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पश्चिम बंगाल: 'पकौड़े' पर विधानसभा में गरमा-गरम बहस, मंत्री और भाजपा विधायक आमने-सामने

Tue, 20 Sep 2022 09:30 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Amit Mandal Updated Tue, 20 Sep 2022 09:30 PM IST
सार

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार कहा था कि चॉप शिल्प (पकौड़ी उद्योग) से राज्य में बेरोजगारी कम हो सकती है। विधेयक पर बोलते हुए लाहिड़ी ने कहा कि चॉर शिल्प राज्य में औद्योगीकरण का संकेतक नहीं हो सकता।

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Fritter becomes topic of hot discussion in WB Assembly
बंगाल विधानसभा (file photo) - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल का सर्वव्यापी स्ट्रीट फूड चॉप (पकौड़ा) मंगलवार को विधानसभा में गर्मागर्म चर्चा का विषय बन गया। वरिष्ठ मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और अर्थशास्त्री से भाजपा विधायक बने अशोक लाहिड़ी तृणमूल कांग्रेस शासित राज्य में औद्योगिक परिदृश्य पर आमने-सामने आ गए। राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन पर एक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान लाहिड़ी ने कहा कि चॉप शिल्प (पकौड़ा उद्योग) पश्चिम बंगाल में औद्योगीकरण का संकेतक नहीं हो सकता है। मंत्री ने उनसे उन महिलाओं का मजाक नहीं बनाने के लिए कहा था पकौड़े बेचकर गुजारा करते हैं, इसके जवाब में ही लाहिड़ी ने सख्त प्रतिक्रिया दी

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ममता ने कहा था, पकौड़ी उद्योग से राज्य में बेरोजगारी कम हो सकती है
चॉप, सब्जियों, मछली या मांस से भरे हुए गहरा तला हुआ व्यंजन है। राज्य में चॉप बेचने वालों में ज्यादातर महिलाएं हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार कहा था कि चॉप शिल्प (पकौड़ी उद्योग) से राज्य में बेरोजगारी कम हो सकती है। विधेयक पर बोलते हुए लाहिड़ी ने कहा कि चॉर शिल्प राज्य में औद्योगीकरण का संकेतक नहीं हो सकता। वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भट्टाचार्य ने भाजपा विधायक से कहा कि वे 'चॉप' बेचने वाली महिलाओं का अपमान न करें।  
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राज्य पर बढ़ता कर्ज अर्जित राजस्व से कम
लाहिड़ी ने अपने भाषण में दावा किया कि राज्य पर बढ़ता कर्ज अर्जित राजस्व से कम है। उन्होंने कहा कि कुछ समय बाद सरकार को अपने कर्मचारियों को पीएफ और ग्रेच्युटी का भुगतान करना मुश्किल होगा, और यहां तक कि अगर कोई सुधार नहीं हुआ है, तो वेतन भी। यह दावा करते हुए कि आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे कई राज्यों की प्रति व्यक्ति आय पश्चिम बंगाल की तुलना में अधिक है, लाहिड़ी ने कहा कि अगर विकास है, तो यह दिखना भी चाहिए। दिल्ली में सैकड़ों प्रवासी मजदूर बंगाल से हैं। वे निर्माण क्षेत्र में हैं, अन्य नौकरियों में हैं। क्या यह विकास को दर्शाता है? 
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भट्टाचार्य ने कहा कि महामारी के दौरान राज्य का जीएसडीपी 11.41 प्रतिशत बढ़ा जो पूरे देश में एक रिकॉर्ड है। आश्चर्य है कि भाजपा नेता ने अपने भाषण में माकपा के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के 34 साल के शासन का उल्लेख क्यों नहीं किया, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री होने के बावजूद उन पर पक्षपातपूर्ण रुख अपनाने का आरोप लगाया। यह दावा करते हुए कि केंद्र राज्य के लिए हजारों करोड़ रुपये की धनराशि जारी नहीं कर रहा है, भट्टाचार्य ने कहा कि आपके (लाहिरी) के पास इतना बड़ा अनुभव है। हम अपने बकाये का दावा करने के लिए एक साथ क्यों नहीं खड़े होते हैं? 

  

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