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Telangana: 30 घंटे डिजिटल अरेस्ट रहा इंजीनियर, मनी लॉड्रिंग की बात कह जालसाजों ने मांगे 40 लाख, पुलिस ने बचाया

Mon, 28 Oct 2024 09:09 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: बशु जैन Updated Mon, 28 Oct 2024 09:09 PM IST
सार

जालसाजों ने इंजीनियर से कहा कि मुंबई में एक मनी लॉड्रिंग मामले में उसे मोबाइल नंबर और आधार नंबर के आधार पर दोषी पाया गया है। उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

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Engineer remained in digital arrest for 30 hours, fraudsters asked for 40 lakhs saying money laundering
डिजिटल अरेस्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

तेलंगाना में डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां पर 44 साल के एक इंजीनियर को साइबर जालसाजों ने 30 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। जालसाजों से इंजीनियर से 40 लाख रुपये की मांग की, लेकिन साइबर पुलिस की मदद से वह ठगों के चंगुल से बच निकला।

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पीड़ित इंजीनियर ने बताया कि उसके पास 25 अक्तूबर की रात में एक मेसेज आया। इसमें लिखा था कि मुंबई में एक मनी लॉड्रिंग मामले में उसे मोबाइल नंबर और आधार नंबर के आधार पर दोषी पाया गया है। उसने मेसेज पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद जालसाजों ने उसे 26 अक्तूबर को सुबह तीन बजे वॉयस और वीडियो कॉल की। कॉल पर कहा गया कि उसे मनी लॉड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 
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फर्जी एफआईआर और वारंट भेजे
जालसाजों ने इंजीनियर को अलग कमरे जाने और परिजनों को इस बारे में कुछ भी न बताने के लिए कहा। साथ ही उसके नंबर पर फर्जी एफआईआर और वारंट भेजे। इससे इंजीनियर डर गया। इसके बाद जालसाजों ने कहा कि अगर वह एफआईआर से अपना नाम हटवाना चाहता है तो 40 लाख रुपये दे। 
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होटल या लॉज में जाने को कहा
जालसाजों ने पीड़ित इंजीनियर से बैंक खातों के बारे में जानकारी मांगी। इसके बाद कहा कि वह किसी होटल या लॉज में चला जाए। पुलिस उसे ढूंढ रही। इंजीनियर घर से निकला और दोपिहया वाहन से 15 किमी दूर अमीरपेट इलाके में पहुंचा। यहां उसने एक लॉज में कमरा ले लिया। इस दौरान जालसाज पूरे समय उससे कॉल पर संपर्क में रहे। 


धोखे से कट गई कॉल तो ली साइबर पुलिस की मदद
27 अक्तूबर को सुबह चार बजे अचानक कॉल कट गई। इस पर पीड़ित इंजीनियर ने साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया। यहां से कांस्टेबल ने उसे बताया कि उसके साथ धोखाधड़ी हो रही है। ऐसा कोई मामला नहीं है। इसके बाद कांस्टेबल ने उसके पड़ोसी का नंबर लेकर उसे पीड़ित के पास लॉज में पहुंचने के लिए कहा। कांस्टेबल भी इस बीच पीड़ित से संपर्क में रहा। उसने पीड़ित इंजीनियर को मदद का भरोसा दिलाया। जब पीड़ित का पड़ोसी लॉज पहुंचा तो उसको घर ले गया। मामले में कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई गई है।  


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