन्य गुजराती खाद्य वस्तुओं की जीएसटी दर में भी कमी की गई है, ताकि आम गुजराती की भावना सरकार के प्रति नरम रहे। बावजूद उसके केंद्रीय राज्यमंत्री राठवा और मोदी के करीबी सांसद सीआर पाटिल लगातार व्यापारियों के बीच संबंध बनाकर उनकी नाराजगी दूर करने में जुटे हुए हैं।