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EXCLUSIVE: 125 किलो का ओवरवेट डीआईजी सीआरपीएफ जवानों के पेट में मारता है घूंसा

Mon, 24 Sep 2018 08:12 PM IST
Trainee Trainee जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Published by: Trainee Trainee Updated Mon, 24 Sep 2018 08:12 PM IST
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EXCLUSIVE: 125 kg overweight DIG punishes CRPF soldiers in the stomach
बीडी दास, डीआईजी, सीआरपीएफ

सीआरपीएफ के ग्रुप सेंटर सिलचर (गुवाहाटी) में कथित तौर पर 125 किलोग्राम वजन वाले ओवरवेट डीआईजी जवानों को न केवल सार्वजनिक रूप से अपमानित करते हैं, बल्कि उनके पेट पर खुद जोरदार घूंसा मारते हैं। डीआईजी द्वारा किए जा रहे इस तरह के तमाम उत्पीड़न की शिकायत जवानों ने सीआरपीएफ के महानिदेश (डीजी) राजीव राय भटनागर से की है। आरोप यह भी है कि अगर कोई कर्मचारी छुट्टी पर जाना चाहता है तो उसे बीस तरह की शर्तों वाला एक फार्म भरना पड़ता है। इसमें एक कॉलम अंगदान का भी है।

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सीआरपीएफ के डीजी राजीव भटनागर को भेजी गई करीब छह पन्ने की शिकायत में साफ लिखा है कि सिलचर ग्रुप सेंटर के डीआईजी बीडी दास की हरकतों से परेशान होकर कई जवान और अधिकारी आत्महत्या का प्रयास कर चुके हैं। इसके अलावा कुछ कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने को मजबूर हैं। सीआरपीएफ मुख्यालय ने इस मामले की बड़े स्तर पर सीक्रेट इन्वेस्टिगेशन शुरू कर दी है। डीआईजी और दूसरे अफसरों व कर्मियों के कमेंट्स लिए जा रहे हैं।
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क्या कहते हैं डीजी भटनागर

सीआरपीएफ एक बड़ा अर्ध सैनिक बल है। इसलिए हमारे पास शिकायतें आती हैं। हम उसका अपने नियम-कायदे के अनुसार जांच और निबटारा करते हैं। आप जिस अधिकारी के उत्पीड़न से जुड़ी शिकायत किए जाने की बात कर रहे हैं, वह सही है। शिकायत हमारे पास आई है। सीआरपीएफ इस पूरे मामले की तह में जाकर निर्धारित मानदंड के आधार पर प्रतिक्रया को अंतिम रूप देता है। अभी इस मामले की जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए कुछ कहना जल्दबाजी होगी। 
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सीआरपीएफ के टेलर ने डीआईजी के कपड़ों की सिलाई, पसंद नहीं आई तो साहब ने मारा थप्पड़

शिकायत में लिखा है कि सिपाही (टेलर) विश्वजीत घोष को डीआईजी के निजी कपड़ों की सिलाई का काम सौंपा गया था। डीआईजी बीडी दास को सिलाई पसंद नहीं आई तो उन्होंने टेलर को अपने सरकारी आवास पर बुलाया और उसे थप्पड़ दे मारा। आरोप है कि एएसआई राजेश लाल से अनुचित वित्तीय फायदा न मिलने के कारण उस पर गलत आरोप लगाए गए। बाद में उसे अर्दली कक्ष में प्रस्तुत कर निंदा की सजा दी गई। इसी तरह दूसरे एएसआई एसपी सिंह को भी निंदा की सजा मिली। कवार्टर गार्ड में सही तरह से ड्रिल न कर पाने के कारण डीआईजी ने एक हवलदार को सबके सामने इतनी जोर से घूंसा मारा कि उस जवान को अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा। 

डॉक्टरों ने ईलाज के बाद उसे कई दिन तक बिस्तर पर रहने की सलाह दी। इसी तरीके से अन्य जवानों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार होने की बात कही जा रही है। एक अन्य मामले में डीआईजी ने स्टेशनरी लेने के लिए सिलचर से कोलकाता, एक सरकारी वाहन भेजा था।इसके साथ दस कर्मचारी भी रवाना कर दिए गए। आरोप है कि उन्होंने अपने निजी आवास पर काम कराने के लिए सरकारी वाहन एवं सभी कर्मियों को एक माह तक कोलकाता में ही रखा।

शिकायत में दूसरे पेज के पैरा नंबर चार में लिखा है कि सहायक कमांडेंट बीके देउरी और एसके हलदार को डीआईजी की कथित प्रताड़ना के चलते स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेनी पड़ी। बताया गया है कि सीआरपीएफ के इतिहास में मिनिस्टीरीयल कर्मियों के राजपत्रित अधिकारी बनने के बाद इन दोनों को छोड़कर किसी ने वीआरएस नहीं ली। कथित तौर पर दोनों को वित्तीय परेशानी का भय दिखाकर इनसे वीआरएस के आवेदन में घरेलू समस्या लिखवा लिया।

