गोरखपुर, सिंदरी और बरौनी के खाद संयंत्र फिर से होंगे चालू
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, झारखंड के सिंदरी व बिहार के बरौनी स्थित बेकार हो चुके खाद प्लांट के पुनरोत्थान के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तीन नवरत्न कंपनियां आगे आई हैं। इन कंपनियों में बिजली उत्पादन करने वाली एनटीपीसी, कोयला उत्पादन करने वाली कोल इंडिया और पेट्रोलियम पदार्थों की कंपनियां आईओसी शामिल हैं।
तीनों कंपनियां मिलकर एक स्पेशल पर्पस व्हीकल बनाएंगी, जो इन तीन खाद प्लाटों को फिर से कामयाब बनाएंगी। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी की बैठक में इस फैसले को मंजूरी दे दी गई।
कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय कानून व आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि सरकार ने गोरखपुर, सिंदरी व बरौनी स्थित यूरिया बनाने वाले प्लांट के पुनरोत्थान का फैसला पूर्व में लिया था और फैसले के मुताबिक इन तीनों प्लांटों को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल मंगवाए थे।
लगभग 6,000 लोगों को रोजगार मिलेगा
लेकिन किसी भी कंपनी की तरफ से इन प्लांटों को पुनर्जीवित करने के मामले में दिलचस्पी नहीं दिखाने की वजह से सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तीन कंपनियों की मदद से इनके पुनरोत्थान का फैसला किया है।
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक गोरखपुर, सिंदरी व बरौनी प्लांट में बनने वाली यूरिया से बिहार, पश्चिम बंगाल व झारखंड के किसानों की जरूरतें पूरी होंगी। प्रसाद ने बताया कि गेल इंडिया जगदीशपुर से हल्दिया तक गैस पाइपलाइन बिछाने का काम कर रही है और ये तीनों खाद प्लांट इस पाइपलाइन से गैस खरीदने वाले प्रमुख यूनिटें होंगी।
खाद यूनिट के पुनर्जीवित होने से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड की अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी और वहां प्रत्यक्ष व परोक्ष तौर पर लगभग 6,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। गोरखपुर, सिंदरी व बरौनी के ये प्लांट वर्ष 1990 से 2002 के बीच बेकार घोषित कर दिए गए थे। सबसे बड़ी बात है कि देश के पूर्वी भाग में यूरिया बनाने वाली सिर्फ दो यूनिट असम में हैं।