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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: भारत की सबा ने रचा इतिहास, इलिनॉयस विधानसभा पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बनीं

Fri, 06 Nov 2026 09:24 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 06 Nov 2026 09:24 PM IST
सार

भारत में जन्मी सबा हैदर ने अमेरिका के इलिनॉयस विधानसभा चुनाव में 71.19 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत दर्ज की है। वह राज्य की जनरल असेंबली में पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बनी हैं। करीब 20 साल पहले अमेरिका गईं सबा ने राजनीति में यह मुकाम कैसे हासिल किया? उनके चुनावी एजेंडे में कौन से मुद्दे थे? उनकी जीत को भारत की बेटियों के लिए प्रेरणा क्यों बताया जा रहा है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Election Commission Gives ASDD Voters Another Chance to Get Their Names Included in Final Electoral Roll Amid
सबा हैदर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत में जन्मी सबा हैदर ने अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में जीत हासिल कर इतिहास रच दिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार सबा इलिनॉयस राज्य की प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी गई हैं। वह इस राज्य की जनरल असेंबली में पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बन गई हैं। उनकी इस जीत से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में भी खुशी का माहौल है, क्योंकि सबा का जन्म यहीं हुआ था। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार ब्रायन स्कोपा को बड़े अंतर से हराया। परिवार ने इस उपलब्धि को गाजियाबाद, भारतीय समुदाय और पूरे देश के लिए गर्व का पल बताया है।

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अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव में सबा हैदर को कुल 21,996 वोट मिले। उन्हें कुल मतदान का 71.19 प्रतिशत वोट हासिल हुआ। वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन उम्मीदवार ब्रायन स्कोपा को 8,902 वोट मिले, जो कुल मतदान का 28.81 प्रतिशत है। इस तरह सबा ने स्पष्ट अंतर से जीत दर्ज की। वह इलिनॉयस की 84वीं डिस्ट्रिक्ट से चुनाव मैदान में थीं। इस जीत के साथ उन्होंने राज्य की राजनीति में एक नई पहचान बनाई है। करीब 20 साल पहले अमेरिका गईं सबा का राजनीति तक पहुंचने का सफर उनके परिवार के लिए भी अप्रत्याशित रहा।
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सबा हैदर की जीत पर परिवार ने क्या कहा?
सबा के पिता सैयद अली हैदर ने बेटी की जीत पर खुशी जताते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए मेहनत, लोगों से अच्छा संवाद और उनसे जुड़ने की क्षमता जरूरी होती है। उनके मुताबिक, किसी उम्मीदवार को लोगों तक अपनी बात, सोच और योजना सही तरीके से पहुंचानी होती है। अगर वह ऐसा कर पाता है तो लोग उसे वोट देते हैं। सबा के भाई ने भी इस जीत को परिवार, समुदाय और गाजियाबाद के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि करीब 20 साल पहले जब सबा अमेरिका गई थीं, तब परिवार ने कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन राजनीति में आएंगी। उनका राजनीति में आने का उद्देश्य समुदाय के साथ गहराई से जुड़ना था। वह योग से भी जुड़ी रहीं और योग शिक्षक प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने का काम करती थीं।
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सबा हैदर का भारत से अमेरिका तक का सफर कैसा रहा?
सबा का जन्म भारत में हुआ था। करीब 20 साल पहले वह अमेरिका चली गई थीं। राजनीति में आने से पहले वह सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय थीं। वह डुपेज काउंटी बोर्ड की सदस्य और समुदाय के मुद्दों पर काम करने वाली कार्यकर्ता रही हैं। वर्तमान में वह डुपेज पब्लिक हेल्थ बोर्ड में भी काम कर रही हैं। इसके अलावा वह काउंटी बोर्ड की रणनीतिक योजना और पर्यावरण समितियों की अध्यक्ष हैं। आवास समाधान से जुड़ी समिति की सह-अध्यक्ष भी हैं और डुपेज हाउसिंग अथॉरिटी की सदस्य हैं। वह विल और डुपेज काउंटीज डेमोक्रेटिक एएपीआई कॉकस की सह-संस्थापक और अध्यक्ष भी हैं। उनके काम का दायरा सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण, आवास और समुदाय से जुड़े मुद्दों तक फैला हुआ है।

इलिनॉयस की किस सीट से चुनाव जीतीं सबा हैदर?
सबा ने इलिनॉयस की 84वीं डिस्ट्रिक्ट से जीत दर्ज की है। इस क्षेत्र में विल, डुपेज, केन और केंडल काउंटियों के कुछ हिस्से शामिल हैं। इसके अंतर्गत ऑरोरा, नैपरविल, ओस्वेगो, मोंटगोमरी और बोल्डर हिल जैसे इलाके आते हैं। इस क्षेत्र से जीतकर सबा अब राज्य की प्रतिनिधि सभा का हिस्सा बनेंगी। उनकी जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि वह इलिनॉयस की जनरल असेंबली में पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला हैं। उनके भाई ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद परिवार और समुदाय में जश्न का माहौल है। उन्होंने इसे केवल सबा या गाजियाबाद की जीत नहीं, बल्कि भारत की सभी बेटियों के लिए प्रेरणा बताया। उनके मुताबिक, यह उपलब्धि लड़कियों को आगे बढ़ने का संदेश देती है।

सबा हैदर ने चुनाव में किन मुद्दों को उठाया था?
सबा हैदर ने अपने चुनाव प्रचार में लोगों को प्राथमिकता देने वाले एजेंडे पर जोर दिया था। उनके अभियान में शिक्षा, स्वास्थ्य, कर, बिजली और प्रवासी समुदायों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। उनकी प्राथमिकताओं में शामिल थे।

  • स्कूलों को पूरी आर्थिक मदद देना, ताकि शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो।
  • अरबपतियों और बड़ी कंपनियों से उचित कर वसूलना।
  • स्वास्थ्य सेवाओं, संपत्ति कर और दवाओं की कीमत कम करना।
  • बिजली और दूसरी उपयोगिता सेवाओं की दरों में बढ़ोतरी पर रोक लगाना।
  • महिलाओं के प्रजनन संबंधी अधिकारों की रक्षा करना।
  • प्रवासी समुदायों के अधिकारों और हितों की सुरक्षा करना।


सबा हैदर की जीत को भारत के लिए क्यों खास माना जा रहा है?
सबा की जीत का महत्व उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक सफलता से आगे भी है। भारत में जन्मी एक महिला ने अमेरिका में चुनाव जीतकर राज्य की जनरल असेंबली में दक्षिण एशियाई महिलाओं के लिए पहली जगह बनाई है। उनके परिवार ने इसे भारत की बेटियों के नाम समर्पित उपलब्धि बताया है। भाई के मुताबिक, यह जीत संदेश देती है कि मेहनत और लोगों से जुड़ाव के दम पर बड़ी जिम्मेदारियां हासिल की जा सकती हैं। गाजियाबाद में जन्मी सबा का यह सफर भारतीय मूल के लोगों के लिए भी गर्व का विषय बना है।

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