ताकि न रहे संशय: महिला आरक्षण बिल अभी ही क्यों, परिसीमन विधेयक साथ क्यों लाए? सरकार ने दिए 14 सवालों के जवाब
केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण बिल से जुड़े FAQs जारी किए हैं। इसमें परिसीमन, लोकसभा सीटों की बढ़ोतरी और 33% महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी गई है।
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विस्तार
केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण बिल से जुड़े कई अहम सवालों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए 14 सवालों का एक सेट ऑफ FAQ जारी किया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब संसद में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक और परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ाना चाहती है। इसी पर सरकार ने विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है।
ऐसे में सरकार द्वारा जारी किए गए FAQs के जरिए विस्तार से समझते हैं कि महिला आरक्षण बिल, परिसीमन और लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी को लेकर क्या तर्क और स्पष्टीकरण दिए गए हैं...
1. 16 अप्रैल, 2026 को केंद्र सरकार ने लोकसभा में कौन से बिल पेश किए?
16 अप्रैल को केंद्र सरकार ने लोकसभा में तीन खास बिल पेश किए: संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026, डिलिमिटेशन बिल, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026।
2. केंद्र सरकार की ओर से ये तीनों विधेयक सदन ने अभी क्यों लाए गए?
इस सवाल पर केंद्र सरकार ने बताया गया कि नारीशक्ति वंदन अधिनियम में यह प्रावधान किया गया है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। अगर केंद्र सरकार 2026 जनगणना और फिर उसके आधार पर परिसीमन की प्रतीक्षा करती तो महिलाओं को 33 प्रतिशत का आरक्षण का लाभ 2029 के आम चुनाव में भी नहीं मिल पाता, इसीलिए देश की आधी-आबादी को जल्द-से-जल्द लाभ पहुंचाने के लिए इसको 2026 जनगणना के आधार पर होने वाले परिसीमन से अलग करना जरूरी था।
3. अगर ये तीनों विधेयक सदन से पारित हो जाते तो इससे देश को क्या लाभ होता?
इस पर सरकार ने बताया कि अगर ये तीनों विधेयक सदन से पारित हो जाते, तो राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ये कानून बन जाते और देश की महिलाओं को 2029 के लोकसभा चुनाव में ही 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल सकता था, जिससे उनका लंबे समय से प्रतीक्षित अधिकार मिल पाता।
4. नारी शक्ति वंदन अधिनियम के साथ अभी परिसीमन की बात क्यों लाई गई?
सरकार इतनी ज्यादा सीटें क्यों बढ़ा रही थी? इसको लेकर सरकार की ओर से कहा गया कि परिसीमन का अर्थ है किसी निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं में परिवर्तन। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए परिसीमन आवश्यक है। लोकसभा में सीटों की संख्या को 1976 में 550 निर्धारित की गई थी। 1971 में भारत की जनसंख्या लगभग 54 करोड़ थी। आज यह 140 करोड़ है, इसलिए लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना महत्वपूर्ण है। इससे संसद में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सकेगा।
5. लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने के पीछे मुख्य कारण और तर्क क्या थे?
इसको लेकर सरकार ने बताया कि यह प्रस्ताव जनसंख्या के अनुपात में सीटों के विस्तार पर आधारित था। एक समान 50 प्रतिशत बढ़ोतरी से सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों का अनुपात अभी की तरह बना रहता। इस सिद्धांत के आधार पर लोकसभा की सीटों की संख्या वर्तमान की 543 से बढ़कर लगभग 815 होती। इसलिए लोक सभा में सीटों की संख्या की अधिकतम सीमा 550 से बढ़कर 850 की जा रही थी।
6. क्या नए परिसीमन प्रस्ताव में दक्षिण भारतीय राज्यों या छोटे राज्यों को नुकसान होता?
सदन में ये बातें काफी की गईं। सरकार ने साफ किया कि सभी राज्यों की सीटों में एक समान 50 प्रतिशत वृद्धि होती। दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में कोई कमी नहीं आती। दक्षिणी राज्यों के पास वर्तमान में लोक सभा में 23.76 प्रतिशत सीटें हैं। विधेयकों के पारित होने के बाद यह बढ़कर लगभग 23.87 प्रतिशत हो जातीं। उदाहरण के तौर पर तमिलनाडु की सीटें भी इसी अनुपात में बढ़तीं और राज्य को कोई नुकसान नहीं होता।
7. क्या केंद्र सरकार परिसीमन आयोग अधिनियम में बदलाव करके राजनीतिक लाभ लेना चाहती थी?
