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Climate Change: 'पेरिस समझौते के बावजूद वैश्विक जलवायु कार्रवाई बहुत धीमी...', संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी
Tue, 28 Oct 2025 01:10 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 28 Oct 2025 01:10 PM IST
सार
Climate Change: संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दुनिया के देश ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में धीमी प्रगति कर रहे हैं, लेकिन यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचने के लिए पर्याप्त रफ्तार नहीं है।
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वायु प्रदूषण
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
पेरिस जलवायु समझौते को अपनाए दस साल बीत चुके हैं। दुनिया के देश ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में कुछ प्रगति तो कर रहे हैं, लेकिन यह रफ्तार जलवायु परिवर्तन के सबसे बुरे प्रभावों से बचने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
राष्ट्रीय जलवायु योगदान (एनडीसी) की समग्र रिपोर्ट मंगलवार को जारी की गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2024 से सितंबर 2025 के बीच 64 देशों ने नई राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं के बारे में बताया है, उससे उम्मीद है कि साल 2035 तक उन देशों का प्रदूषण (यानी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन) 2019 की तुलना में लगभग 17 फीसदी कम हो जाएगा।
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'उत्सर्जन कम करने के लिए रफ्तार की जरूरत'
रिपोर्ट के मुताबिक, यह वास्तव में एक सकारात्मक प्रगति है, लेकिन उत्सर्जन को कम करने के लिए अभी तेज रफ्तार की जरूरत है, ताकि जलवायु कार्रवाई का लाभ हर देश और हर व्यक्ति तक पहुंच सके।
धरती का तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस सीमित रखना लक्ष्य
पेरिस समझौते के तहत हर देश की अपनी जलवायु कार्ययोजना होती है, जिसमें उत्सर्जन घटाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के उपाय तय किए जाते हैं। इन योजनाओं से यह तय होता है कि क्या दुनिया इस सदी में तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रख पाएगी या नहीं।
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तय समयसीमा पर 90 फीसदी देशों ने नहीं सौंपी योजना
राष्ट्रीय के रूप में निर्धारित योगदान यानी एनडीसी के लिए अपने देश की योजना की जानकारी देने की अंतिम तारीख 10 फरवरी 2025 थी। लेकिन 90 फीसदी से अधिक देशों ने यह समयसीमा चूक दी। रिपोर्ट में शामिल 64 देशों में अमेरिका, रूस, जापान, ब्राजील, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और नाइजीरिया जैसे देश हैं। चीन, भारत, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, ईरान और सऊदी अरब ने अभी अपनी योजनाएं नहीं सौंपी हैं।
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राष्ट्रीय जलवायु योगदान (एनडीसी) की समग्र रिपोर्ट मंगलवार को जारी की गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2024 से सितंबर 2025 के बीच 64 देशों ने नई राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं के बारे में बताया है, उससे उम्मीद है कि साल 2035 तक उन देशों का प्रदूषण (यानी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन) 2019 की तुलना में लगभग 17 फीसदी कम हो जाएगा।
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'उत्सर्जन कम करने के लिए रफ्तार की जरूरत'
रिपोर्ट के मुताबिक, यह वास्तव में एक सकारात्मक प्रगति है, लेकिन उत्सर्जन को कम करने के लिए अभी तेज रफ्तार की जरूरत है, ताकि जलवायु कार्रवाई का लाभ हर देश और हर व्यक्ति तक पहुंच सके।
धरती का तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस सीमित रखना लक्ष्य
पेरिस समझौते के तहत हर देश की अपनी जलवायु कार्ययोजना होती है, जिसमें उत्सर्जन घटाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के उपाय तय किए जाते हैं। इन योजनाओं से यह तय होता है कि क्या दुनिया इस सदी में तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रख पाएगी या नहीं।
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तय समयसीमा पर 90 फीसदी देशों ने नहीं सौंपी योजना
राष्ट्रीय के रूप में निर्धारित योगदान यानी एनडीसी के लिए अपने देश की योजना की जानकारी देने की अंतिम तारीख 10 फरवरी 2025 थी। लेकिन 90 फीसदी से अधिक देशों ने यह समयसीमा चूक दी। रिपोर्ट में शामिल 64 देशों में अमेरिका, रूस, जापान, ब्राजील, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और नाइजीरिया जैसे देश हैं। चीन, भारत, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, ईरान और सऊदी अरब ने अभी अपनी योजनाएं नहीं सौंपी हैं।
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