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अभी तो सप्लाई चालू भी नहीं हुई थी: गुजरात के सूरत में बनते ही ढहा पानी का टैंक, कहां गए 21 करोड़ रुपये?

Tue, 20 Jan 2026 07:27 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सूरत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सूरत Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 20 Jan 2026 07:27 PM IST
सार

अभी तो पानी की सप्लाई चालू भी नहीं हुई थी, इससे पहले ही गुजरात के सूरत में एक पानी का टैंक ढह गया। खास बात यह है कि यह पानी का टैंक 21 करोड़ रुपये की लागत से बना था। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि 21 करोड़ रुपये कहां गए? और इस मामले में की गई शुरुआती जांच में कौन-कौन सी बातें सामने आई?

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Gujarat Surat Water Tank Collapses built at a cost of ₹21 crore raising questions about its quality
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Google Gemini

विस्तार

गुजरात के सूरत में पानी के टैंकों को लेकर हैरान करने वाली घटना सामने आई हैं। यह घटना कमरेज तालुका के गयपागला गांव (तड़कश्वर) में हुई। यहां हाल ही में 21 करोड़ रुपये की लागत से नया पानी का टैंक बनाया गया था। लेकिन जैसे ही टैंक में पानी भरने का परीक्षण शुरू हुआ, वह जोरदार धक्के के साथ ढह गया। बता दें कि यह टैंक 15 मीटर ऊंचा था और इसमें 11 लाख लीटर पानी भरने की क्षमता थी। टैंक का निर्माण तापी जल आपूर्ति योजना के तहत किया गया था, जो 33 गांवों में शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए था।

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ध्यान रहे कि घटना 19 जनवरी को हुई, जब टैंक में पानी भरकर परीक्षण किया जा रहा था। टैंक आधा भरा ही था कि वह जोरदार धक्के और शोर के साथ ढह गया। इस हादसे में तीन मजदूर घायल हुए, जिनमें एक महिला भी शामिल है।

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जांच में यह बताें आई सामने
जांच में पता चला कि टैंक की सामग्री बहुत खराब थी। घटनास्थल पर अधिकारियों ने देखा कि टैंक के मलबे से सीमेंट की परतें अलग हो रही थीं, जो निर्माण में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी की तरफ इशारा करती हैं। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने सीमेंट और लोहे की घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया।

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जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ की जाएगी कार्रवाई

मामले में जल आपूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता जय चौधरी ने बताया कि टैंक अभी परीक्षण के चरण में था। पूरे मामले की तकनीकी जांच एसवीएनआईटी (सूरत) की इंजीनियर टीम करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे के कारण 33 गांवों में पानी की आपूर्ति बाधित हो जाएगी और नए टैंक के निर्माण तक ग्रामीण शुद्ध जल से वंचित रहेंगे।

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