अप्रैल से आईसीडीएस, मिडडे मील योजना के जरिए फोर्टीफाइड चावल की आपूर्ति करेगी सरकार
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पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लक्ष्य के तहत केंद्र सरकार ने फोर्टीफाइड चावल का वितरण बढ़ाने और इसकी आपूर्ति अप्रैल से एकीकृत बाल विकास सेवाओं (आईसीडीएस) और मिडडे मील योजना के जरिए करने का फैसला लिया है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
इस चावल को अभी छह राज्यों के एक-एक जिले में पायलट प्रोजेक्ट में राशन की दुकानों के जरिये दिया जा रहा
मौजूदा समय में फोर्टीफाइड चावल राशन की दुकानों के जरिये बांटा जा रहा है। आमतौर पर इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) कहा जाता है। 2019-20 में तीन महीने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर 15 राज्यों में से छह प्रदेशों में एक-एक जिले में इस योजना को लागू करने की पहचान की गई थी।
इस योजना का मकसद देश में एनीमिया और माइक्रो पोषण तत्वों की कमी को पूरा करना था। अधिकारी ने बताया कि देश की जनसंख्या का करीब 65 फीसदी चावल को मुख्य भोजन के तौर पर खाते हैं। चावल का फोर्टिफिकेशन भोजन में विटामिन और खनिज तत्वों को बढ़ाने तथा पोषण सुरक्षा की दिशा में एक कदम है। साथ ही देश में एनीमिया और कुपोषण से लड़ने के लिए एक प्रभावी कदम है।
उन्होंने बताया कि इस साल जनवरी तक छह राज्यों आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में पीडीएस के जरिये 94,574 टन फोर्टीफाइड चावल का वितरण किया गया।
केरल, ओडिशा और मध्य प्रदेश जल्द ही पायलट योजना के तहत फोर्टीफाइड चावल का वितरण शुरू करेंगे। सरकार अन्य राज्यों से इसके वितरण को लेकर संपर्क में है। पीडीएस के अलावा खाद्य मंत्रालय ने आईसीडीएस और मिडडे मील योजना के जरिये अप्रैल से इसके वितरण को बढ़ाने का निर्णय लिया है।
फोर्टीफाइड चावल के फायदे
- फोर्टीफाइड चावल में पौष्टिक गुणवत्ता आम चावल के मुकाबले अधिक
- जिन जिलों में कुपोषण की समस्या अधिक है, वहां मुख्य आहार होगा
- चावल पर आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन ए और विटामिन बी-12 का लेप होगा
फोर्टीफाइड चावल में पोषक तत्व
फोर्टीफाइड चावल में लौह तत्व, विटामिन बी-12 तथा फोलिक एसिड युक्त फोर्टीफाइड चावल करनेल (एफआके) का मिश्रण होता है, जो लोगों को खुराक में आवश्यक पौष्टिक तत्वों की पूर्ति के साथ ही कुपोषण के नियंत्रण में काफी मददगार साबित होगा।