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एल्गार परिषद मामला: वरवरा राव को आत्मसमर्पण का आदेश दे कोर्ट, एनआईए की बॉम्बे हाईकोर्ट से अपील

Fri, 17 Dec 2021 09:02 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 17 Dec 2021 09:02 PM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फरवरी 2021 को राव के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें 6 माह की अंतरिम जमानत दी थी। इसके तहत राव को 5 सितंबर 2021 को जेल प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण कर देना चाहिए था। लेकिन इस दौरान राव की मेडिकल जांच न हो पाने के चलते उनकी जमानत अवधि समय-समय पर बढ़ाई जाती रही है।

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Elgar Parishad case: High Court orders Varavara Rao to surrender NIA appeals to Bombay High Court Latest News Update
एनआईए - फोटो : एएनआई

विस्तार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बॉम्बे हाईकोर्ट से कहा है कि भीमा-कोरेगांव, एल्गार परिषद मामले में आरोपी वरवरा राव (83) की सेहत ठीक है और उनकी मेडिकल जमानत अवधि समाप्त हो चुकी है। इसलिए उन्हें जेल प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया जाए। फिलहाल, राव अंतरिम मेडिकल जमानत पर हैं।

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एनआईए की ओर से अधिवक्ता संदेश पाटिल ने हाईकोर्ट के जस्टिस नीतिम जामदार व जस्टिस सारंग कोतवाल की खंडपीठ के सामने कहा कि वरवरा राव की पिछले दिनों डाक्टरों के समूह ने नानावटी अस्पताल में जांच की थी। इसके बाद डाक्टरों ने कहा है कि राव अपनी दैनिक गतिविधियां खुद करने में सक्षम हैं। इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है। वहीं, राव के वकील आनंद ग्रोवर ने दलील दी कि भले ही एनआईए ने नानावटी अस्पताल के डाक्टर की राय के आधार पर मेरे मुवक्किल की सेहत ठीक होने का दावा किया है लेकिन डाक्टरों की यह राय मेरे मुवक्किल के मेडिकल जांच रिपोर्ट पर आधारित नहीं है।
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गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने फरवरी 2021 को राव के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें 6 माह की अंतरिम जमानत दी थी। इसके तहत राव को 5 सितंबर 2021 को जेल प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण कर देना चाहिए था। लेकिन इस दौरान राव की मेडिकल जांच न हो पाने के चलते उनकी जमानत अवधि समय-समय पर बढ़ाई जाती रही है।
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रोना विल्सन के फोन में था पेगासस स्पाइवेयर
एल्गार परिषद मामले में सामाजिक कार्यकर्ता रोना विल्सन की गिरफ्तारी के एक साल पहले उनके स्मार्टफोन में एनएसओ ग्रुप के पेगासस स्पाइवेयर मौजूद था। नए फॉरेंसिक विश्लेषण की जानकारी के अनुसार कैदियों के अधिकार संबंधी कार्यकर्ता विल्सन जून 2018 में अपनी गिरफ्तारी से करीब एक साल पहले ‘निगरानी और आपत्तिजनक दस्तावेज़ आपूर्ति’ का शिकार थे।

कई मौकों पर समझौता भी किया गया
डिजिटल फॉरेंसिक कंपनी आर्सेनल कंसल्टिंग ने कहा कि विल्सन के एपल फोन को न केवल इस्राइली एनएसओ ग्रुप के एक ग्राहक द्वारा निगरानी के लिए चुना गया था, बल्कि कई मौकों पर समझौता भी किया गया था। विश्लेषण से पता चला है कि विल्सन के आईफोन 6एस के दो बैकअप में डिजिटल निशान थे, जो पेगासस निगरानी औजार से प्रभावित दिख रहे थे। 


केवल सरकारी एजेंसियों को ही लाइसेंस दिया गया
पेगासस विकसित करने वाली इस्राइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप ने कहा है कि केवल सरकारी एजेंसियों को ही लाइसेंस दिया गया है। हालांकि भारत सरकार ने इस बात की न ही पुष्टि की है और न ही इससे इनकार ही किया है कि वह एनएसओ ग्रुप की ग्राहक है। इस बीच, पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के राष्ट्रीय महासचिव वी सुरेश ने कहा, यह पुख्ता प्रमाण है और अब हम नए प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के आधार पर इन निष्कर्षों को प्रमाणित करने के लिए सभी कानूनी संभावनाएं तलाश रहे हैं।

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