G20 Summit: भारत मंडपम के डिनर से निकलेंगे कई बड़े संदेश! इस 'डिप्लोमेसी' पर लगी हैं पूरी दुनिया की निगाहें
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विस्तार
वैसे तो जी20 में शामिल देशों के सभी बड़े नेताओं की बैठकों का अहम दौर शनिवार की दोपहर को हो गया। लेकिन इस अहम बैठक के बाद एक और मुलाकात का सिलसिला होना है, जिस पर समूची दुनिया की निगाहें लगी हुई हैं। यह दौर शनिवार को भारत मंडपम में आयोजित होने वाले उसे मेगा डिनर का है, जिसमें कुछ ऐसी मुलाकातें भी होनी तय मानी जा रहीं हैं। जिसके मायने समूची दुनिया में अलग-अलग निकाले जा सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़े कार्यक्रम में आयोजित किया जाने वाला डिनर पहले से तय किसी कार्यक्रम के घोषित प्रोटोकॉल का हिस्सा तो होता है, लेकिन यहां होने वाली मुलाकातें और बातचीत अमूमन अनौपचारिक ही होती हैं। इसलिए ऐसे डिनर अकसर डिप्लोमेसी के लिहाज से बड़े महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जी20 बैठक में दुनिया के वह सभी ताकतवर मुल्क शिरकत कर रहे हैं, जो समूची दुनिया की 80 फीसदी आबादी और तकरीबन इतनी ही ग्लोबल इकॉनमी को कंट्रोल करते हैं। राजनीतिक विश्लेषक रूपेश चक्रवर्ती कहते हैं कि नई दिल्ली में आयोजित हो रही जी20 की बैठक में कई देश ऐसे हैं, जो एक प्लेटफार्म पर तो मौजूद हुए हैं, लेकिन उनके विचार और उनकी सैद्धांतिक सहमतियां निजी तौर पर यहां शामिल हुए कुछ मुल्कों से बिल्कुल अलग हैं। वह कहते हैं कि ऐसे कार्यक्रमों के दौरान आयोजित किए जाने वाले डिनर तमाम देशों के कुछ आपसी तौर पर उलझे हुए मुद्दों को सुलझाने के लिए बड़ा प्लेटफार्म भी साबित होते हैं। इसलिए शनिवार की रात भारत मंडपम में आयोजित किया जाने वाला डिनर महत्वपूर्ण आयोजन बन रहा है।
वह कहते हैं कि शनिवार रात आयोजित होने वाले इस मेगा डिनर में अलग-अलग देशों के नेताओं के बीच में अनौपचारिक बातचीत भी हो सकती है। उनका कहना है कि अब यह बातचीत किसी पॉलिसी मैटर में होती है, या कुछ उलझे हुए मसलों को लेकर या सिर्फ सामान्य। लेकिन ऐसे डिनर को अलग-अलग देशों के बड़े-बड़े नेताओं की शिरकत करने के चलते डिप्लोमेटिक मामलों को सुलझाने के साथ रिश्तों को बनाने और आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। चक्रवर्ती कहते हैं कि समूची दुनिया में डिप्लोमेटिक मामलों को सुलझाने और अपने रिश्तों को और मजबूत करने के लिए एक बेहतर प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए डिनर डिप्लोमेसी हमेशा से कारगर उपाय भी रही है। यही वजह है कि शनिवार के डिनर पर समूची दुनिया की निगाहें लगी हुई हैं।
विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि मेजबान देश की ओर से आयोजित किए गए ग्रैंड डिनर में अलग-अलग देशों के नेताओं की होने वाली अनौपचारिक बातचीत कई बार सियासत को भी प्रभावित करती है। विदेश सेवा से जुड़े रहे रिटायर्ड अधिकारी आरएन सिन्हा कहते हैं कि ऐसे कार्यक्रमों में कई बार कुछ तस्वीरें और वीडियो ऐसे भी सामने आते हैं, जो चर्चा का विषय भी बन जाते हैं। उनका कहना है कि पुतिन और ट्रंप के मामले में ऐसे ही एक कार्यक्रम में सामने आई तस्वीर में अमेरिका की सियासत में बड़ा बवाल भी खड़ा कर दिया था। वह कहते हैं कि हालात ऐसे हो गए थे कि इस तस्वीर के बाद जो मुल्क रूस के विरोध में थे और अमेरिका के पक्ष में थे, उनका रुख अमेरिका से मुड़ने लगा था।
विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि शनिवार की रात को भारत मंडपम में होने वाले जी20 के ग्रैंड डिनर में रूस और यूक्रेन के चल रहे युद्ध में अलग-अलग नजरिया रखने वाले देशों के नेता शामिल होंगे। ऐसे में उन देशों के नेताओं के आमने-सामने पड़ने पर मिलने की जो तस्वीर निकाल कर सामने आएगी, वह भी कई तरह से संदेश देने वाली होगी। हालांकि विदेशी मामलों के जानकार रूपेश चक्रवर्ती कहते हैं कि जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशों के नेताओं को आत्मीयता के साथ एकरूपता से जोड़कर रखा है, उससे किसी तरीके का कोई विवाद सामने आने का मतलब ही नहीं बनता। इसलिए शनिवार की रात को आयोजित होने वाले ग्रैंड डिनर में यह देखा जाना बेहद जरूरी होगा कि किस देश के नेता का कौन से देश के नेता के साथ औपचारिक और अनौपचारिक बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ता हुआ दिखता है। वह कहते हैं ऐसे कार्यक्रमों के बीच में निकलने वाली तस्वीरों के माध्यम से भविष्य की सियासत और अलग-अलग देशों के रिश्तों की पड़ने वाली नींव का आंकलन भी किया जाता है।