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Indian Army: 'युद्ध क्षेत्र की चुनौतियों को समझने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण की जरूरत', पूर्व सेना प्रमुख बोले

Tue, 13 Aug 2024 06:29 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 13 Aug 2024 06:29 PM IST
सार

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने चंडीमंदिर सैन्य स्टेशन में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए युद्ध क्षेत्र की चुनौतियों को समझने और उन्हें कुशलता से पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण का उपयोग करने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण पर जोर दिया।

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Former Army Chief Pande stresses on collective approach to understand battlefield challenges
पूर्व आर्मी चीफ मनोज पांडे (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने आज चंडीमंदिर सैन्य स्टेशन में युद्ध क्षेत्र में सफलताएं: जीत के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग विषय पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि युद्ध क्षेत्र की चुनौतियों को समझने और उन्हें कुशलता से पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण का उपयोग करने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण की जरूरत है। जानकारी के मुताबिक ये कार्यक्रम पश्चिमी कमान ने सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (सीएलएडब्ल्यूएस), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया था।
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सेना को और अधिक अनुकूलनीय बनने का प्रयास करना चाहिए- कटियार
वहीं पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि सेना को और अधिक अनुकूलनीय बनने का प्रयास करना चाहिए और अधिकारियों से आग्रह किया कि वे प्रौद्योगिकी क्षेत्र में गहन अध्ययन करें और नई पीढ़ी की युद्ध चुनौतियों के अनुकूल होने के लिए नवाचार करें।
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सैनिकों को सशक्त बनाने के लिए सत्र का हो रहा आयोजन
इस सत्रों का आयोजन इस बात की समझ बनाने के लिए किया गया था कि कैसे उभरती प्रौद्योगिकियों को आत्मसात किया जा सकता है और एकीकृत किया जा सकता है ताकि सैनिकों को सशक्त बनाया जा सके, उनके प्रदर्शन को बढ़ाया जा सके और सेना की परिचालन क्षमता को समग्र रूप से बढ़ाया जा सके। पहले दो सत्रों में चल रहे वैश्विक संघर्षों को आकार देने वाले प्रौद्योगिकी कारकों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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कई तकनीकी मुद्दों पर वक्ताओं ने दी जानकारी
रक्षा बलों को प्रभावित करने वाले कई तकनीकी मुद्दों पर प्रमुख वक्ताओं की तरफ से जानकारी दी गई, जिनमें से प्रमुख संघर्षों के बड़े हिस्से का ग्रे जोन में जाना और विकल्प के रूप में उपलब्ध अनुकूली रणनीतियां थीं। बता दें कि कुछ सत्र कई संगठनों, इकाइयों, मानव संसाधन प्रबंधन, प्रशिक्षण, रणनीति और विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के त्वरित अवशोषण की सुविधा के लिए पेश किए जाने वाले परिवर्तनों को समझने के लिए समर्पित थे।


इस दौरान 'संपूर्ण राष्ट्र' दृष्टिकोण और स्वदेशी विनिर्माण और अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से आत्मनिर्भरता के महत्व पर प्रकाश डाला गया, ताकि सेना के लिए सैन्य रसद समेत वर्तमान और भविष्य की युद्धक्षेत्र आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकियों को अपनाया जा सके।

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