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Gujarat Election: स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने बदली इन घरेलू महिलाओं की जिंदगी, कमाने लगीं 50-60 हजार रूपये महीना
सार
सरदार पटेल की केवड़िया में बनी मूर्ति ने आसपास के गांवों की सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी पूरी तरह बदलकर रख दी है। अब उनके गांव के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। लगातार निवेश हो रहा है जिससे लगातार विकास हो रहा है।
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सरदार पटेल की एकता मूर्ति के पास खड़े पिंक ऑटो जिसे केवल महिलाएं ही चलाती हैं।
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
केवड़िया के एक गांव की रहने वाली नीलम (30 वर्ष) अब से कुछ समय पहले तक पूरी तरह एक घरेलू महिला हुआ करती थीं। अपने गांव की दूसरी महिलाओं की तरह घर के कामकाज के बाद खेती के काम में हाथ बंटाना उनका जीवन हुआ करता था। बच्चे, पति और सास-ससुर की सेवा करने में ही उनका दिन बीत जाता था। लेकिन बीते दो साल से उनकी पहचान बदल गई है। अब वे सरदार पटेल की एकता मूर्ति (Statue Of Unity) के पास ऑटो ड्राइवर की तरह काम करती हैं। वे हर महीने 50 से 60 हजार रूपये कमा लेती हैं। अब अपने घर-परिवार और रिश्तेदारों के बीच उनकी पहचान बदल गई है।
एकता मूर्ति (Statue Of Unity) के पास पर्यटकों को अपने ऑटो से घुमा रहीं नीलम ने अमर उजाला को बताया कि पहले अपनी हर जरूरत के लिए उन्हें घर के दूसरे सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। दूसरी आवश्यकताओं के पूरा होने के बाद ही उन्हें अपने लिए कुछ खरीदने का अवसर मिल पाता था। ज्यादातर मामलों में घर की जरूरतें पूरी करने में ही घर का पूरा पैसा खर्च हो जाता था और अपने लिए कुछ खरीदने या कर पाने की हसरत मन में ही रह जाती थी। लेकिन अब परिस्थिति बदल गई है। अब वे अपने लिए ही नहीं, अपने पूरे परिवार के लिए कुछ कर सकती हैं।
शाम को घर जाते समय वे अपने बेटे के लिए चॉकलेट-आइसक्रीम या उसके मनपसंद खिलौने लेकर जाती हैं। यह किसी दूसरे परिवार के लिए बेहद सामान्य सी बात हो सकती है, लेकिन केवड़िया के आदिवासी इलाके में रहने वाले परिवार के लिए यह एक विलासिता की सामग्री हो जाता है जिसे खरीद पाना सबके बूते की बात नहीं होती। लेकिन नीलम और उनके जैसी गांव की सौ अन्य महिलाएं ऐसा कर सकती हैं क्योंकि अब वे कमाती हैं, वे आत्मनिर्भर और सशक्त हैं।
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एकता मूर्ति (Statue Of Unity) के पास पर्यटकों को अपने ऑटो से घुमा रहीं नीलम ने अमर उजाला को बताया कि पहले अपनी हर जरूरत के लिए उन्हें घर के दूसरे सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। दूसरी आवश्यकताओं के पूरा होने के बाद ही उन्हें अपने लिए कुछ खरीदने का अवसर मिल पाता था। ज्यादातर मामलों में घर की जरूरतें पूरी करने में ही घर का पूरा पैसा खर्च हो जाता था और अपने लिए कुछ खरीदने या कर पाने की हसरत मन में ही रह जाती थी। लेकिन अब परिस्थिति बदल गई है। अब वे अपने लिए ही नहीं, अपने पूरे परिवार के लिए कुछ कर सकती हैं।
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शाम को घर जाते समय वे अपने बेटे के लिए चॉकलेट-आइसक्रीम या उसके मनपसंद खिलौने लेकर जाती हैं। यह किसी दूसरे परिवार के लिए बेहद सामान्य सी बात हो सकती है, लेकिन केवड़िया के आदिवासी इलाके में रहने वाले परिवार के लिए यह एक विलासिता की सामग्री हो जाता है जिसे खरीद पाना सबके बूते की बात नहीं होती। लेकिन नीलम और उनके जैसी गांव की सौ अन्य महिलाएं ऐसा कर सकती हैं क्योंकि अब वे कमाती हैं, वे आत्मनिर्भर और सशक्त हैं।
