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नौकरी छोड़कर इस इंजीनियर ने 10 तालाबों को दिया नया जीवन

Sun, 07 Apr 2019 12:01 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Sun, 07 Apr 2019 12:01 PM IST
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Engineer who quit his job to save ponds
पांच साल में कई तालाबों को नया जीवन दिया - फोटो : social media

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने वाले रामवीर तंवर ने अभी तक 10 तालाबों को नया जीवन दिया है। रामवीर का कहना है, "मेरे लिए एसी ऑफिस में बैठने से ज्यादा जल संरक्षण का कार्य अधिक महत्वपूर्ण है।" ग्रेटर नोएडा निवासी रामवीर ने बीते पांच सालों में इन तालाबों को दोबारा जीवित किया है। यहां के गौतम बुद्ध नगर जिले में सैंकड़ों छोटे तालाब हैं, जिन्हें अभी तक नजरअंदाज किया जाता रहा है। रामवीर ने नौकरी छोड़ दी है और वह ट्यूशन पढ़ाकर अपना खर्चा चलाते हैं।


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किसान के बेटे रामवीर अब इन तालाबों को नया जीवन दे रहे हैं। वन संरक्षण नियमों के मुताबिक 60 एकड़ में फैले सूरजपुर वेटलैंड जैसे बड़े जलाशयों को तो संरक्षण मिला हुआ है, लेकिन डाढा गांव में आए दिन पानी की परेशानी होती रहती है। 

यहां के तालाब सूख रहे हैं और उनका इस्तेमाल कूड़ा फेंकने के लिए किया जाता है। इन्हीं जलाशयों के पानी पर यहां के कई परिवारों का जीवन निर्भर करता है। रामवीर का कहना है कि वह जलाशयों के साथ हो रहे गलत व्यवहार को देखते हुए बड़े हुए हैं। जब वह कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्होंने जलाशयों की सफाई के लिए गांववालों की जल चौपाल लगाई और नौकरी छोड़ने के बाद से पूरी तरह इस काम में जुट गए।

उनका कहना है कि यह चौपाल एक गांव से दूसरे गांव जाकर जल संरक्षण के बारे में बताती है। रामवीर के मुताबिक जलाशयों में कूड़ा फेंकना बंद करना जरूरी है। सबसे पहले उनकी वॉलंटियरों की टीम ने 2014 में डाबरा गांव में जलाशय की सफाई का काम किया था।  
 



रामवीर का कहना है कि इस जलाशय का कूड़ा साफ करने में महीनों लग गए। इसके बाद फिल्टर सिस्टम के प्रयोग से पानी की सफाई कर उसे सिंचाई योग्य बनाया गया। जल साफ रहे इसके लिए मछलीपालन को प्रोत्साहन दिया गया।

जलाशयों को साफ करने के लिए और लोगों की जरूरत थी। इस समस्या को हल करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया गया। रामवीर का कहना है, "हमारे फेसबुक पेज बूंद-बूंद पानी के अब तक एक लाख से अधिक सदस्य हैं। जब भी हमें लोगों की जरूरत होती है, हम पेज पर घोषणा कर देते हैं और हर बार करीब 100 लोग संरक्षण के काम के लिए पहुंच जाते हैं।"

रामवीर के इस काम पर लोगों का ध्यान उस वक्त गया जब उन्होंने #सेल्फीविदपॉन्ड के साथ गांव वालों को जलाशयों की तस्वीरें भेजने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद से उनके पास स्पॉन्सरशिप के मौके भी आए। जिसका सारा पैसा जलाशयों को जीवंत करने में लगाया गया।
 

आपके लिए- देश में बड़ी तादात में जलाशय हैं फिर भी लोगों को पानी की दिक्कत रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन जलाशयों की ठीक से देखरेख नहीं की जाती। इनमें कूड़ा डाला जाता है। संसाधन होने के बावजूद भी उनका इस्तेमाल ठीक से नहीं हो पाता। 

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