क्या आप बन्नी ग्रास लैंड, बन्नी भैंसों के बारे में जानते हैं?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यह भी पढ़ेंः मोदी पर राहुल का बड़ा हमला, विकास का मुद्दा छोड़ अब अपनी ही बात करते हैं प्रधानमंत्री
गुजरात की चुनावी रिपोर्टिंग करते-करते जब हम भुज से कच्छ के खबसूरत रण की तरफ बढ़े तो कई किलोमीटर लंबा एक उजाड़- बियाबान सा इलाका दिखा... सड़क के दोनों तरफ कई किलोमीटर का खाली इलाका, कहीं कहीं पीली घास फूस तो कहीं लंबी लंबी जंगली घास जैसे झुरमुटे से जंगल। शाम ढलने को थी।
यह भी पढ़ेंः कांग्रेस की यह अपील मानने से चुनाव आयोग का इंकार, कहा- ऐसी कोई पॉलिसी नहीं
पहले दो-चार भैंसें दिखीं, फिर भैंसों का लंबा चौड़ा झुंड नज़र आया। इन जंगली घासों को चरती भैंसों का डील डौल आम भैंसों से एकदम अलग नज़र आया। पता चला यहां की भैंसें दुनिया भर में मशहूर हैं और ये जगह है – बन्नी।
गुजरात में हैं पांच लाख बन्नी भैंसें
बन्नी ग्रास लैंड गुजरात के कच्छ का ऐसा विशाल वनक्षेत्र है, जहां दूर दूर तक पानी नहीं होता। 1819 से पहले यहां इंडस नदी बहती थी, खूब हरियाली थी और यहां की लहलहाती फसलों में सबसे ज्यादा मशहूर था लाल चावल, लेकिन 1819 में आए भीषण भूकंप ने इंडस नदी की दिशा बदल दी और वो उसके बाद से पाकिस्तान के सिंध से होकर बहने लगी।
भूकंप ने ये नया वन क्षेत्र बना दिया करीब पौने चार हजार वर्ग किलोमीटर में फैला विशाल बन्नी वन क्षेत्र दिनभर तपता है। कच्छ के रण से लगे होने की वजह से नमक वाली ज़मीन है। घास जो उगती है, वो पीली होती है, कहीं कहीं एकाध हरे पेड़ पौधे दिखेंगे।
बन्नी ग्रास लैंड पशुओं के चारे के लिए दुनियाभर में मशहूर है। बन्नी भैंसों की नस्ल ऐसी है कि देश के तमाम बड़े डेयरी उत्पादक बन्नी की भैंस खरीदना पसंद करते हैं। पूरे गुजरात में करीब सवा पांच लाख बन्नी भैंसें हैं। इन्हें कच्छी और कुंडी भी कहा जाता है।
इस पूरे इलाके में करीब पांच हजार पशुपालक हैं, जिनमें से बन्नी ब्रीडर्स एसोसिएशन के साथ तकरीबन एक हजार पशुपालक जुड़े हैं। हर साल यहां बन्नी पशु मेला लगता है जहां से देश के तमाम हिस्सों के डेयरी उत्पादक भैंस खरीदते हैं। कीमत है एक लाख रुपए से लेकर तीन लाख रुपये तक। भैंस के अलावा यहां बकरियों, भेड़ों, घोड़े और ऊंटों की भी नस्लें मिलती हैं, लेकिन यहां की भैंसों से ज्यादा मशहूर कोई नहीं।
यहां हैं करीब 40 प्रजातियों की घास
बन्नी ग्रास लैंड में करीब 40 प्रजातियों की घास मिलती है और पशु चारे के तौर पर इतनी पौष्टिक प्रजातियों की घास खाने के बाद इन भैंसों की दूध देने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। आम तौर पर यहां की भैंसे रोज़ाना 10 से 15 लीटर तक दूध देती हैं।
मालधारी के नाम से जाने जाते हैं लोग
वैसे तो दूर दूर तक यहां गांव नज़र नहीं आते लेकिन बन्नी में अगर भीतर तक जाएं तो कई गांव और घर बिखरे बिखरे से मिल जाएंगे। यहां के लोग मालधारी के नाम से जाने जाते हैं। यहां की अपनी अलग संस्कृति है, अपना रंग है। पानी के लिए कृत्रिम स्रोत विकसित किए गए हैं।
ऐसे सूखे क्षेत्रों के लिए अपनाई जाने वाली सिंचाई की पारंपरिक तकनीक भी अपनाई जाती है। दुनियाभर के कृषि वैज्ञानिक बन्नी वनक्षेत्र का अध्ययन करने आते हैं। जाहिर है देखने में बंजर, बियाबान ये रेगिस्तान अपनी भैंसों और घासों की वजह से कैसे दुनिया में मशहूर है, ये यहां से गुज़रने के बाद ही पता चलता है।