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Assembly By-Elections: लुधियाना से कालीगंज तक, किस सीट पर क्यों हो रहा उपचुनाव; किनमें मुकाबला, क्या दांव पर?
Tue, 27 May 2025 01:02 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 27 May 2025 01:02 PM IST
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सार
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चार राज्यों में विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारी तेज।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
निर्वाचन आयोग (ईसी) ने 19 जून को चार राज्यों की पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का एलान किया है। इनमें गुजरात की दो सीटें और केरल, पंजाब और पश्चिम बंगाल की एक-एक सीट पर चुनाव होगा। इसके बाद मतगणना 23 जून को तय की गई है। ऐसे में यह जानना अहम है कि किस राज्य की कौन सी सीट पर उपचुनाव होगा? उपचुनाव की वजह क्या है? मुकाबला किस-किस के बीच है? साथ ही अलग-अलग दलों के लिए इस उपचुनाव में क्या दांव पर लगा है? आइये विस्तार से जानते हैं...
इन सीटों पर उपचुनाव कराने की वजह क्या है?
1. गुजरात- कड़ी सीट से भाजपा विधायक करसनभाई पुंजाभाई सोलंकी का 4 फरवरी 2025 को कैंसर से निधन हो गया था। इसके चलते इस सीट पर उपचुनाव कराए जाने हैं।
- विसवादर सीट से आम आदमी पार्टी के विधायक भूपेंद्र भयानी दिसंबर 2023 में आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए। अदालत में चल रहे एक केस की वजह से इस सीट पर तबसे ही उपचुनाव नहीं हो सके।
2. केरल
- निलंबूर सीट पर लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के समर्थन वाले विधायक पीवी अनवर ने केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन से विवाद के बाद 13 जनवरी 2025 को राज्य में तृणमूल कांग्रेस का हाथ थाम लिया। टीएमसी अनवर के जरिए राज्य में पैर पसारने की तैयारी में है। उनके नई पार्टी में शामिल होने की वजह से इस सीट पर चुनाव तय हुए हैं।
3. पंजाब
4. पश्चिम बंगाल
By-Polls: पंजाब समेत चार राज्यों की पांच विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव का एलान; 19 जून को मतदान, 23 को नतीजे
- लुधियाना पश्चिम से कांग्रेस विधायक गुरप्रीत बस्सी गोगी का जनवरी में निधन हो गया था। उन्हें अपनी ही बंदूक से चली गोली लग गई थी।
4. पश्चिम बंगाल
- पश्चिम बंगाल की कालीगंज सीट तृणमूल कांग्रेस के विधायक नसीरुद्दीन अहमद का फरवरी में निधन हो गया था। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद से यह सीट खाली है। अलीफा अहमद दिवंगत तृणमूल कांग्रेस विधायक नसीरुद्दीन अहमद की बेटी हैं, जिनकी इस साल फरवरी में मृत्यु हो गई थी, जिसके कारण उपचुनाव कराना पड़ा। तृणमूल कांग्रेस ने अलीफा अहमद को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। अलीफा अहमद दिवंगत तृणमूल कांग्रेस विधायक नसीरुद्दीन अहमद की बेटी हैं।
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इन सीटों पर मुकाबला किस-किस के बीच?
