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निर्वाचन आयोग और विधि आयोग देश में एक साथ चुनाव कराने पर करेंगे चर्चा
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Wed, 09 May 2018 08:16 PM IST
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चुनाव
देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग और विधि आयोग अगले सप्ताह चर्चा कर सकते हैं। निर्वाचन आयोग ने विधि आयोग के प्रमुख जस्टिस बीएस चौहान (रिटायर्ड) और अन्य शीर्ष अधिकारियों को इस मुद्दे पर चर्चा के लिए 16 मई को आमंत्रित किया है।
विधि आयोग के अधिकारी ने कहा, ‘हां, हम देश में एक साथ चुनाव कराए जाने के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग के साथ चर्चा करेंगे। निर्वाचन आयोग पर ही देश में चुनाव कराने की जिम्मेदारी है।’ यह बैठक विधि आयोग की तरफ से देश में एक साथ चुनाव कराए जाने के मुद्दे पर वर्किंग पेपर जारी किए जाने के कुछ दिन बाद हो रही है। विधि आयोग का कहना है देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव 2019 के शुरुआत में दो चरण में कराए जा सकते हैं। इसके लिए संविधान के कम से कम दो प्रावधान में संशोधन करना पड़ेगा। साथ ही इसे राज्यों की तरफ से बहुमत से मंजूरी भी लेनी होगी।
इसमें कहा गया है कि इसके लिए जन प्रतिनिधित्व कानून के कुछ प्रावधानों में भी में भी साधारण बहुमत से संशोधन करना होगा। वर्किंग पेपर के अनुसार इसका दूसरा चरण 2024 में हो सकता है। पहले चरण में जिन राज्यों को शामिल करने की बात कही गई है उसमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं। वहीं दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली और पंजाब को रखा गया है।
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इन राज्यों में लोकसभा के साथ चुनाव कराने के लिए विधानसभा के कार्यकाल में विस्तार करना होगा। विधि आयोग ने देश में एक साथ चुनाव कराए जाने पर 9284.15 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान व्यक्त किया है। आयोग ने सरकार से कहा है कि इसके लिए बड़े पैमाने पर ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों की खरीदना होगा।
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विधि आयोग के अधिकारी ने कहा, ‘हां, हम देश में एक साथ चुनाव कराए जाने के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग के साथ चर्चा करेंगे। निर्वाचन आयोग पर ही देश में चुनाव कराने की जिम्मेदारी है।’ यह बैठक विधि आयोग की तरफ से देश में एक साथ चुनाव कराए जाने के मुद्दे पर वर्किंग पेपर जारी किए जाने के कुछ दिन बाद हो रही है। विधि आयोग का कहना है देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव 2019 के शुरुआत में दो चरण में कराए जा सकते हैं। इसके लिए संविधान के कम से कम दो प्रावधान में संशोधन करना पड़ेगा। साथ ही इसे राज्यों की तरफ से बहुमत से मंजूरी भी लेनी होगी।
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इसमें कहा गया है कि इसके लिए जन प्रतिनिधित्व कानून के कुछ प्रावधानों में भी में भी साधारण बहुमत से संशोधन करना होगा। वर्किंग पेपर के अनुसार इसका दूसरा चरण 2024 में हो सकता है। पहले चरण में जिन राज्यों को शामिल करने की बात कही गई है उसमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं। वहीं दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली और पंजाब को रखा गया है।
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इन राज्यों में लोकसभा के साथ चुनाव कराने के लिए विधानसभा के कार्यकाल में विस्तार करना होगा। विधि आयोग ने देश में एक साथ चुनाव कराए जाने पर 9284.15 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान व्यक्त किया है। आयोग ने सरकार से कहा है कि इसके लिए बड़े पैमाने पर ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों की खरीदना होगा।