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Goa: जर्मन चांसलर शोल्ज ने बिट्स पिलानी के छात्रों से की बातचीत, कहा- सीमाओं को बलपूर्वक नहीं बदला जाना चाहिए

Sun, 27 Oct 2024 07:45 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला,
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 27 Oct 2024 07:45 AM IST
सार

जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज ने गोवा दौरे पर बिट्स पिलानी के छात्रों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि सीमाओं को बलपूर्वक नहीं बदला जाना चाहिए। शोल्ज ने कहा कि भारत और जर्मनी नवाचार गतिशीलता व स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

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German Chancellor Olaf Scholz Goa Visit Boundaries should not be changed forcefully
जर्मन चांसलर शोल्ज (फाइल) - फोटो : एक्स @Olaf Scholz

विस्तार

जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज ने कहा कि सीमाओं को ‘युद्ध या बल’ से नहीं बदला जाना चाहिए। यूक्रेन पर रूस का आक्रमण आज अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है। क्योंकि यह सीमाओं को बदलने के बारे में है। राष्ट्रीय सीमाओं की अखंडता शांति का आधार है। शोल्ज ने गोवा यात्रा के दौरान वास्को में बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स) पिलानी के छात्रों से बातचीत करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने मोरमुगाओ बंदरगाह पर डॉक किए गए जर्मन नौसेना के जहाज एफजीएस बाडेन-वुर्टेमबर्ग का भी दौरा किया।
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अफ्रीका में सौ साल तक युद्ध चलेगा
जर्मन चांसलर ने याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र में केन्या के राजदूत ने एक बार सुरक्षा परिषद में कहा था कि अफ्रीकी देशों की सीमाएं औपनिवेशिक शक्तियों के अधिकारियों से खींची गई हैं। यदि हम सभी सही सीमा खोजने की कोशिश करेंगे और युद्ध में उतरेंगे, तो अफ्रीका में सौ साल तक युद्ध चलेगा। शोल्ज ने कहा, ऐसा नहीं होना चाहिए, आज की सीमाएं खतरे में नहीं आनी चाहिए। यह वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए मुख्य पहलुओं में से एक है। शोल्ज ने कहा, सुचारू व्यापार के लिए सुरक्षित समुद्र की आवश्यकता है। देशों को इन सार्वभौमिक समझौतों के नियमों का पालन करना चाहिए। शोल्ज ने कहा, यह सबसे शक्तिशाली का नियम नहीं होना चाहिए, यह ऐसा नियम होना चाहिए जिसे हम सब मिलकर विकसित करें, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून न्यायालय के मामले में है।
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नवाचार, गतिशीलता व स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहे भारत-जर्मनी...
शोल्ज ने कहा, भारत और जर्मनी नवाचार, गतिशीलता और स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बहुत सारे भारतीय अब जर्मनी में रह रहे हैं, जिनमें लगभग 50,000 छात्र शामिल हैं। यह 2022 की संख्या से 50 फीसदी अधिक है। उन्होंने कहा, मुझे यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि भारत अब जर्मन विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के सबसे बड़े समूह का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि जर्मनी के भारत के साथ अच्छे संबंध हैं।
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