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FCRA: केंद्रीय गृह मंत्रालय से NGO सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज को झटका, एफसीआरए पंजीकरण छह महीने के लिए निलंबित

Tue, 20 Jun 2023 10:36 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 20 Jun 2023 10:36 PM IST
सार

गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए), 2010, किसी पंजीकृत समाचारपत्र के संवाददाताओं, स्तंभकारों, कार्टूनिस्ट, संपादकों, मालिकों, मुद्रकों और प्रकाशकों के विदेशी अंशदान स्वीकार करने पर रोक लगाता है।

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Government suspends FCRA registration of Centre For Equity Studies for 6 months
केंद्रीय गृह मंत्रालय (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : ANI (फाइल फोटो)

विस्तार

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली स्थित एनजीओ ‘सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज’ के एफसीआरए पंजीकरण को कानून के विभिन्न प्रावधानों के कथित उल्लंघन करने पर छह महीने के लिए निलंबित कर दिया है। विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संस्थाओं को विदेशी योगदान प्राप्त करने की अनुमति देता है।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए), 2010, किसी पंजीकृत समाचारपत्र के संवाददाताओं, स्तंभकारों, कार्टूनिस्ट, संपादकों, मालिकों, मुद्रकों और प्रकाशकों के विदेशी अंशदान स्वीकार करने पर रोक लगाता है। आदेश में कहा गया है, हालांकि, यह पाया गया है कि गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के ट्रस्टी हर्ष मंदेर (Harsh Mander) नियमित रूप से समाचार पत्रों के लिए कॉलम लिखते रहे हैं और 2011-12 से 2017-18 के दौरान एफसीआरए खाते से पेशेवर प्राप्तियों या भुगतान के रूप में 12,64,671 रुपये की राशि का विदेशी अंशदान स्वीकार किया है।

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संपर्क करने पर, मंदेर ने पुष्टि की कि उन्हें ‘सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज’ के निलंबन का आदेश मिला है। उन्होंने इसे 'असाधारण' बताया। उन्होंने बताया कि यह उन सवालों को उठाता है जो सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज की बारीकियों से परे हैं। क्योंकि एक ओर नोटिस जो सुझाव देता है वह यह है कि अल्पसंख्यक के अधिकारों की रक्षा और धार्मिक समुदायों आदि के बीच एकता को बढ़ावा देने के लिए मैं जिस तरह का काम करता हूं- इन मुद्दों पर बोलना-लिखना देश की संप्रभुता के खिलाफ गतिविधि बताया जा रहा है।
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दूसरी तरफ, यदि आपको एफसीआरए फंड से पारिश्रमिक प्राप्त होता है, तो आप किसी तरह का कॉलम लिखने से वंचित कर दिए जाते हैं। ये दोनों ऐसे प्रश्न हैं जिनका समाधान करना होगा कि किसी के पास अंतरात्मा की आवाज की किस प्रकार की स्वतंत्रता है। क्या आप इसी तरह संविधान की रक्षा में खड़े हो सकते हैं। वे बड़े सवाल हैं जो नोटिस में उठाए गए हैं। गृह मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि संगठन ने गैर-एफसीआरए संघों को विदेशी अंशदान के हस्तांतरण के लिए वाहक के रूप में काम किया है।


दावा किया गया है कि एनजीओ द्वारा प्राप्त विदेशी योगदान कथित तौर पर गवर्निंग काउंसिल के सदस्यों बिराज पटनायक (35.69 लाख रुपये), मो. अनवर यूआई हक (3.65 लाख रुपये), सज्जाद हसन (34.08 लाख रुपये) आदि द्वारा उपयोग किया गया।

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