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ट्रिब्यूनल करेगा सिख फॉर जस्टिस पर पाबंदी का फैसला
Thu, 08 Aug 2019 11:33 PM IST
संदीप भट्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संदीप भट्ट
Updated Thu, 08 Aug 2019 11:33 PM IST
सार
- दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल के नेतृत्व में ट्रिब्यूनल का गठन किया।
- एसएफजे इस बात का खुलेआम समर्थन करता है और भारत के इस अखंड भाग को चुनौती देता है।
- अमेरिका स्थित एसजेएफ अलगाववादियों के एजेंडा सिख रेफरेंडम 2020 को आगे बढ़ा रहा है।
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विस्तार
केंद्र सरकार ने खालिस्तान समर्थक समूह सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) को प्रतिबंधित संगठन घोषित करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल के नेतृत्व में ट्रिब्यूनल का गठन किया है। ट्रिब्यूनल को यह तय करना होगा कि क्या एसएफजे पर प्रतिबंध लगाने के पर्याप्त कारण है। इससे पहले पिछले महीने सरकार इस संगठन को गैरकानूनी घोषित कर चुकी है।
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संगठन पर बैन लगाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि इस संगठन का प्राथमिक उद्देश्य पंजाब को एक अलग स्वतंत्र और संप्रभु देश घोषित करने का है। एसएफजे इस बात का खुलेआम समर्थन करता है और भारत के इस अखंड भाग को चुनौती देता है।
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अमेरिका स्थित एसजेएफ अलगाववादियों के एजेंडा सिख रेफरेंडम 2020 को आगे बढ़ा रहा है। एसएफजे मुख्यत: ऑनलाइन प्लेटफार्म में सक्रिय है और इसके दो लाख समर्थक हैं, वहीं जमीनी स्तर पर इसके 8 से 10 कार्यकर्ता ही सक्रिय हैं।
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अधिकारियों के मुताबिक एसएफजे के सक्रिय कार्यकर्ता परमजीत सिंह पम्मा ने हाल ही क्रिकेट विश्व कप के दौरान भारत विरोधी नारेबाजी की थी। इसके साथ ही एसएफजे पाकिस्तान स्थित करतापुर गुरुद्वारा जाने वाले श्रद्धालुओं के बीच खालिस्तान रेफरेंडम कराने की योजना है।