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गुजरात: बिनौला के खेतों में 1.30 लाख बच्चों को अवैध तरीके से मजदूरी पर लगाया गया
Wed, 21 Oct 2020 04:05 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, अहमदाबाद
एजेंसी, अहमदाबाद
Published by: Kuldeep Singh
Updated Wed, 21 Oct 2020 04:05 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
गुजरात में कपास की खेती के जरिये बिनौला उत्पादन के लिए करीब 1.30 लाख बच्चों को अवैध तरीके से खेतों में मजदूरी पर लगाया गया है। मजदूरी करने वाले इन बच्चों में बड़ी संख्या आदिवासी बच्चों की है।
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एक दिन के लिए मिलती है 150 रुपये मजदूरी
शहर स्थित एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने यह दावा किया है। इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य श्रम विभाग के एक अधिकारी ने कहा है कि वह एनजीओ द्वारा चिह्नित संबंधित क्षेत्रों में टीमों को भेजेंगे और यदि कोई भी गड़बड़ी पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी। एक गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर लेबर रिसर्च एंड एक्शन के सुधीर कटियार ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया कि बीज कंपनियों से किसानों को कम कीमत मिलना इसकी बड़ी वजह है और इसी के चलते खेती के लिए व्यस्कों के बजाय बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें कम पैसे देने पड़ते हैं। कटियार ने दावा किया कि आदिवासी बच्चों को एक दिन की मजदूरी सिर्फ 150 रुपये दी जाती है।
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उन्होंने बताया कि 10 साल पहले उत्तरी गुजरात में इस तरह के खेतों में बच्चों से काम कराने को लेकर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के बाद अब यह उद्योग बनासकांठा, साबरकांठा, अरवल्ली, महीसागर और छोटा उदयपुर जिलों में स्थानांतरित हो गया। कटियार ने कहा, हालांकि स्थानांतरण की वजह से पलायन और बाल तस्करी दक्षिणी राजस्थान क्षेत्र में उल्लेखनीय रूप से कम हुई लेकिन बिनौला उद्योग में बाल मजदूरी जारी है क्योंकि स्थानीय आदिवासी बच्चे इन खेतों में काम कर रहे हैं।
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