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Farmers Protest: एसकेएम 13 अगस्त को पूरे देश में निकालेगा ट्रैक्टर मार्च, 106 दिन तक चलेगा ये अभियान

Tue, 22 Jul 2025 08:11 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 22 Jul 2025 08:11 PM IST
सार

संयुक्त किसान मोर्चा पूरे देश में 13 अगस्त 2025 को 'कॉरपोरेट्स भारत छोड़ो' दिवस संगठित करेगा। उस दिन ट्रैक्टर/मोटर वाहन मार्च आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 15 अगस्त से 25 नवंबर तक कृषि व किसान खेत मजदूरों के ज्वलंत मुद्दों पर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जाएगा।

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Farmers Protest: SKM will take out tractor march across country on August 13
संयुक्त किसान मोर्चा - फोटो : ANI

विस्तार

संयुक्त किसान मोर्चा पूरे देश में 13 अगस्त 2025 को 'कॉरपोरेट्स भारत छोड़ो' दिवस संगठित करेगा। उस दिन ट्रैक्टर/मोटर वाहन मार्च आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 15 अगस्त से 25 नवंबर तक कृषि व किसान खेत मजदूरों के ज्वलंत मुद्दों पर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जाएगा। 26 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में जोरदार प्रतिवाद संगठित होगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने इन निर्णयों की घोषणा एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में की है। इसे किसान नेता कॉमरेड सत्यवान, कॉमरेड हन्नान मौला, कॉमरेड विजू कृष्णन, कॉमरेड प्रेम सिंह गहलावत, कॉमरेड रविंदर पटियाला, कॉमरेड कृष्णा प्रसाद आदि ने सम्बोधित किया। 

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ये सभी निर्णय 20 जुलाई 2025 को दिल्ली में सम्पन्न हुई एसकेएम की राष्ट्रीय मीटिंग में लिए गए थे। इसमें 13 राज्यों से 110 किसान प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी कर किसान खेत मजदूर हितों के लिए व्यापक रूप से चर्चा विमर्श किया। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यवान अध्यक्ष मण्डली में रहे जबकि महासचिव शंकर घोष, हरियाणा सचिव जयकरण मांडौठी, हंसराज राणा ने अपना वक्तव्य रखा। कामरेड सत्यवान व महासचिव शंकर घोष ने बताया, भाजपा सरकार, अमेरिकी साम्राज्यवाद से पींग बढ़ा रही है। अमेरिका समेत विदेशों से मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से भारी मात्रा में सस्ते दूध-डेयरी उत्पाद, अनाज, फल आदि आयात कर देश के कृषि क्षेत्र समेत किसान हितों की बलि चढ़ाने जा रही है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 
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मोदी सरकार ने खुद भी कृषि मार्केटिंग की राष्ट्रीय नीति का जो मसौदा जारी किया है, वह विगत में रद्द कराये गये तीन काले कृषि कानूनों से भी खतरनाक है। 13 अगस्त को इसके प्रतिवाद में किसान 'कॉरपोरेट भारत छोड़ो' का नारा लगाते हुए ट्रैक्टर/मोटर वाहन मार्च निकालेंगे। शंकर घोष ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा किसानों की लागत से डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की सरकारी खरीद की गारंटी का कानून बनाने, कर्ज मुक्ति, ग्रामीण गरीबों को पूरे साल रोजगार, पर्याप्त मात्रा में समय पर सस्ते व असली खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, कृषि औजार उपलब्ध कराने और किसान आत्महत्याओं से छुटकारा दिलाना, ये प्रमुख मांगें हैं। 
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इनके अलावा सस्ते में जबरन कृषि भूमि के अधिग्रहण, लैंड पूलिंग, शामलात भूमि को नाजायज सरकारी हस्तक्षेप से बचाने, स्मार्ट बिजली मीटर व बिजली निजीकरण पर तत्काल रोक लगाने, 300 यूनिट तक सस्ती बिजली देने और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 10 साल पुराने ट्रेक्टरों के चलने पर प्रतिबंध हटाने की मांग भी रहेगी। 

जंगलों के अंधाधुंध सफाये और बिहार में करोड़ों गरीबों के वोट काटने पर रोक लगाने, किसान खेत मजदूरों को 10 हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन देने, शहरों में गरीबों की बस्तियों व झुग्गी झोपड़ियों को उजाड़ना व बुलडोजर राज समाप्त करने, सबको निःशुल्क क्वालिटी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं व दवा उपलब्ध कराने के प्रमुख ज्वलंत मुद्दों पर 15 अगस्त से 25 नवम्बर तक जाति, धर्म, इलाका, भाषा, बोली जैसे तमाम भेदों से ऊपर उठकर अपनी एकता व भाईचारे को सशक्त बनाते हुए देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान पर्चे व अन्य प्रचार सामग्री बांट कर, गांव गांव में जनसभाएं, स्थानीय स्तर पर धरने प्रदर्शन, कन्वेंशन, सेमिनार, सम्मेलन, पद यात्राएं कर जनमत जागृत किया जाएगा।


26 नवम्बर के राष्ट्रव्यापी आन्दोलन का क्या ठोस स्वरूप होगा, इसकी संयुक्त किसान मोर्चा अपनी राष्ट्रीय समन्वय समिति की बैठक बुला कर जल्द ही घोषणा कर देगा। हरियाणा के जिला नूंह में रोजका मेव आईएमटी के 9 गांवों के उत्पीड़ित किसानों को न्याय दिलाने, उनका बकाया मुआवजा दिलाने और उन पर बनाए गए तमाम पुलिस केस रद्द कराने के मुद्दे पर संगठन प्रमुखता से विचार करेगा। संयुक्त किसान मोर्चा के उपरोक्त फैसलों को सफल बनाने के लिए ऑल इण्डिया किसान खेत मजदूर संगठन ने 24 जुलाई को राष्ट्रीय सचिव मंडल की अपनी ऑनलाइन बैठक बुलाई है। ऑल इण्डिया किसान खेत मजदूर संगठन गत 9 जुलाई को हुई हड़ताल से पनपी मजदूर-किसान एकता को विकसित कर इसे और भी जोरदार बनाने के लिए संकल्पबद्ध है।

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