छुटृटी न मिलने के कारण हवलदार तरूण कुमार घोष ने आत्महत्या का प्रयास किया। सब-इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने जुलाई में छुट्टी के मामले को लेकर खुद को कई गोलियां मार ली थीं। खास बात है कि ग्रुप सेंटर पर सीआरपीएफ का मैन्यू नहीं चलता, वहां जो डीआईजी कहते हैं, वहीं खाना बनता है। यहां तक कि कर्मियों को पीने का पानी भी अपने पैसे से खरीद कर पीना पड़ता है।

डॉक्टरों पर दबाव डाल कर खुद का वजन 125 किलोग्राम से 80 किलो लिखवाया

बल में प्रावधान है कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी किसी भी तरह की धोखाधड़ी करता है तो उसके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। डीजी को भेजी शिकायत में इस बात का जिक्र है कि डीआईजी बीडी गुप्ता का वजन 125 किलोग्राम से ज्यादा है, लेकिन उन्होंने कथित तौर से डॉक्टरों पर दबाव डालकर अपन वजन 80 किलो लिखवाया है। यह निंदनीय एवं धोखाधड़ी का केस है। 

डीआईजी पर आरोप है कि सीआरपीएफ कैंप की मछली और सब्जियां बाहर बेची जा रही हैं। इसके अलावा उन्होंने ग्रुप सेंटर से पेड़ कटवाकर उनका फर्नीचर बनवाया और उसे कोलकाता स्थिज अपनी निजी कोठी पर भिजवा दिया। शिकायत में लिखा है कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों को उनकी एसीआर खराब करने की धमकी देकर उनसे गलत कागजात पर साइन करा लेते हैं। इस बाबत कमांडेंट करमा भोटिया का उदाहरण दिया गया है। 

डीआईजी ने माना कि उच्चस्तरीय जांच चल रही है

सिलचर ग्रुप सेंटर के डीआईजी बीडी दास से उनका पक्ष जानने के लिए मोबाइल फोन पर बात की गई। उनका कहना है कि कुछ बातें अनुशासन के दायरे में आती हैं। काम लेना पड़ता है और कराना भी पड़ता है। छुट्टी लेने के लिए अंगदान जैसी शर्त रखी गई थी, लेकिन इसकी वजह से किसी भी कर्मचारी की छुट्टी नहीं रोकी गई। हमारा मकसद था कि जवानों को अंगदान के लिए प्रोत्साहित करना।

जबरन किसी से कुछ नहीं लिखवाया गया है। कई बार जवान हार्ड वर्क को दूसरे तरीके से ले लेता है। सभी को नियमानुसार छुट्टी दी जा रही है। कुछ आरोप बेबुनियाद हैं। शिकायत का मामला पूरी तरह से मेरे संज्ञान में है। डीजी सीआरपीएफ इसकी सीक्रेट इन्वेस्टिगेशन करा रहे हैं। जांच चल रही है, मेरे भी कमेंट मांगे गए हैं और दूसरे अफसरों का भी पक्ष लिया गया है।

सीआरपीएफ डीजी का खुला दरबार बंद, मोबाइल एप पर लिखने से डरते हैं जवान

बता दें कि पूर्व डीजी के. विजय कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान सीआरपीएफ मुख्यालय में प्रत्येक वीरवार को खुला दरबार लगाना शुरू किया था। इसमें कोई भी कर्मचारी या उनका परिवार अपनी बात रख सकता था। इसके सार्थक नतीजे भी देखने को मिले। उनके जाते ही जब दिलीप त्रिवेदी ने यह डीजी का पद संभाला तो उन्होंने सबसे पहले यह खुला दरबार बंद कर दिया। इसके बाद अभी तक कई डीजी आए और चले गए, मगर किसी ने भी वह परंपरा दोबारा से चालू नहीं की। 

पिछले साल जवानों को अपनी बात कहने के लिए मोबाइल एप शुरू किया गया है। बल के जवानों की कुल संख्या को देखें तो उसका पांच-दस फीसदी भी एप पर रेस्पांस नहीं आ रहा है। सीआरपीएफ के एक अधिकारी बताते हैं कि इसका कोई फायदा नहीं है। कर्मचारी को पता है कि उसने अपनी परेशानी या किसी अफसर की शिकायत की तो उसके खिलाफ किसी दूसरे बहाने से कार्रवाई होने में देर नहीं लगेगी।

यदि किसी को डीजी से मिलना है तो उसकी राह बहुत मुश्किल है। पहले वह अपने डिप्टी कमांडेंट को आवेदन देगा, फिर वह टू-आईसी के पास से होता हुआ कमांडेंट तक पहुंचेगा। इसके बाद डीआईजी, आईजी और उसके बाद एडीजी या स्पेशल डीजी की टेबल से होता हुआ वह आवेदन डीजी तक जाता है। इनमें अगर किसी भी अफसर को लगता है कि कर्मचारी की शिकायत जायज नहीं है तो वह उसे रद्दी की टोकरी में फेंक सकता है। 
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