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एक ऑटो ड्राइवर नीलम अमर उजाला से बात करते हुए।
- फोटो : Amar Ujala
नीलम ने बताया कि ऑटो के किराए के रूप में कंपनी को उन्हें प्रतिदिन 700 रूपये देने पड़ते हैं। लेकिन यह पैसा देने के बाद भी वे प्रतिदिन लगभग 1500-1600 रूपये बचा लेती हैं। जब पर्यटक ज्यादा आते हैं तो यह कमाई 2000 से 3000 रूपये तक प्रतिदिन भी हो जाती है। सरदार पटेल की केवड़िया में बनी मूर्ति ने केवल नीलम ही नहीं, उनके जैसी आसपास के गांवों की सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी पूरी तरह बदलकर रख दी है।
सीमा भी एक ऑटो ड्राइवर हैं। वे बताती हैं कि उनका पति नशा पीने का आदती है। अक्सर उन्हें पति के हिंसा का शिकार भी होना पड़ता था। परिवार की कमाई का एक बड़ा हिस्सा वह स्वयं अपने लिए खर्च करता था। लेकिन दो साल से जब से उन्होंने ऑटो ड्राइवर के रूप में कमाना शुरू किया है, परिस्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब परिवार और पूरे गांव के लोगों के बीच उनकी इज्जत बढ़ गई है। उनके सास-ससुर और छठीं-आठवीं में पढ़ने वाली दो बेटियां अब उन्हें बहुत सम्मान की दृष्टि से देखती हैं। पति भी अब उनसे ज्यादा सही तरीके से बात करता है। यह पूरा बदलाव केवल एकता मूर्ति के बनने के कारण ही आया है।
नीलम ने बताया कि उनके पूरे इलाके में रोजगार का कोई साधन उपलब्ध नहीं था। लोग खेती-बाड़ी, नर्मदा नदी में मछली पकड़ना और वन की लकड़ी बेचकर ही कुछ पैसा कमा पाते थे। गांव से बाहर दूर जाकर उन्हें बेचना भी बड़ी मेहनत का काम हुआ करता था। लेकिन एकता मूर्ति के स्थापित होते ही उनके क्षेत्र की तस्वीर तेजी से बदल रही है। आसपास बड़े-बड़े होटल खुल रहे हैं। कई बड़ी कंपनियों ने अपने कार्यालय खोले हैं जहां गांव के आसपास के लोगों को रोजगार मिल रहा है। एकता मूर्ति ने इस पिछड़े आदिवासी इलाके में विकास की नई ज्योति पैदा कर दी है। अब उनके गांव के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। लगातार निवेश हो रहा है जिससे लगातार विकास हो रहा है।
नीलम और सीमा के जैसी सौ ऑटो ड्राइवर, और एकता मूर्ति के रास्ते में फल, जूस या अन्य सामान बेच रही महिलाओं के माध्यम से इस पूरे इलाके की तस्वीर बदल रही है। महिलाओं के प्रति घर-परिवार और गांव में नजरिया बदल रहा है। पैसा कमाने का रास्ता खुलने से गांवों के बदलने का रास्ता तैयार हो रहा है। लोगों को उम्मीद है कि अब उनकी जिंदगी 'शहर वालों की तरह' बेहतर हो सकेगी।
सीमा भी एक ऑटो ड्राइवर हैं। वे बताती हैं कि उनका पति नशा पीने का आदती है। अक्सर उन्हें पति के हिंसा का शिकार भी होना पड़ता था। परिवार की कमाई का एक बड़ा हिस्सा वह स्वयं अपने लिए खर्च करता था। लेकिन दो साल से जब से उन्होंने ऑटो ड्राइवर के रूप में कमाना शुरू किया है, परिस्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब परिवार और पूरे गांव के लोगों के बीच उनकी इज्जत बढ़ गई है। उनके सास-ससुर और छठीं-आठवीं में पढ़ने वाली दो बेटियां अब उन्हें बहुत सम्मान की दृष्टि से देखती हैं। पति भी अब उनसे ज्यादा सही तरीके से बात करता है। यह पूरा बदलाव केवल एकता मूर्ति के बनने के कारण ही आया है।
