बजट सत्र: 'अभी तक कोई ऐसा नहीं जन्मा, जो देश बेच सके'; राहुल गांधी के बयान पर वित्त मंत्री की दो टूक
पिछले कई दिनों से हंगामे के चलते बाधित रही संसद बुधवार को सुचारू तौर पर चली। इस दौरान राहुल गांधी ने बजट पर चर्चा के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोला। राहुल के बयान पर वित्त मंत्री ने जवाब दिया है।
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लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पर हुई आम चर्चा पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा में राहुल गांधी के ‘देश बेचने’ वाले बयान पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी ऐसे शख्स का जन्म नहीं हुआ, जो देश को बेच सके। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस समेत विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
निशाने पर आई टीएमसी
महिला सुरक्षा के विषय पर उन्होंने कहा कि एक राज्य की महिला मुख्यमंत्री कहती हैं कि महिलाओं को रात में घर से नहीं निकलना चाहिए। ये अपने राज्य की कानून व्यवस्था ठीक नहीं कर रहे और महिलाओं को दोष दे रहे हैं। कोलकाता में हुए रेप पर एक सांसद ने कहा कि अगर गुनहगार दोस्त ही निकले, तो हम क्या कर सकते हैं? महिला सुरक्षा के विषय में अभिषेक बनर्जी कह रहे हैं कि हमने कानून बनाया है, गवर्नर को भेजा और वहां से राष्ट्रपति के पास पेंडिंग में है, हम क्या करें? उन्होंने कहा कि बंगाल में बम चलता है, कानून नहीं।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि बजट पर कम्युनिस्ट लोगों ने बयान दिया है कि हमें कुछ नहीं मिलता। कम्युनिस्ट के राज में कानून व्यवस्था इतनी नीचे चली जाती है कि कोई निवेश वहां नहीं पहुंचता। केरल में एक इंडस्ट्री ग्रुप ने करोड़ों का अपना निवेश हटाया और दूसरी जगह चले गए। इंडस्ट्री को आकर्षित करने के लिए राज्य मेहनत करते हैं, मगर हम देखते हैं कि कम्युनिस्ट लोग सरकार में रहते हुए ऐसा कुछ नहीं करते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि अनुसूचित जातियों के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध केरल में होते हैं। प्रति एक लाख की आबादी पर 661 अपराध केरल में हो रहे हैं। अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ भी सबसे ज्यादा अपराध दर केरल में है। इसमें लगातार बढ़ोतरी भी हो रही है। ये एनसीआरबी के आंकड़े हैं।
राहुल पर बोला सीधा हमला
राहुल गांधी के बयान पर जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी तरह-तरह की बातें करते हैं। उन्होंने चेयर पर बैठे जगदम्बिका पाल को अपनी पार्टी का नेता बताया और बिट्टू को देशद्रोही कहा था। ऐसा कहने वाले हमारे विपक्ष के नेता हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने डेटा पर चिंता व्यक्त की कि देश का डेटा विदेश जा रहा है। यह सही नहीं है। हम डेटा सेंटर के लिए प्रावधान कर रहे हैं। हम डेटा भारत में रखने के लिए प्रावधान कर रहे हैं, जिससे हमारे नौजवानों को नौकरी मिल सके। फूड, फर्टिलाइजर, फ्यूल सिक्योरिटी पर बयान दे रहे हैं, इस पर जवाब ध्यान से सुनना चाहिए।
वित्त मंत्री ने कहा कि कुल खाद्य सब्सिडी के लिए 2.27 लाख करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान है और 80 करोड़ लोगों को अभी भी मुफ्त राशन दे रहे हैं। मिनिस्ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग द्वारा इंडस्ट्री सेटअप के लिए 4,064 करोड़ रुपए का प्रावधान बजट में किया गया है।
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निर्मला सीतारमण ने सवाल उठाया कि देश को बेचने वाले लोग कौन हैं? 2013 में वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन में कांग्रेस ने एक समझौता किया। ट्रेड फैसिलिटेशन और अनाज रखने वाले सार्वजनिक भंडार को लेकर समझौता हुआ था। इसका मतलब था कि जनवरी 2017 से भारत में किसानों से कोई खरीद नहीं होगी, और हम राशन की दुकानों से लोगों को कुछ नहीं दे सकते थे। बाली में यह समझौता करने वाले कांग्रेस के लोग हैं।
उन्होंने कहा कि एमएसपी देकर कुछ नहीं खरीद सकते थे, अगर 2014 में प्रधानमंत्री ने डब्ल्यूटीओ के इस समझौते को न हटाया होता। देश, गरीब और किसानों को बेचने वाले कांग्रेस के लोग हैं। डब्ल्यूटीओ में उन्होंने देश को बेचा था। ये पीएम मोदी पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का राज कायम रहता तो हमारे देश के किसान सड़क पर आ जाते। ये भारत के किसानों को बेचने वाले लोग हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता हमें नेगोशिएशन का ज्ञान दे रहे हैं। इन्होंने किसानों और गरीबों को बेच दिया था। साल 2009 में शर्म अल शेख में जाकर पाकिस्तान के आतंकवाद को दरकिनार कर समझौता किया था। ऐसा करने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कांग्रेस के ही थे। पाकिस्तान का आतंकवाद से कोई रिश्ता नहीं है, यह कहने वाले कांग्रेस के लोग आज आकर हमें डील को लेकर सलाह दे रहे हैं। ये लोग देश को बेचने वाले हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि किरेन रिजिजू ने सही कहा है कि भारत को बेचने वाला माई का लाल अभी तक जन्मा नहीं है। पीएम मोदी ऐसा कभी नहीं करने वाले हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बताया कि करों के हस्तांतरण के तहत सरकार वित्त वर्ष 2027 के दौरान राज्यों को 25.44 लाख करोड़ रुपए उपलब्ध कराएगी। उन्होंने बताया कि बजट में 2026-27 के लिए कुल 53.47 लाख करोड़ रुपए के व्यय का अनुमान है। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा एकत्र किए गए उपकर और अधिभार विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए राज्यों को दिए जाते हैं। यह राज्यों को आवंटित 41 प्रतिशत धनराशि से अलग है।
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