जब कुछ राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, तब सरकार क्यों बिल लाई? क्या इसका तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में हो रहे चुनाव पर असर होगा? इस सवाल पर कहा गया कि केंद्र सरकार ने परिसीमन आयोग अधिनियम में कोई परिवर्तन नहीं किया, बल्कि पुराने कानून को यथावत रखा। परिसीमन आयोग की सिफारिशें तभी लागू होतीं, जब संसद उन्हें मंजूरी देती और राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलती। वर्तमान में हो रहे चुनावों, जैसे तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल पर इस प्रक्रिया का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि 2029 तक सभी चुनाव मौजूदा व्यवस्था और वर्तमान निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर ही कराए जाएंगे।
8. जाति जनगणना को टालने के लिए सरकार यह संविधान संशोधन बिल लेकर आई थी?
इसको लेकर सरकार ने साफ किया कि वह तीन महीने पहले ही जाति जनगणना की समयबद्ध प्रक्रिया शुरू कर चुकी है, इसलिए इसे टालने का कोई प्रश्न नहीं उठता। वर्तमान जनगणना प्रक्रिया में पहले घरों की गणना की जा रही है और इसके बाद जब व्यक्तियों की गणना होगी, तब जाति से संबंधित जानकारी भी पूरी तरह दर्ज की जाएगी।
9. सरकार ने महिला आरक्षण को वर्ष 2029 तक टालने के बजाय 2024 के आम चुनावों में ही इसे तुरंत लागू क्यों नहीं कर दिया, इसे 2011 की आधार पर ही क्यों नहीं लागू किया गया?
इस पर सरकार का कहना है कि आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन आवश्यक है। परिसीमन एक व्यापक चर्चा आधारित प्रक्रिया है। परिसीमन पूरा करने में लगभग दो वर्ष लगते हैं। इसलिए महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन विधेयक के साथ ये तीनों विधेयक लाए गए थे।
10. क्या नए परिसीमन प्रस्ताव से जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को नुकसान होता?
इसको लेकर सरकार ने बताया कि नहीं, नए परिसीमन प्रस्ताव से जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को कोई नुकसान नहीं होता। प्रस्ताव के तहत सभी राज्यों की सीटों में समान अनुपात में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की बात थी, जिससे किसी राज्य का प्रतिनिधित्व प्रतिशत घटने के बजाय यथावत रहता या थोड़ा बढ़ता।
11. क्या नए परिसीमन प्रस्ताव से अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के प्रतिनिधित्व और अधिकारों को नुकसान पहुंचता?
इसको लेकर सरकार की ओर से कहा गया कि हमारे संविधान में समय-समय पर परिसीमन का प्रावधान है और इसी प्रक्रिया के माध्यम से अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति सहित विभिन्न वर्गों के लिए सीटों का पुनर्निर्धारण और वृद्धि होती है। अगर ये तीनों विधेयक पारित हो जाते, तो लगभग 850 सीटों वाले सदन में आरक्षित सीटों की संख्या 131 से बढ़कर करीब 205 हो जाती, जिससे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधित्व और अधिकारों में बढ़ोतरी होती और किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता।
12. विपक्ष की निरंतर मांग के बावजूद महिला आरक्षण के अंदर मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से कोटा क्यों नहीं दिया गया?
इस पर सरकार ने बताया कि भारत के संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। आरक्षण की नीतियां संविधान में निर्धारित सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन पर आधारित हैं।
13. जब 2024 के आम चुनाव में महिला आरक्षण लागू नहीं होना था, तो 2023 में महिला आरक्षण विधेयक क्यों लाया गया?
इसको लेकर सरकार ने कहा कि 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक लेकर आई। नए संसद भवन में यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ और राज्यसभा से भी इसे मंजूरी मिली। सबने महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया और इस प्रकार नारी शक्ति वंदन विधेयक से अधिनियम बन गया।
14. महिला आरक्षण को केंद्र शासित प्रदेशों जैसे जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और पुडुचेरी में लागू करने के लिए अलग से 'केंद्र शासित प्रदेश विधेयक' क्यों लाया गया था?
इसको लेकर सरकार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाएं अलग 'यूटी एक्ट' से संचालित होती हैं। इन विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए जम्मू-कश्मीर में लगभग 38, दिल्ली में 23 और पुडुचेरी में 10 सीटें आरक्षित करने के लिए यह तकनीकी संशोधन अनिवार्य था, इसीलिए अलग से केंद्र शासित प्रदेश विधेयक' लाया गया।
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