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कांग्रेस के 'एमके' समीकरण में फंसी भाजपा, सोमनाथ का आशीर्वाद मिलना मुश्किल

Thu, 07 Dec 2017 01:04 PM IST
संजय मिश्र, अमर उजाला, सोमनाथ
संजय मिश्र, अमर उजाला, सोमनाथ Updated Thu, 07 Dec 2017 01:04 PM IST
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fights get tough for bjp against congress in somnath due to mk factor
गुजरात चुनाव के मद्देनजर शुरू हुई मंदिर राजनीति के बीच सोमनाथ चर्चा के केंद्र में हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के धर्म पर सवाल उठने से लेकर राम मंदिर को लेकर शुरू चर्चाओं तक में सोमनाथ मंदिर का जिक्र हो रहा है।
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इस बीच अपने-अपने दल की जीत सुनिश्चित करने के लिए भी राजनीतिक दलों के नेताओं और उम्मीदवारों ने बाबा सोमनाथ से आशीर्वाद मिलने  की उम्मीद पाल रखी है। पीएम मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी से लेकर कांग्रेस-भाजपा का हर छोटे से बड़ा नेता सोमनाथ आकर बाबा सोमनाथ के दर्शन कर अपने दल की जीत की गुहार लगा चुका है।
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अब राज्य की सत्ता के लिए बाबा का आशीर्वाद किसको मिलेगा यह तो 18 दिसंबर को मतगणना के बाद ही पता चलेगा। मगर यहां सोमनाथ विधानसभा सीट पर बाबा का आशीर्वाद भाजपा उम्मीदवार से रूठता दिख रहा है।
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भाजपा ने यहां जस्सा भाई बारड़ को दोबारा से मैदान में उतारा है। वैसे तो उन पर बाबा सोमनाथ की कृपा हमेशा बरसती रही है, लेकिन इस दफे बाबा का आशीर्वाद उनसे रूठ सकता है। कांग्रेस के एमके समीकरण में जस्सा फंसते दिख रहे हैं। 

धर्म के भेद पर जाति भारी 
सोमनाथ विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने कोहली बिरादरी के विमल भाई चूड़ासमा को मैदान में उतारा है। 35 साल की उम्र के चूड़ासमा के नाम की चर्चा पूरे क्षेत्र में है। एक तो उन्होंने छोटी सी उम्र में ही अपनी छवि साफ सुथरी और काम करने वाले नेता के रूप में बना ली है। दूसरा कोली समाज से होने की वजह से पूरा कोली समाज उनके नाम की माला जप रहा है।

चारवाड नगर पंचायत अध्यक्ष के रूप में विमल भाई ने सफल कामकाज किए हैं, जिसकी बदौलत बेहद कम उम्र में उनकी छवि एक सकारात्मक नेता की बनी है। जबकि भाजपा उम्मीदवार जस्सा की छवि पर सवाल उठ रहे हैं और विकास कार्य न करने की वजह से उनके खिलाफ जनता की नाराजगी भी नजर आ रही है।

बावजूद उसके यहां का चुनाव धार्मिक भेदभाव से ऊपर जाति पर जाता दिख रहा है। जाति की एकजुटता ने यहां धर्म के भेद को भी पीछे छोड़ दिया है। कभी एक दूसरे के धुर विरोधी दिखने वाले कोली (हिंदू) और मुस्लिम समुदाय के लोग कांग्रेस उम्मीदवार विमल भाई चूड़ासमा के नाम पर एक साथ नजर आ रहे हैं। यही नहीं दोनों ही वर्ग के लोग एक साथ मिलकर रहने की कसमें भी खा रहे हैं। यही वजह है, जिसने यहां भाजपा को परेशानी में डाल दिया है। 

कोली समाज के साथ आए मुस्लिम

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वीरावल के कोलीवाड़ा में रहने वाले मगन भाई वाजा का कहना है कि यहां के मुसलमानों का कोली समाज के साथ मिलना जुलना ज्यादा है, इसलिए बाद में भी दिक्कत नहीं आएगी। तो तलाला-वीरावल रोड पर सोमनाथ टाकीज के पास बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान चलाने वाले अशफाक शाह का कहना है कि वर्ष 2002 के बाद यहां कोई दंगा नहीं हुआ।

यहां हिंदू-मुसलमान दोनों के बीच भाईचारा और प्रेमभाव पूरा है। उनका कहना है कि मुस्लिम समुदाय कांग्रेस उम्मीदवार के साथ एकजुट हैं। भाजपा को साथ न देने के सवाल पर अशफाक सड़क की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि यहां विकास हुआ नहीं है, इसलिए वोट विमल भाई को देंगे।

उनका कहना है कि विमल भाई सोमनाथ क्षेत्र का विकास करेंगे। दंगों और हिंदू-मुस्लिम के बीच होने वाले अक्सर के तनावों पर अनवर बागजी का कहना है कि यहां हिंदू-मुस्लिम के बीच तनाव नहीं रहता। व्यावसायिक हितों को लेकर खाड़वा समाज के साथ कभी-कभी छोटी घटनाएं होती रहती हैं।

अनवर का कहना है कि खाड़वा और मुस्लिम समुदाय दोनों के ही अधिकांश लोग मछली पकड़ने के पेशे में है, इसलिए दोनों के व्यवसायिक हित आपस में कभी-कभी टकराते रहते हैं। इसकी वजह से दोनों के बीच छोटी-मोटी घटनाएं होती रहती हैं।

