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डीपफेक और झूठी खबरों पर लगाम: IT सचिव बोले- सरकार AI कंटेंट नहीं रोक रही, बस पारदर्शिता चाहती है; पढ़ें सबकुछ
Thu, 23 Oct 2025 09:12 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 23 Oct 2025 09:12 PM IST
सार
एआई, डीपफेक और झूठी खबरों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार नए नियम को लागू करने जा रही है। इस मामले पर बात करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने साफ कहा कि सरकार एआई कंटेंट बनाने से किसी को रोक नहीं रही है, बस इस पर एक पारदर्शिता चाहती है। जानें क्या है नया नियम...
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एस. कृष्णन, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सचिव
- फोटो : ANI
विस्तार
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि वह ऑनलाइन सामग्री को नियंत्रित या रोकने की कोशिश नहीं कर रही है, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहती है कि दर्शक यह जान सकें कि कौन-सी सामग्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से बनी है।
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एआई कंटेंट पर लेबल की मांग
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार का मकसद केवल इतना है कि एआई से तैयार की गई सामग्री को लेबल किया जाए, ताकि लोग खुद तय कर सकें कि उस पर भरोसा करना है या नहीं। कृष्णन ने कहा, 'हम यह नहीं कह रहे कि ऐसा कंटेंट डालो मत या बनाओ मत। बस इतना कह रहे हैं कि यह बता दो कि यह सामग्री सिंथेटिक यानी कृत्रिम रूप से तैयार की गई है।'
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क्या है नया नियम?
बुधवार को केंद्र ने आईटी नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत, जो भी सामग्री एआई से बनाई या संशोधित हो, उस पर स्पष्ट लेबल और मेटाडेटा लगाया जाएगा। लेबल साफ दिखने वाला और न मिटाया जा सकने वाला होना चाहिए। यह जिम्मेदारी यूजर्स, एआई सेवा प्रदाताओं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, तीनों पर होगी। इन नियमों का उद्देश्य है डीपफेक और गलत जानकारी से होने वाले नुकसान को रोकना।
किस पर लागू होंगे ये नियम?
50 लाख से अधिक यूजर्स वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स- जैसे यूट्यूब, फेसबुक, एक्स- को 'सार्थक तकनीकी उपायों' से ऐसे कंटेंट की पहचान और लेबलिंग करनी होगी। एआई टूल बनाने वाले डेवलपर्स को अपने सिस्टम में ऐसी व्यवस्था करनी होगी जिससे लेबल अपने आप लग सके।
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सरकार की नीति- नवाचार पहले, नियंत्रण बाद में
कृष्णन ने कहा कि भारत की नीति इनोवेशन फर्स्टट की है- यानी पहले तकनीक को बढ़ावा देना और जहां जरूरी हो वहीं नियम बनाना। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई सिर्फ अवैध या कानून-विरोधी सामग्री पर ही होगी, सिर्फ एआई कंटेंट होने पर नहीं। सरकार ने इन प्रस्तावित बदलावों पर हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। इस पर सुझाव देने की आखिरी तारीख 6 नवंबर, 2025 तय की गई है।
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एआई कंटेंट पर लेबल की मांग
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार का मकसद केवल इतना है कि एआई से तैयार की गई सामग्री को लेबल किया जाए, ताकि लोग खुद तय कर सकें कि उस पर भरोसा करना है या नहीं। कृष्णन ने कहा, 'हम यह नहीं कह रहे कि ऐसा कंटेंट डालो मत या बनाओ मत। बस इतना कह रहे हैं कि यह बता दो कि यह सामग्री सिंथेटिक यानी कृत्रिम रूप से तैयार की गई है।'
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क्या है नया नियम?
बुधवार को केंद्र ने आईटी नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत, जो भी सामग्री एआई से बनाई या संशोधित हो, उस पर स्पष्ट लेबल और मेटाडेटा लगाया जाएगा। लेबल साफ दिखने वाला और न मिटाया जा सकने वाला होना चाहिए। यह जिम्मेदारी यूजर्स, एआई सेवा प्रदाताओं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, तीनों पर होगी। इन नियमों का उद्देश्य है डीपफेक और गलत जानकारी से होने वाले नुकसान को रोकना।
किस पर लागू होंगे ये नियम?
50 लाख से अधिक यूजर्स वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स- जैसे यूट्यूब, फेसबुक, एक्स- को 'सार्थक तकनीकी उपायों' से ऐसे कंटेंट की पहचान और लेबलिंग करनी होगी। एआई टूल बनाने वाले डेवलपर्स को अपने सिस्टम में ऐसी व्यवस्था करनी होगी जिससे लेबल अपने आप लग सके।
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सरकार की नीति- नवाचार पहले, नियंत्रण बाद में
कृष्णन ने कहा कि भारत की नीति इनोवेशन फर्स्टट की है- यानी पहले तकनीक को बढ़ावा देना और जहां जरूरी हो वहीं नियम बनाना। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई सिर्फ अवैध या कानून-विरोधी सामग्री पर ही होगी, सिर्फ एआई कंटेंट होने पर नहीं। सरकार ने इन प्रस्तावित बदलावों पर हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। इस पर सुझाव देने की आखिरी तारीख 6 नवंबर, 2025 तय की गई है।