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यूपी, पंजाब और उत्तराखंड में फिर हुंकार भरेंगे किसान संगठन, चुनावों में पर्चा बांटकर लोगों से मांगेंगे मदद
Thu, 03 Feb 2022 08:35 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 03 Feb 2022 08:35 PM IST
सार
डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि इस आंदोलन के तहत छोटी-छोटी बैठकें आयोजित की जाएगी और सरकार की गलत नीतियों के बारे में लोगों को बताया जाएगा। केंद्र सरकार ने जो वादे पूरे नहीं किए उसके बारे में जनता के बीच प्रचार किया जाएगा। इसके अलावा लखीमपुर खीरी का मामला भी जोर-शोर से उठाया जाएगा...
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राकेश टिकैत
- फोटो : Amar Ujala (File Photo)
विस्तार
देश के किसान संगठनों ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है। फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य समेत कई अन्य मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने अपना आंदोलन करने का फैसला किया है। दिल्ली में आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति की अहम बैठक के बाद प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान किसान नेता डा. दर्शन पाल ने मांगों को लेकर आंदोलन और तेज करने एलान किया।
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डॉ. पाल ने कहा कि इस आंदोलन के तहत छोटी-छोटी बैठकें आयोजित की जाएगी और सरकार की गलत नीतियों के बारे में लोगों को बताया जाएगा। केंद्र सरकार ने जो वादे पूरे नहीं किए उसके बारे में जनता के बीच प्रचार किया जाएगा। इसके अलावा लखीमपुर खीरी का मामला भी जोर-शोर से उठाया जाएगा। क्योंकि आरोपित केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं। जब तक सरकार उन्हें बर्खास्त नहीं करती तब तक हम उन्हें हटाने की मांग करते रहेंगे।
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संयुक्त किसान मोर्चा की पत्रकार वार्ता के दौरान किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि पांच बिंदुओं पर सहमति बनी थी और उसी आधार पर हमने आंदोलन को स्थगित किया था। एमएसपी पर कानून को लेकर समिति बनाने, किसानों पर मुकदमे को वापस लेने, पराली पर जुर्माने के प्रावधान पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। केंद्र सरकार ने हमारे साथ वादाखिलाफी की है इसलिए 31 जनवरी को विश्वासघात दिवस मनाया गया था। अब किसान विरोधी सरकार के खिलाफ चुनाव में निर्णय लिया गया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश क्षेत्र की मीटिंग की थी, जिसमें 41 संगठन के लोग मौजूद थे। इस बैठक में तय हुआ कि पर्चे छापकर गांव-गांव बांटा जाएगा। ऐसे में भाजपा के खिलाफ पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में किसान आंदोलन और तेज करेंगे।
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बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने कहा, आम आदमी और किसान को बजट से बहुत उम्मीद थी, लेकिन नुकसान हुआ है। उत्तर प्रदेश में हमारा सभी से ये सवाल रहेगा, जो भी वोट मांगने आएंगे उनसे पूछेंगे कि उन्होंने किसानों के लिए क्या किया? हम एक पर्चा वोटर्स को देंगे जिसमें कई सारे सवाल होंगे, सभी वोट मांगने वालों से उसमें हां या ना में जवाब लेंगे। उत्तराखंड में भी ये पर्चा लोगों को दिया जाएगा। इन जवाबों के आधार पर वोटर खुद तय करेगा कि किसको वोट देना है। वहीं योगेंद्र यादव ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा को इस चुनाव में किसान विरोधी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने पर मजबूर किया गया है।