1. गुजरात- गुजरात की कड़ी सीट मेहसाणा जिले के अंतर्गत आती है। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस का सीधा मुकाबला है। 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के करसनभाई पुंजाभाई सोलंकी ने कांग्रेस के परमार प्रवीणभाई गणपतभई को 28 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी।
- वहीं, विसवादर में होने वाला उपचुनाव त्रिकोणीय होगा। इसमें भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी तीनों ही किस्मत आजमाएंगी। जूनागढ़ जिले में आने वाली इस सीट पर पिछली बार आम आदमी पार्टी के भूपेंद्र भयानी ने भाजपा के हर्षद रिबाड़िया को हरा दिया था। हालांकि, रिबाड़िया ने नतीजों को कोर्ट में चुनौती दी थी। कुछ समय बाद ही भयानी ने आप छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। अब विसवादर में भाजपा की तरफ से भूपेंद्र भयानी और आप की तरफ से प्रदेशाध्यक्ष गोपाल इटालिया के बीच कड़ा मुकाबला हो सकता है।
2. केरल
- निलंबूर सीट पर भी मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। दरअसल, यहां से 2021 में एलडीएफ के समर्थन के बाद पीवी अनवर ने जीत दर्ज की थी। हालांकि, अब वे तृणमूल के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। वहीं, वाम दल इस सीट को बचाने की हरसंभव कोशिश करेगा। ऐतिहासिक तौर पर निलंबूर माकपा की पहुंच से अधिकतर दूर ही रही है। वहीं, मुकाबले में कांग्रेस के नेतृत्व वाला- यूडीएफ भी है, जिसने हाल ही में राज्य इकाई में कई परिवर्तन किए हैं।
3. पंजाब
4. पश्चिम बंगाल
- पंजाब की लुधियान पश्चिम सीट पर मुकाबला मुख्यतः तो आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा भी इस सीट पर चुनौती पेश कर सकती हैं। जहां आप की तरफ से इस सीट पर राज्यसभा सांसद और उद्योगपति संजीव अरोड़ा को उम्मीदवार बनाया गया है, तो वहीं कांग्रेस ने पंजाब के पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू को प्रत्याशी घोषित किया है। शिअद ने इस सीट पर जाने-माने वकील परोपकार सिंह घूमन को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा भाजपा भी जल्द इस सीट पर प्रत्याशी का एलान कर सकती है।
4. पश्चिम बंगाल
- पश्चिम बंगाल की कालीगंज सीट पर सीधा मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और बीते वर्षों में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरे भाजपा के बीच होना है। 2021 में बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव टीएमसी के दिवंगत नेता नसीरुद्दीन अहमद ने भाजपा के अभिजीत घोष को 46 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी। वहीं, कांग्रेस के अब्दुल कासिम तब काफी पीछे रहे थे।
अब जानें- इन उपचुनावों में किसका-क्या दांव पर?
गुजरात1. कड़ी सीट
गुजरात विधानसभा में भाजपा 182 में से 161 सीटों पर कब्जा जमाए हुए हैं। यहां कांग्रेस के 12 विधायक, जबकि आप के चार विधायक हैं। ऐसे में गुजरात में दोनों सीटों पर मुकाबला जहां भाजपा के लिए और मजबूत होने का मौका है, तो वहीं कांग्रेस-आप के लिए जमीन तलाशने का। कड़ी सीट पहले से ही भाजपा के पास थी, ऐसे में वह इस सीट को अपने पास रखने के लिए ताकत झोंक रही है।
2. विसवादर सीट
विसवादर सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहने की उम्मीद है। दरअसल, आप यहां अपनी जमीन बचाने की कोशिश में प्रदेशाध्यक्ष गोपाल इटालिया को उतार चुकी है, तो वहीं भाजपा भी 2022 में आप को जिताने वाले भूपेंद्र भयानी को मौका दे रही है। ऐसे में विसवादर का चुनाव राजनीतिक दल और चेहरों के मुकाबले में तब्दील होने वाला है।
केरल
3. निलंबूर सीट
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के लिए वायनाड जिले की यह सीट अपने प्रभाव को स्थापित करने की चुनौती के तौर पर देखी जा रही है। माकपा को यह साबित करना होगा कि उसके समर्थन से जीते पीवी अनवर के जाने से उसे कोई नुकसान नहीं होगा। दूसरी तरफ इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस से लगातार बातचीत कर रही कांग्रेस के लिए यह मौका होगा कि वह वायनाड लोकसभा सीट का प्रभाव विधानसभा में भी दिखा सके और 2016 और 2021 में हारी निलंबूर सीट को फिर हासिल कर पाए। वहीं, भाजपा के नए प्रदेशाध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर एलडीएफ-यूडीएफ जैसे पारंपरिक गठबंधनों के वोट काटकर भाजपा को संगठनात्मक तौर पर मजबूर करना चाहेंगे।
3. निलंबूर सीट
