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सुप्रीम कोर्ट की सरकार को नसीहत : किसी योजना को शुरू करने से पहले वित्तीय असर का भी ध्यान रखें

Wed, 06 Apr 2022 07:18 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 06 Apr 2022 07:18 PM IST
सार

अदालत ने कहा, हम आपको सलाह देंगे कि जब भी आप इस प्रकार की योजनाओं या विचारों के साथ आगे बढ़ते हैं, तो हमेशा वित्तीय प्रभाव को ध्यान में रखें।

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Govt should have financial impact in mind while coming up with schemes: SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि सरकार को किसी भी योजना को बढ़ाने से पहले हमेशा वित्तीय प्रभाव को ध्यान में रखना चाहिए। अदालत ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है जहां एक अधिकार बनाया गया है लेकिन स्कूल कहां हैं। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति यू यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने की, जो घरों में प्रताड़ित महिलाओं को प्रभावी कानूनी सहायता प्रदान करने और उनके लिए आश्रय गृह बनाने के लिए देश भर में पर्याप्त बुनियादी ढांचे की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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पीठ ने कहा, हम आपको सलाह देंगे कि जब भी आप इस प्रकार की योजनाओं या विचारों के साथ आगे बढ़ते हैं, तो हमेशा वित्तीय प्रभाव को ध्यान में रखें। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी से कहा कि इसका उत्कृष्ट उदाहरण शिक्षा का अधिकार अधिनियम है। आपने एक अधिकार बनाया है, स्कूल कहां हैं? इसलिए, स्कूलों को नगर पालिकाओं, राज्य सरकारों आदि सहित विभिन्न प्राधिकरणों द्वारा स्थापित किया जाना चाहिए। उन्हें शिक्षक कहां मिलते हैं?  
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पीठ ने कहा कि कुछ राज्यों में शिक्षा मित्र हैं और इन व्यक्तियों को नियमित भुगतान के बदले लगभग 5,000 रुपये दिए जाते हैं। जब अदालत राज्य से इसके बारे में पूछती है, तो वे कहते हैं कि बजट की कमी है। इसे समग्रता में देखना होगा, अन्यथा यह केवल जुबानी बन जाता है। भाटी ने पीठ को बताया कि उन्होंने एक पत्र भेजा है जिसमें अदालत के पहले निर्देश के अनुसार विवरण रखने के लिए कुछ समय मांगा गया है।
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शीर्ष अदालत ने फरवरी में केंद्र को एक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा था, जिसमें विभिन्न राज्यों द्वारा डीवी अधिनियम (घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005) के तहत प्रयासों का समर्थन करने के लिए केंद्रीय कार्यक्रमों/योजनाओं की प्रकृति के बारे में विवरण देना शामिल है। इसमें वित्त पोषण की सीमा, वित्तीय सहायता को नियंत्रित करने की शर्तें और नियंत्रण तंत्र शामिल हैं।  

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