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जमात में शामिल 2500 लोगों के वीजा पर रुख स्पष्ट करे सरकार: सुप्रीम कोर्ट

Tue, 30 Jun 2020 08:11 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क/ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। 
न्यूज डेस्क/ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।  Published by: योगेश साहू Updated Tue, 30 Jun 2020 08:11 AM IST
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Government should clarify the stance on visas of 2500 people involved in Jamaat: Supreme Court
supreme court - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय से 35 देशों के 2500 नागरिकों के वीजा को लेकर रुख स्पष्ट करने को कहा है, जिन्हें तब्लीगी जमात की गतिविधियों में शामिल होने पर दस साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है। कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि क्या इन लोगों का वीजा रद्द किया गया है? मामले की अगली सुनवाई दो जुलाई को होगी।  

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जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने सोमवार को गृहमंत्रालय से पूछा कि क्या जमात के विदेशी सदस्यों का वीजा रद्द करने का फैसला सामूहिक रूप से लिया गया था या व्यक्तिगत तौर पर यह आदेश पारित किया गया था।
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शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि अगर वीजा रद्द हुए तो इन लोगों को वापस क्यों नहीं भेजा गया। कोर्ट मौलाना अला हदरामी और एक गर्भवती महिला समेत अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने कहा, सरकार की ओर से कोई व्यक्तिगत आदेश पारित नहीं किया, बल्कि सामान्य प्रेस रिलीज जारी की गई थी। सिंह ने सरकार के इस कदम को असांविधानिक और गैरकानूनी करार देने का अनुरोध किया। साथ ही वीजा बहाल कर जमात के सदस्यों को उनके देश जाने की इजाजत देने की मांग की। 


ब्लैकलिस्ट करना क्या होता है
ब्लैकलिस्ट उन सभी भारतीय और विदेशी नागरिकों के नामों का संकलन है, जिनके खिलाफ गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किया जाता है। विदेश मंत्रालय के विदेश विभाग द्वारा तैयार की गई सूची को सभी भारतीय राजनयिक मिशनों के साथ-साथ भारत के अंदर सभी आव्रजन चेक-प्वाइंट के साथ साझा किया जाता है ताकि कुछ व्यक्तियों के देश से बाहर निकलने या प्रवेश को रोका जा सके। जो या तो उनकी व्यक्तिगत क्षमता की वजह से या उनके किसी संगठन से जुड़े होने की वजह से होता है।

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