नीलम ने बताया कि उनके पूरे इलाके में रोजगार का कोई साधन उपलब्ध नहीं था। लोग खेती-बाड़ी, नर्मदा नदी में मछली पकड़ना और वन की लकड़ी बेचकर ही कुछ पैसा कमा पाते थे। गांव से बाहर दूर जाकर उन्हें बेचना भी बड़ी मेहनत का काम हुआ करता था। लेकिन एकता मूर्ति के स्थापित होते ही उनके क्षेत्र की तस्वीर तेजी से बदल रही है। आसपास बड़े-बड़े होटल खुल रहे हैं। कई बड़ी कंपनियों ने अपने कार्यालय खोले हैं जहां गांव के आसपास के लोगों को रोजगार मिल रहा है। एकता मूर्ति ने इस पिछड़े आदिवासी इलाके में विकास की नई ज्योति पैदा कर दी है। अब उनके गांव के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। लगातार निवेश हो रहा है जिससे लगातार विकास हो रहा है।
नीलम और सीमा के जैसी सौ ऑटो ड्राइवर, और एकता मूर्ति के रास्ते में फल, जूस या अन्य सामान बेच रही महिलाओं के माध्यम से इस पूरे इलाके की तस्वीर बदल रही है। महिलाओं के प्रति घर-परिवार और गांव में नजरिया बदल रहा है। पैसा कमाने का रास्ता खुलने से गांवों के बदलने का रास्ता तैयार हो रहा है। लोगों को उम्मीद है कि अब उनकी जिंदगी 'शहर वालों की तरह' बेहतर हो सकेगी।
केवड़िया में ऑटो चलातीं महिलाएं।
- फोटो : Amar Ujala
महिलाओं का सशक्तीकरण और क्षेत्र का विकास उद्देश्य
भाजपा नेता यजुवेंद्र् दुबे ने अमर उजाला को बताया कि यह पूरी बेल्ट आदिवासी बहुल है। गुजरात के दूसरे इलाकों की तरह यहां ज्यादा विकास नहीं हुआ था। निवेश के लिए अनुकूल कारण न होने के कारण बड़ी कंपनियां यहां से दूर थीं, लिहाजा यह इलाका ठहरा हुआ था। पूरे समाज के साथ महिलाओं की स्थिति भी बेहद कमजोर होती थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस इलाके में सरदार पटेल की मूर्ति स्थापित कर इस पूरे क्षेत्र के विकास की उम्मीदों को पंख लगा दिये हैं।
उन्होंने बताया कि अब इस क्षेत्र में बड़ी-बड़ी कंपनियां होटल बना रही हैं, बड़ी इमारतें बन रही हैं, कई उद्योग खुल रहे हैं। स्टेशन और सड़कों के आसपास ज्यादा लोगों के आने-जाने से छोटे-छोटे कामकाज के अवसर बन रहे हैं। इससे अब गांव के पुरूषों-युवाओं को रोजगार मिलने लगा है। महिलाएं ऑटो ड्राइवर या फल-सब्जी बेचकर यहां पैसा कमाने लगी हैं। इससे पूरे गांव-क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। महिलाओं का सशक्तीकरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य है। इस योजना के माध्यम से भी इस आदिवासी इलाके में हजारों महिलाओं और उनके माध्यम से पूरे गांव-समाज की स्थिति बदल गई है। सरदार पटेल की मूर्ति ने पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है।
भाजपा नेता यजुवेंद्र् दुबे ने अमर उजाला को बताया कि यह पूरी बेल्ट आदिवासी बहुल है। गुजरात के दूसरे इलाकों की तरह यहां ज्यादा विकास नहीं हुआ था। निवेश के लिए अनुकूल कारण न होने के कारण बड़ी कंपनियां यहां से दूर थीं, लिहाजा यह इलाका ठहरा हुआ था। पूरे समाज के साथ महिलाओं की स्थिति भी बेहद कमजोर होती थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस इलाके में सरदार पटेल की मूर्ति स्थापित कर इस पूरे क्षेत्र के विकास की उम्मीदों को पंख लगा दिये हैं।
उन्होंने बताया कि अब इस क्षेत्र में बड़ी-बड़ी कंपनियां होटल बना रही हैं, बड़ी इमारतें बन रही हैं, कई उद्योग खुल रहे हैं। स्टेशन और सड़कों के आसपास ज्यादा लोगों के आने-जाने से छोटे-छोटे कामकाज के अवसर बन रहे हैं। इससे अब गांव के पुरूषों-युवाओं को रोजगार मिलने लगा है। महिलाएं ऑटो ड्राइवर या फल-सब्जी बेचकर यहां पैसा कमाने लगी हैं। इससे पूरे गांव-क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। महिलाओं का सशक्तीकरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य है। इस योजना के माध्यम से भी इस आदिवासी इलाके में हजारों महिलाओं और उनके माध्यम से पूरे गांव-समाज की स्थिति बदल गई है। सरदार पटेल की मूर्ति ने पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है।