गुजरात: पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता ने किया नए 'गैर-राजनीतिक' मंच का एलान, बताया क्या होगा इसका काम
Gujarat: गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता ने बुधवार को एक वैकल्पिक आख्यान (नैरेटिव) पेश करने और विभिन्न मुद्दों के बारे में मतदाताओं के बीच जागरूकता फैलाने के प्रयास के रूप में एक 'गैर-राजनीतिक' मंच शुरू करने का एलान किया।
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गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता ने बुधवार को एक वैकल्पिक आख्यान (नैरेटिव) पेश करने और विभिन्न मुद्दों के बारे में मतदाताओं के बीच जागरूकता फैलाने के प्रयास के रूप में एक 'गैर-राजनीतिक' मंच शुरू करने का एलान किया।
वर्ष 1995-1996 के बीच गुजरात के मुख्यमंत्री रहे मेहता (87 वर्षीय) ने कहा कि 'जन अभियान-बदले गुजरात' नाम की इस पहल के तहत निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनकी भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और शक्तियों से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षित करने के लिए एक शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान भी खोला जाएगा।
सत्तारूढ़ भाजपा के कड़े आलोचक माने जाने वाले मेहता ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए गुजरात सरकार पर खातों को रखने और प्रकाशित करने से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 150 के मुताबिक खातों को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा अनुमोदित एक निर्धारित प्रारूप में रखा जाएगा।
उन्होंने कहा, 'कैग ने पिछले विधानसभा सत्र में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि गुजरात सरकार निर्धारित प्रारूप के अनुसार अपना लेखा-जोखा नहीं रख रही है, जो अनुच्छेद 150 का उल्लंघन है। इसके अलावा, कैग ने वीवीआईपी के स्वागत के लिए राज्य द्वारा किए गए खर्चों का प्रबंधन करने के लिए खातों में बनाए गए विभिन्न उप-प्रमुखों को भी गंभीरता से लिया।'
उन्होंने दावा किया कि गुजरात शिक्षकों की कमी, भ्रष्टाचार, लोगों पर अत्याचार, बच्चों में कुपोषण, महंगाई और विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच बढ़ते तनाव जैसे कई ज्वलंत मुद्दों का सामना कर रहा है।
मेहता ने कहा कि इस तरह के मुद्दों के बारे में लोगों को जागरूक करने और इस स्थिति में बदलाव लाने के लिए मेरे जैसे चिंतित नागरिक इस पहल की शुरुआत कर रहे हैं। अपने नेतृत्व में गैर-राजनीतिक पहल के रोडमैप पर चर्चा करने के लिए मेहता ने गुरुवार को यहां टैगोर हॉल में सभी समान विचारधारा वाले लोगों की एक बैठक बुलाई है।
उन्होंने कहा, इस पहल की एक संगठित संरचना बनाने के लिए हम शहर में एक कार्यालय खोलेंगे और आम नागरिकों के साथ-साथ निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनकी भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और शक्तियों पर प्रशिक्षित करने के लिए एक शोध और प्रशिक्षण संस्थान भी शुरू करेंगे। मेहता ने कहा कि यह मंच लोगों को जागरूक करने के लिए बनाया जा रहा है ताकि वे झूठे वादों से गुमराह न हों।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता मल्लिका साराभाई ने इस पहल का समर्थन करते हुए दावा किया कि अपने चारों ओर दुख और कठिनाइयों को देखने के बावजूद गुजरात के मतदाता या तो डरे हुए हैं या बदलाव लाने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा, 'जब मैं हाल ही में अमेरिका में थी तो लोगों ने मुझसे पूछा कि गुजरात गहरी नींद में क्यों है। मेरे पास कोई जवाब नहीं था।'
साराभाई ने दावा किया, 'गुजरात में समाज का हर वर्ग परेशान है, लेकिन कोई आवाज नहीं उठा रहा है। मतदाता अपनी शक्तियों को नहीं समझते हैं। इसलिए, यह मतदाताओं को शिक्षित करने का एक प्रयास है।' उन्होंने कहा कि जनता के बीच जागरूकता फैलाने के लिए यह पहला कदम है।