फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Google Doodle celebrates 97th birth anniversary of Russian mathematician Olga Ladyzhenskaya

रूसी गणितज्ञ ओल्गा लैडिजेनस्काया के 97वें जन्मदिन पर गूगल ने बनाया डूडल

Thu, 07 Mar 2019 10:13 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 07 Mar 2019 10:13 AM IST
विज्ञापन
Google Doodle celebrates 97th birth anniversary of Russian mathematician Olga Ladyzhenskaya
गूगल ने गणितज्ञ ओल्गा लैडिजेनस्काया का बनाया डूडल

आज गूगल डूडल बनाकर रूस की गणितज्ञ ओल्गा लैडिजेनस्काया का 97वें जन्मदिन मना रहा है। लैडिजेनस्काया को उनके पार्शियल डिफरेंस इक्वेशंस और फ्लुइड डायनामिक्स के काम के लिए जाना जाता है। गूगल ने उनके जन्मदिन पर न केवल डूडल बनाया है बल्कि यूट्यूब पर उनकी जिंदगी और उपलब्धियों को लेकर एक वीडियो भी बनाई है। 

विज्ञापन


गूगल ने अपने डूडल को अंडाकार आकार का बनाया है जो संभावित उनके लीनियर और क्वासिलीनियर एलिप्टिक इक्वेशंस के प्रति श्रद्धांजलि को दिखाता है। ओल्गा का जन्म 7 मार्च 1922 में सोवियत यूनियन के शहर कोलोग्रिव में हुआ था। उनके पिता गणित के अध्यापक थे और उन्होंने ही उन्हें गणित के प्रति प्यार के लिए प्रोत्साहित किया था।
विज्ञापन


ओल्गा का बचपन त्रासदी में बीता। उनके पिता को सोवियत यूनियन सरकार ने 'लोगों का दुश्मन' करार दिया था। वह जब केवल 15 साल की थीं तब उनके पिता को सोवियत यूनियन के आंतरिक मंत्रालय ने गिरफ्तार कर लिया था और उन्हें जल्द ही मार दिया गया था। असाधारण ग्रेड पाने के बावजूद परिवार के नाम की वजह से उन्हें लेनिनग्राड विश्वविद्यालय में दाखिला नहीं दिया गया। यह रूस का सबसे बड़ा और पुराना विश्वविद्यालय है।
विज्ञापन
विज्ञापन


1952 में ओल्गा को दूसरा मौका तब मिला जब सोवियत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जोसेफ स्टालिन की मौत हो गई। 1953 में ओल्गा ने डॉक्टोरल थीसीस पेश की और फिर उन्हें डिग्री दी गई। वह सोवियत के मशहूर गणितज्ञ इवान पेट्रोव्सकी की छात्रा थीं। इसके बाद उन्होंने लेनिनग्राड विश्वविद्यालय के स्टेकलोव इंस्टीट्यूट में पढ़ाना शुरू कर दिया। 


सोवियत यूनियन के टूटने के बाद भी वह रूस में ही रहीं जबकि उस दौरान प्रोफेसर्स को काफी कम तनख्वाह मिलती थी। उन्होंने नेवियर-स्टोक्स इक्वेशंस के लिए फाइनाइट डिफरेंफ मैथड निकाला। जिसके जरिए इन सवालों को आसानी से हल किया जा सके। 2002 में निधन से पहले उन्हें लोमोनसोव गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed