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'जल्लाद' शब्द को लेकर महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री ने जताई आपत्ति, लिखा राष्ट्रपति को पत्र

Sat, 07 Mar 2020 08:31 PM IST
अनवर अंसारी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: अनवर अंसारी Updated Sat, 07 Mar 2020 08:31 PM IST
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Former Maharashtra minister raised objections word executioner, wrote a letter to the President
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala

अपराधियों को फांसी देने वाले व्यक्ति को जल्लाद कहे जाने पर उसे अपमानजनक बताते हुए महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि जल्लाद शब्द के बदले किसी सम्मानजनक शब्द का प्रयोग किए जाने की जरूरत है। इसलिए जल्लाद शब्द को क्रिमिनल हैंगिंग ऑफिसर ( सीएचओ) जैसे सम्मानजनक शब्दों के रूप में परिवर्तित किए जाने की सख्त आवश्यकता है।

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मुंबई में कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे कृपाशंकर सिंह ने पत्र में लिखा है कि न्यायाधीश द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद जल्लाद द्वारा उनके निर्णय को अमली जामा पहनाया जाता हैं। देखा जाए तो जल्लाद ही दुर्दांत अपराधियों को मौत के घाट उतारने का काम करते हैं। ऐसे में उस व्यक्ति को जल्लाद की संज्ञा देना कम से कम आजादी के बाद तो बिल्कुल ठीक नहीं है। 
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समाज में प्रचलित जल्लाद शब्द पर यदि हम गौर करें तो जल्लाद, उसी व्यक्ति को कहा जाता है जो अमानवीय, निर्दयी तथा अत्यंत क्रूर होता है। किसी को जल्लाद कहना उसका खुला अपमान समझा जाता है। वह व्यक्ति जो न्यायाधीश के निर्णय को क्रियान्वित करता है, समाज के खतरनाक व्यक्तियों को फांसी द्वारा मौत के घाट उतारता हैं, उसे जल्लाद कहना अनुचित है। 
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सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल विकलांग व्यक्तियों के लिए दिव्यांग शब्द का प्रयोग किया जो पूरी तरह से स्वीकार कर लिया गया है। इसी तरह जल्लाद शब्द को सम्मानजनक शब्द के रूप में बदला जाना चाहिए।


देश में हैं सिर्फ छह जल्लाद

कृपाशंकर सिंह ने कहा कि भारत में सिर्फ 6 जल्लाद है। अपराधों का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ रहा है, आने वाले दिनों में फांसी देने वालों की संख्या में इजाफा होना तय है। ऐसे में फांसी देने वाले व्यक्तियों की संख्या भी बढ़नी चाहिए।

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