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सूचना आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा ब्योरा देने से सरकार ने किया इनकार
Mon, 03 Jun 2019 01:03 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Mon, 03 Jun 2019 01:03 AM IST
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सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा ब्योरा सार्वजनिक नहीं करेगी। सरकार का कहना है कि इन नियुक्तियों के लिए हुई बैठक का ब्योरा कैबिनेट कागजात होते हैं, जो अंतिम निर्णय आने से पहले सार्वजनिक नहीं किए जा सकते।
सरकार ने सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश बत्रा की तरफ से दाखिल आरटीआई प्रार्थना पत्र के जवाब में कहा कि उसकी तरफ से 4 जनवरी, 2019 को दिए गए विज्ञापन के बाद 256 लोगों ने आवेदन किया था। बत्रा ने नियुक्ति प्रक्रिया के ‘पारदर्शी’ नहीं होने का आरोप लगाया था और आवेदकों की सूची, चयन प्रक्रिया, फाइल पर की गई टिप्पणियों की जानकारी मांगी थी।
लेकिन सरकार के मुताबिक, फाइल में दी गई जानकारी अभी सचिवों की समिति के सामने रखी जानी है और उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया पूरी होना भी अभी बाकी है। ऐसे में आरटीआई एक्ट-2005 की धारा 8 (1) (आई) के तहत यह सब जानकारी नहीं दी जा सकती और फाइलों की टिप्पणियां पढ़ने की इजाजत भी नहीं दी जा सकती।
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हालांकि कमोडोर बत्रा ने सरकार के जवाब को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से 15 फरवरी को दिए गए आदेश की अवमानना करार दिया है। बत्रा का कहना है कि सर्च कमेटी को सचिवों की समिति के बराबर नहीं माना जा सकता।
30 हजार से ज्यादा मामले हैं सीआईसी में लंबित
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत सुनवाई करने वाली सर्वोच्च संस्था सीआईसी में 11 सूचना आयुक्तों के पद तय किए गए हैं, जबकि इसमें मुख्य सूचना आयुक्त समेत 7 ही सूचना आयुक्त कार्यरत हैं। सीआईसी के सामने इस समय 30 हजार से ज्यादा आवेदन लंबित हैं।
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सरकार ने सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश बत्रा की तरफ से दाखिल आरटीआई प्रार्थना पत्र के जवाब में कहा कि उसकी तरफ से 4 जनवरी, 2019 को दिए गए विज्ञापन के बाद 256 लोगों ने आवेदन किया था। बत्रा ने नियुक्ति प्रक्रिया के ‘पारदर्शी’ नहीं होने का आरोप लगाया था और आवेदकों की सूची, चयन प्रक्रिया, फाइल पर की गई टिप्पणियों की जानकारी मांगी थी।
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लेकिन सरकार के मुताबिक, फाइल में दी गई जानकारी अभी सचिवों की समिति के सामने रखी जानी है और उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया पूरी होना भी अभी बाकी है। ऐसे में आरटीआई एक्ट-2005 की धारा 8 (1) (आई) के तहत यह सब जानकारी नहीं दी जा सकती और फाइलों की टिप्पणियां पढ़ने की इजाजत भी नहीं दी जा सकती।
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हालांकि कमोडोर बत्रा ने सरकार के जवाब को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से 15 फरवरी को दिए गए आदेश की अवमानना करार दिया है। बत्रा का कहना है कि सर्च कमेटी को सचिवों की समिति के बराबर नहीं माना जा सकता।
30 हजार से ज्यादा मामले हैं सीआईसी में लंबित
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत सुनवाई करने वाली सर्वोच्च संस्था सीआईसी में 11 सूचना आयुक्तों के पद तय किए गए हैं, जबकि इसमें मुख्य सूचना आयुक्त समेत 7 ही सूचना आयुक्त कार्यरत हैं। सीआईसी के सामने इस समय 30 हजार से ज्यादा आवेदन लंबित हैं।