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राजीव गांधी: मजबूरी से देश की मजबूती तक
Updated Sun, 20 Aug 2017 07:45 PM IST
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राजीव गांधी
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राजनीति में कभी नहीं आने की चाह रखने वाले, मजबूरी में देश के प्रधानमंत्री बनने वाले सबसे युवा नेता थे राजीव गांधी। 20 अगस्त 1944 को मुंबई में जन्में इस युवा नेता का आज 73वां जन्मदिन है। पेशे से पायलट राजीव बहुत ही सौम्य और शांत स्वभाव के थे। राजीव ने उज्जवल उन्नत भारत बनाने का सपना देखा ही नहीं बल्कि उसे पूरा करने के लिए आगे भी बढ़े। वो राजीव ही हैं जिन्होंने देश में टेलीफोन और कंप्यूटर क्रांति लाने की पहल की थी।
राजीव थे तो पेशे से पायलट लेकिन उनकी डेस्टिनी थी देश का प्रधानमंत्री बनना। भाई संजय की अचानक मृत्यु के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और मां इंदिरा की हत्या के बाद वे मजबूरी में ही प्रधानमंत्री बने थे। राजीव गांधी 40 की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के पहले प्रधानमंत्री थे।उन्होंने एक झटके में देश को 21वीं सदी का सबसे उज्जवल देश बनाने की ओर कदम बढ़ाया था।
वे जब सत्ता में आए तब पंजाब, असम और मिजोरम हिंसा में जल रहा था। ऑपरेशन ब्लू स्टार और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पंजाब और दिल्ली में सिख विरोधी दंगे हो रहे थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद राजीव ने राजनीति, पार्टी और देश में कई बदलाव किए। इसमें कोई शक नहीं कि राजीव गांधी ने दूरदर्शी नेता के रूप में देश को सूचना क्रांति की नई ईबारत लिख कर दी। चुनावी रैलियों में सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए लोगों से मिलना उनका शगल था। जब भी वो भाषण के दौरान "हमें देखना हैं" कहते थे तो उनकी बातें देश के लोगों को उम्मीद से भर देती थीं।
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राजीव थे तो पेशे से पायलट लेकिन उनकी डेस्टिनी थी देश का प्रधानमंत्री बनना। भाई संजय की अचानक मृत्यु के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और मां इंदिरा की हत्या के बाद वे मजबूरी में ही प्रधानमंत्री बने थे। राजीव गांधी 40 की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के पहले प्रधानमंत्री थे।उन्होंने एक झटके में देश को 21वीं सदी का सबसे उज्जवल देश बनाने की ओर कदम बढ़ाया था।
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वे जब सत्ता में आए तब पंजाब, असम और मिजोरम हिंसा में जल रहा था। ऑपरेशन ब्लू स्टार और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पंजाब और दिल्ली में सिख विरोधी दंगे हो रहे थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद राजीव ने राजनीति, पार्टी और देश में कई बदलाव किए। इसमें कोई शक नहीं कि राजीव गांधी ने दूरदर्शी नेता के रूप में देश को सूचना क्रांति की नई ईबारत लिख कर दी। चुनावी रैलियों में सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए लोगों से मिलना उनका शगल था। जब भी वो भाषण के दौरान "हमें देखना हैं" कहते थे तो उनकी बातें देश के लोगों को उम्मीद से भर देती थीं।
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राजीव गांधी
उन्होंने देश में ही क्रांति के लिए बदलाव नहीं किए बल्कि कांग्रेस को भी युवा पार्टी के जोश से भर दिया। यही वजह रही कि कुछ ही दिनों में कई युवा नेता पार्टी के नए चेहरे बन कर उभरे..जिनमें माधव राव सींधिया, राजेश पायलट, ऑस्कर फर्नाडिस, गुलाम नबी आजाद, शैलजा और अंबिका सोनी जैसे कई युवा चेहरे शामिल हैं।
राजीव का विज्ञान और तकनीक पर खासा जोर था। वे टेलीकॉम और सूचना क्रांति के सूत्रधार बने। हर घर तक टेलीफोन पहुंचाने का श्रेय राजीव गांधी को ही जाता है। 1991 तक देश रंगीन टेलीविजन, कंप्यूटर और इंपोर्टेड ऑटोमोबाइल से लैस था। भारतीय अर्थव्यवस्था को उछाल भी राजीव के कार्यकाल में ही मिला था। भारतीय अर्थव्यवस्था को उदार बनाने का पहला कदम भी राजीव गांधी के कार्यकाल में ही शुरू किया गया था।
सूचना क्रांति के साथ राजीव गांधी ने 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का भी एलान किया था। जवाहर नवोदय विद्यालय जिसमें आज लाखों बच्चे पढ़ रहे हैं वो राजीव गांधी की सोच का ही नतीजा थी।
राजीव का राजनीतिक सफर बहुत आसान नहीं रहा। शुरू शुरू में तो उन्हें मिस्टर क्लीन माना गया लेकिन बाद में बोफोर्स घोटाले का आरोप लगा, जो आज तक बरकरार है। इस आरोप में उनके साथ सुपरस्टार और उनके बचपन के साथी अमिताभ बच्चन का नाम भी शामिल था।
वैसे राजीव के कार्यकाल की कई बार आलोचना भी हुई जिसमें श्रीलंका में तमिल मुद्दों को ठीक ढंग से हल नहीं करने का आरोप भी लगा और उसी आरोप ने 21 मई 1991 को चुनाव प्रचार के दौरान तमिलनाडु के श्री पेरेम्बदूर में एक आत्मघाती हमले के दौरान उनकी जान ले ली।
राजीव का विज्ञान और तकनीक पर खासा जोर था। वे टेलीकॉम और सूचना क्रांति के सूत्रधार बने। हर घर तक टेलीफोन पहुंचाने का श्रेय राजीव गांधी को ही जाता है। 1991 तक देश रंगीन टेलीविजन, कंप्यूटर और इंपोर्टेड ऑटोमोबाइल से लैस था। भारतीय अर्थव्यवस्था को उछाल भी राजीव के कार्यकाल में ही मिला था। भारतीय अर्थव्यवस्था को उदार बनाने का पहला कदम भी राजीव गांधी के कार्यकाल में ही शुरू किया गया था।
सूचना क्रांति के साथ राजीव गांधी ने 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का भी एलान किया था। जवाहर नवोदय विद्यालय जिसमें आज लाखों बच्चे पढ़ रहे हैं वो राजीव गांधी की सोच का ही नतीजा थी।
राजीव का राजनीतिक सफर बहुत आसान नहीं रहा। शुरू शुरू में तो उन्हें मिस्टर क्लीन माना गया लेकिन बाद में बोफोर्स घोटाले का आरोप लगा, जो आज तक बरकरार है। इस आरोप में उनके साथ सुपरस्टार और उनके बचपन के साथी अमिताभ बच्चन का नाम भी शामिल था।
वैसे राजीव के कार्यकाल की कई बार आलोचना भी हुई जिसमें श्रीलंका में तमिल मुद्दों को ठीक ढंग से हल नहीं करने का आरोप भी लगा और उसी आरोप ने 21 मई 1991 को चुनाव प्रचार के दौरान तमिलनाडु के श्री पेरेम्बदूर में एक आत्मघाती हमले के दौरान उनकी जान ले ली।