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के लिए वायनाड जिले की यह सीट अपने प्रभाव को स्थापित करने की चुनौती के तौर पर देखी जा रही है। माकपा को यह साबित करना होगा कि उसके समर्थन से जीते पीवी अनवर के जाने से उसे कोई नुकसान नहीं होगा। दूसरी तरफ इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस से लगातार बातचीत कर रही कांग्रेस के लिए यह मौका होगा कि वह वायनाड लोकसभा सीट का प्रभाव विधानसभा में भी दिखा सके और 2016 और 2021 में हारी निलंबूर सीट को फिर हासिल कर पाए। वहीं, भाजपा के नए प्रदेशाध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर एलडीएफ-यूडीएफ जैसे पारंपरिक गठबंधनों के वोट काटकर भाजपा को संगठनात्मक तौर पर मजबूर करना चाहेंगे।
पंजाब
4. लुधियाना पश्चिम
लुधियाना में होने वाले उपचुनाव में आप-कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा-शिरोमणि अकाली दल का भी काफी कुछ दांव पर लगा है। दरअसल, इस सीट पर विधानसभा में जीत दर्ज करने के बाद बीते साल लुधियाना में हुए निकाय चुनाव में आप 95 में से 41 वॉर्ड ही हासिल कर पाई। वह बहुमत से सात वॉर्ड दूर रह गई। वहीं, कांग्रेस को इस चुनाव में 30 और भाजपा को 18 वॉर्डों में जीत मिली थी। निकाय चुनाव में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इसमें आप विधायक अशोक पराशर 'पप्पी' और गुरप्रीत सिंह गोगी की पत्नी भी हार गई थीं।
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4. लुधियाना पश्चिम
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पश्चिम बंगाल
5. कालीगंज
पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इन उपचुनावों को भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के लिए परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। जहां तृणमूल हालिया समय में 25 हजार टीचरों की नियुक्ति रद्द होने और मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर राज्य में विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रही है तो वहीं भाजपा बंगाल में लोकसभा चुनाव के दौरान खोई हुई अपनी जमीन को वापस पाने और विधानसभा चुनाव से पहले पूरी तरह तैयार दिखने की कोशिश में है। गौरतलब है कि कालीगंज सीट पर 40 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है। ऐसे में भाजपा के लिए हिंदू वोटों को एकजुट करना बड़ी चुनौती हो सकता है।
5. कालीगंज
पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इन उपचुनावों को भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के लिए परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। जहां तृणमूल हालिया समय में 25 हजार टीचरों की नियुक्ति रद्द होने और मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर राज्य में विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रही है तो वहीं भाजपा बंगाल में लोकसभा चुनाव के दौरान खोई हुई अपनी जमीन को वापस पाने और विधानसभा चुनाव से पहले पूरी तरह तैयार दिखने की कोशिश में है। गौरतलब है कि कालीगंज सीट पर 40 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है। ऐसे में भाजपा के लिए हिंदू वोटों को एकजुट करना बड़ी चुनौती हो सकता है।
और आखिर में- वो सीटें जहां होने हैं उपचुनाव, पर तारीख अभी जारी नहीं
चुनाव आयोग ने फिलहाल जम्मू-कश्मीर की नगरोटा और बडगाम विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव का एलान नहीं किया है। यह दोनों ही सीटें अक्तूबर 2024 से खाली हैं। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में चुनाव के दौरान उमर अब्दुल्ला गांदरबल और बडगाम की दो सीटों से चुनाव लड़े थे। दोनों पर जीत दर्ज करने के बाद अब्दुल्ला ने बडगाम की सीट छोड़ दी थी। दूसरी तरफ नगरोटा की सीट से विधायक देवेंदर सिंह राणा का अक्तूबर में निधन हो गया था, जिसकी वजह से यह सीट भी खाली है।
चुनाव आयोग ने फिलहाल जम्मू-कश्मीर की नगरोटा और बडगाम विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव का एलान नहीं किया है। यह दोनों ही सीटें अक्तूबर 2024 से खाली हैं। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में चुनाव के दौरान उमर अब्दुल्ला गांदरबल और बडगाम की दो सीटों से चुनाव लड़े थे। दोनों पर जीत दर्ज करने के बाद अब्दुल्ला ने बडगाम की सीट छोड़ दी थी। दूसरी तरफ नगरोटा की सीट से विधायक देवेंदर सिंह राणा का अक्तूबर में निधन हो गया था, जिसकी वजह से यह सीट भी खाली है।