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आईटीओ से आंखों देखा हाल: बिना तैयारी तैनात थी दिल्ली पुलिस, जब किसानों ने बैरिकेडिंग तोड़ी तब आई हरकत में

Tue, 26 Jan 2021 07:31 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 26 Jan 2021 07:31 PM IST
सार

किसान बोले, कई किसानों को दिल्ली के रास्तों का पता नहीं था। लेकिन आंदोलन में कुछ ऐसे किसान भी थे जो दिल्ली के रास्ते से परिचित थे। वे परेड का नेतृत्व करने लगे। जैसे-जैसे वे कहते गए हम लोग उनके निर्देशों का पालन करने लगे...

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Farmers protest: Delhi Police was deployed at ITO without preparation, when farmers broke the barricading, then came into action
आईटीओ पर प्रदर्शन करते किसान - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दो माह से शांतिपूर्ण चल रहा किसानों का विरोध-प्रदर्शन गणतंत्र दिवस पर रास्ता भटक गया। केंद्र सरकार को जिस बात का डर था वही हो गया। दिल्ली पुलिस पर एक बार फिर नाकामयाबी का ठप्पा लगा। तय कार्यक्रम के उलट किसानों की ट्रैक्टर परेड समय से पहले दिल्ली की सीमा पर लगी बैरिकेडिंग को धता बताते हुए दिल्ली में दाखिल हो गई।

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आईटीओ पर सुस्त नजर आ रही दिल्ली पुलिस से उनका आमना-सामना हुआ। बैरिकेडिंग तोड़ते किसानों और आंसू गैस चलाती पुलिस के बीच तनाव जैसे स्थिति बन गई। इसी बीच एक किसान की मौत भी हो गई। दूसरे किसानों ने बैरिकेडिंग तोड़ते हुए तलवारें और लाठियां लहराई। गाडियों और बसों के कांच फोड़े। किसानों को उग्र होता देख कर बिना तैयारी के खड़ी पुलिस को भी रास्ता देना पड़ा, और किसान लाल किला तक पहुंचने में कामयाब रहे। इस दौरान कई किसान घायल हो गए। एक की मौत की पुष्टि हो चुकी है। सरकारी संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
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दिल्ली पुलिस ने राजपथ का मुख्य समारोह खत्म होने के बाद दोपहर 12 बजे के बाद किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर ट्रैक्टर परेड की मंजूरी दी थी। लेकिन सुबह 10 बजे के बाद ही किसान दिल्ली की सीमाओं में घुसने लगे। गाजीपुर और नोएडा से आने वाले किसानों के जत्थों ने यमुना ब्रिज पर लगी पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ा। इसके बाद वे धीरे-धीरे आईटीओ की तरफ बढ़ने लगे।
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जब किसान आईटीओ पहुंच रहे थे, तब वहां तैनात पुलिसकर्मी केवल गणतंत्र दिवस की सुरक्षा में लगे थे। किसानों के अचानक पहुंचने से पहुंच कर्मी चौंक गए और उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। फिर भी किसान नहीं रुके तो पुलिस किसानों पर बल प्रयोग शुरू कर दिया।

इससे नाराज किसानों ने जवाबी पथराव किया। एक किसान की मौत होने से भड़के किसानों को देखकर पुलिस ने भी उन्हें रास्ता दे दिया। लाल किला तक पहुंचे किसान दूसरी ओर से राजीव चौक और संसद की तरफ भी जाने की कोशिश में थे। इसके लिए किसानों ने रास्ते में खड़ी दो बसों में तोड़फोड भी की। लेकिन वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने इन किसानों को काबू कर लिया।

आंदोलन में घायल हुए किसान मनजीत सिंह ने अमर उजाला को बताया कि हम लोग दिल्ली की सीमा पर लगाई गई पुलिस की बैरिकेडिंग को पार करते हुए आगे बढ़ रहे थे। पुलिस ने हमें रोकने की कोशिश की, लेकिन जब हम नहीं रुके तो पुलिस ने किसानों पर हमला करना शुरू कर दिया। इसका जवाब हमने भी दिया। इस बीच पुलिसकर्मियों ने कुछ किसानों को घेर लिया और उन पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया।

परेड में तलवार और लाठियां लाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कई किसानों को दिल्ली के रास्तों का पता नहीं था। लेकिन आंदोलन में कुछ ऐसे किसान भी थे जो दिल्ली के रास्ते से परिचित थे। वे परेड का नेतृत्व करने लगे। जैसे-जैसे वे कहते गए हम लोग उनके निर्देशों का पालन करने लगे। जब हम दिल्ली की सीमाओं के अंदर आए और पुलिस के साथ मारपीट हुई तब कुछ किसानों को पता चला कि हम लाल किला तक पहुंचने वाले हैं।

नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिसकर्मी ने बताया कि हम लोग गणतंत्र दिवस की सुरक्षा में आईटीओ पर तैनात थे। तभी अचानक से किसानों का जत्था आईटीओ की पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ते हुए लाल किला की तरफ बढ़ने लगा। आईटीओ पर मौजूद पुलिसकर्मियों के पास सुरक्षा इंतजाम भी नहीं थे। मौके पर पुलिसवालों ने जैसे ही किसानों को रोकने की कोशिश की वैसे ही वे उपद्रव करने लगे।







किसानों की कोशिश थी कि वे दीनदयाल उपाध्याय मार्ग से राजीव चौक पर प्रवेश कर जाएं और मंडी हाउस के रास्ते संसद तक पहुंच सकें। मंडी हाउस जाने वाले रास्ते पर खड़ी बस को भी उन्होंने निशाना बनाया। इस दौरान उन्हें रोकने लिए हमें लाठियों और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। लेकिन किसानों के मुकाबले हमारा पुलिस बल पूरी तरह तैयार नहीं था और इसी बीच कुछ किसानों के जत्थे लाल किला तक पहुंचने में कामयाब रहे। इसके बाद पूरी ट्रैक्टर परेड लाल किला तक जाने लगी। 

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