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IAF: नाल एयर बेस पर तैनात होगा LCA मार्क1A लड़ाकू विमानों का पहला स्क्वाड्रन, स्वदेशी रडार से हो रहे लैस

Sun, 10 Dec 2023 08:16 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 10 Dec 2023 08:16 PM IST
सार

IAF: रक्षा सूत्रों ने बताया कि एलसीए मार्क1ए लड़ाकू विमानों के पहले स्क्वाड्रन को राजस्थान के नाल एयर बेस पर तैनात करने की योजना है और इसे वर्तमान में वहां तैनात दो मिग-21 बाइसन स्क्वाड्रन में से एक में शामिल किया जाएगा। 

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First LCA Mark1A fighter aircraft squadron to be deployed at Nal air base
LCA Mark 1A - फोटो : ANI

विस्तार

भारत में बने हल्के लड़ाकू विमान एलसीए मार्क-1 ए के पहले बेड़े (स्क्वाड्रन) को पाकिस्तान सीमा पर तैनात करने की तैयारी है। मार्क-1ए मौजूदा तेजस एमके-1 का आधुनिक संस्करण है और इसे राजस्थान के बीकानेर में नाल एयरबेस पर तैनात किया जाएगा। इसे सबसे एडवांस श्रेणी की रडार और संचार व इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली (एवियॉनिक्स) से लैस किया गया है।

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रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, मार्क-1ए यहां तैनात मिग-21 बाइसन स्क्वाड्रन के साथ संयोजित होगी। वायु सेना को हिंदुस्तान एयरोनॉक्टिस लि (एचएएल) से पहला एलसीए मार्क-1ए फरवरी या मार्च में मिल सकता है। स्वदेशी लड़ाकू विमानों के निर्माण की बड़े स्तर पर तैयारी है। 83 विमान निर्माण चरण में हैं।

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 उन्होंने बताया कि  97 और विमानों की खरीद का रास्ता भी साफ हो गया है। 8 से 10 साल में 220 एलसीए मार्क-1 और एलसीए मार्क-1ए सेना में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार साल 2025 से एचएएल में सालाना 24 विमान का निर्माण होने लगेगा।

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मिग की लेंगे जगह
एलसीए मार्क 1ए वायुसेना में मिग-21, मिग-23 और मिग-27 की जगह लाए जा रहे हैं। मिग-23 व मिग-27 पहले ही सेवा से बाहर हैं। मिग-21 की दो स्क्वाड्रन सेवा में हैं। इन्हें भी समाप्त किया जाएगा।

ऐसी है तैयारी...मिराज व जगुआर की जगह भी भारतीय विमान
अगले 10 साल में भारत में ही बने लड़ाकू विमान वायुसेना में मिराज 2000 और जगुआर की जगह ले सकते हैं। सूत्रों के अनुसार एलसीए मार्क-1 और मार्क-1ए की 10 स्क्वाड्रन बनाने की योजना है। नई पीढ़ी के तेजस यानी एलसीए मार्क-2 और एडवांस मीडियम विमानों की 12-13 स्क्वाड्रन भी बनाई जाएंगी। वहीं, रूस में बने एसयू-30 एमकेआई की 13 स्क्वाड्रन होंगी।

नजरिया स्पष्ट...अब स्वदेशी लड़ाकू विमान ही

  •  वायुसेना को अब भारत में बने लड़ाकू विमान ही चाहिए। उसे 120 मल्टीरोल लड़ाकू विमान की जरूरत होगी, जो भारत में ही बनेंगे। इनकी क्षमता रफाल की दो स्क्वाड्रन जैसी होगी।
  •  तेजस में पीएम नरेंद्र मोदी की उड़ान से भी भारतीय लड़ाकू विमानों की परियोजना को प्रोत्साहन मिला।  
  •  वायुसेना रूसी एसयू-30 एमकेआई के भारतीयकरण पर काम कर रही है। इनमें अत्याधुनिक व स्वदेशी एवियॉनिक्स हथियार प्रणाली संयोजित की जा रही है। 156 हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी खरीदे जाएंगे। इनमेें से 90 थल सेना, 66 वायुसेना को मिलेंगे।
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