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सरकार ने किया स्वीकार, पहले लीक हुये थे सालाना रोजगार सर्वेक्षण के आंकड़े
Thu, 18 Jul 2019 05:42 PM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Thu, 18 Jul 2019 05:42 PM IST
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सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
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देश में बेरोजगारी के सर्वेक्षण से जुड़े आंकड़े लीक होने की बात सरकार ने भी स्वीकार की है। बता दें कि आधिकारिक तौर पर जारी किये जाने से पहले इस सर्वेक्षण के कुछ आंकड़े लीक हुये थे। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह बात स्वीकारी है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण का परिणाम लीक हुआ था, यह बात दुरुस्त है। सर्वेक्षण का परिणाम 30 मई 2019 में सार्वजनिक होना था मगर इसके पहले इसका डाटा लीक हुआ।
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सिंह ने इसे गंभीर मामला बताते हुये कहा, ‘हम यह नहीं कह सकते हैं कि डाटा किसने लीक किया था। लेकिन किसी ने लीक जरूर किया है। सरकार ने इसे गंभरता से लिया है। इसके पीछे शायद किसी का कोई एजेंडा हो, यह हम कह नहीं सकते हैं। हम यह पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि किसने डाटा लीक किया था।’
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उन्होंने सर्वेक्षण में बेरोजगारी की दर अपने अधिकतम स्तर 6.1 प्रतिशत पर पहुंचने की वजह से जुड़े पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि जुलाई 2017 से जून 2018 के दौरान राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय द्वारा किये गये आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण से उपलब्ध पहले अनुमान के आधार पर सामान्य स्थिति में बेरोजगारी की दर 6.1 प्रतिशत रही है।
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सिंह ने स्पष्ट किया कि पहले पांच साल के अंतराल पर यह सर्वेक्षण किया जाता था, लेकिन अब यह सर्वेक्षण नये तरीके से प्रतिवर्ष किये जाने की शुरुआत की गई है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष की तिमाही के आधार पर किये जाने वाले इस सर्वेक्षण में नया तरीका अपनाये जाने के कारण बेरोजगारी की दर 2011-12 में किये गये पिछले सर्वेक्षण में दर्शाई गई 2.2 प्रतिशत से अधिक आई है।
उन्होंने कहा कि अगर पिछले तरीके से ही सर्वेक्षण होता तो यह दर पहले के स्तर के आसपास ही रहती। सिंह ने कहा कि नये तरीके अपनाने, एक ही शहर में प्रत्येक परिवार को चार बार सर्वेक्षण में शामिल करने और हर साल सर्वेक्षण करने जैसे बदलावों के कारण शहरी और ग्रामीण इलाकों में यह बढ़ोतरी हुयी है। अगले साल अगर इसमें बढ़ेातरी होने पर यह माना जा सकता है कि बेरोजगारी से निपटने के लिये सरकार के प्रयास काबिल नहीं है।