कोली या हिंदू समुदाय के साथ मुस्लिमों का कोई टकराव नहीं है बल्कि दोनों ही साथ हैं। किसी दल विशेष के पक्ष में मस्जिद या इमाम की तरफ से फतवा जारी करने के सवाल पर अनवर कहते हैं कि यहां दिल्ली या अन्य जगह के इमामों की तरह कोई फतवा जारी नहीं होता है। लोग स्वतंत्र रूप से वोट करते हैं। 

क्या है एमके समीकरण

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बीजेपी-कांग्रेस - फोटो : File Photo
सोमनाथ में कांग्रेस ने मुस्लिम के साथ कोहली समुदाय का सियासी गणित बैठाते हुए 35 वर्षीय विमल भाई को मैदान में उतार दिया है। वैसे तो विमल भाई बगल के जिले जूनागढ़ से आते हैं, लेकिन उनके काम की चर्चा यहां जनता के बीच जोरों पर है।

परिसीमन में उनकी चारवाड़ नगर पंचायत जूनागढ़ के मंगरोल विधानसभा में जुड़ गई है। मगर वे कोली समाज की मांग की वजह से सोमनाथ से उम्मीदवार बने हैं। इसका असर कोली समाज में दिख भी रहा है। सोमनाथ-वीरावल मार्ग पर होटल चलाने वाले माला भाई वाडेर का कहना है कि कोली समाज की मांग पर विमल चूडासमा को यहां कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है।

वैसे यह बात वीरावल के कोलीवाड़ा में नजर भी आ रही है। कोली समाज के अधिकांश लोगों ने समाज के नाम पर विमल के पीछे अपनी ताकत झोंक दी है। कोलीवाड़ा के हनुमान मंदिर पर बैठे भगवान भाई का कहना है कि पूरी बिरादरी विमल भाई के साथ है। भाई-भाई की बात है, हम किधर जाएंगे। यहां जमीन पर बिहार के लालू यादव के एमवाई समीकरण की तरह एमके समीकरण काम करता दिख रहा है। ऊपर से अहीर बिरादरी के लोग भी कांग्रेस के साथ जुड़ गए हैं। इसकी वहज से भाजपा की उलझनें बढ़ी हुई हैं।

यहां जीत के लिए भाजपा की उम्मीदें कोली समाज पर टिकी हुई थीं। भाजपा समर्थक जयेश भाई का कहना है कि कोली समाज और मुस्लिमों के बीच हमेसा छत्तीस का आंकड़ा रहा है। दोनों एक साथ वोट नहीं करेंगे, इससे भाजपा को लाभ होगा।

मगर जमीन पर ऐसा होता नहीं दिख रहा है। कांग्रेस का एमके समीकरण भाजपा पर भारी पड़ता दिख रहा है। बात करने पर कोली और मुस्लिम दोनों ही समुदाय के लोग कांग्रेस उम्मीदवार विमल भाई का साथ देने की बात कर रहे हैं।

इलाके के प्रभाश-पाटन में खाली कांग्रेस उम्मीदवार को ही प्रचार और बैनर लगाने की अनुमति है। इलाके के लोगों ने बाकी उम्मीदवारों को बैनर लगाने तक पर रोक लगा दिया है। हीरा भाई जाड़ेजा का कहना है कि कोली-मुस्लिम की एकजुटता यहां कांग्रेस उम्मीदवार को मजबूत बना रही हैं। 

ये है सोमनाथ का जातीय गणित
2.75 लाख मतदाताओं वाली सोमनाथ सीट पर सबसे ज्यादा वोटर मुस्लिम समुदाय के हैं। उनकी संख्या करीब 45 हजार बताई जा रही है। तो दूसरे नंबर पर यहां कोली मतदाता हैं जो कि 35 हजार के करीब हैं। इसके अलावा इस सीट पर खाड़वा, भोय, लुवांणा और अहीर बिरादरी के लोग प्रमुखता में हैं। कांग्रेस के पक्ष में यहां कोली समुदाय मजबूती से खड़ा नजर आ रहा है, जबकि पहले यह मुख्य रूप से भाजपा का समर्थक था। अपनी बिरादरी के उम्मीदवार होने की वजह से कोली समुदाय के लोग उत्साह के साथ कांग्रेस के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

इसकी वजह से भाजपा की मुश्किलें यहां बढ़ी हुई दिख रही हैं। हालांकि वीरावल में पान की दुकान चलाने वाले कल्पेश गोलरिया का कहना है कि मुकाबला बराबरी का है। कोली के अलावा अन्य समाज के लोग भाजपा उम्मीदवार के साथ जा सकते हैं। उनका कहना है कि शहर में भाजपा भारी है तो गांव में कांग्रेस का जोर है।

भाजपा उम्मीदवार जस्सा भाई बारड़ खाड़वा बिरादरी से हैं। उनके समाज के लोगों की संख्या इस क्षेत्र में करीब 20 हजार बताई जा रही है। उनके बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वे अब तक चार बार दल बदल चुके हैं। हजूरीया-खजूरीया के दौर में वे शंकर सिंह बाघेला के साथ रह चुके हैं। चार दलों की सवारी कर चुके जस्सा ने वर्ष 2012 विधानसभा का चुनाव कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीता था, मगर बीच में वे भाजपा में चले गए।

इसकी वजह से इस विधानसभा सीट की जनता को उपचुनाव का सामना करना पड़ा। हालांकि तब भी जस्सा को बाबा सोमनाथ का आशीर्वाद मिला। वे चुनाव जीत गए और अब वे दोबारा से भाजपा उम्मीदवार के रूप में सोमनाथ सीट से चुनाव के मैदान में हैं। वैसे जस्सा के पक्ष में एक बात मजबूत है कि वे इस सीट से लंबे समय तक विधायक रहे हैं, मगर मुश्किल यह है कि कांग्रेस ने उन्हें एमके समीकरण में उलझा दिया है। 
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