ED: छांगुर बाबा का सहयोगी 'नवीन' गिरफ्तार, बैंक खातों में आए 60 करोड़, दूसरे मुल्कों से मिली थी बड़ी धनराशि
ईडी ने एटीएस, लखनऊ द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। इसमें गैरकानूनी धार्मिक रूपांतरण, विदेशी धन का उपयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों से जुड़ी एक बड़े पैमाने पर साजिश का आरोप लगाया गया।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), लखनऊ जोनल कार्यालय ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत छांगुर बाबा और अन्य से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नवीन रोहरा को अगस्त को गिरफ्तार किया है। उन्हें विशेष न्यायालय (पीएमएलए), लखनऊ द्वारा 5 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है। उत्तर प्रदेश में नेटवर्क चलाने वाले छांगुर बाबा, उनके सहयोगी 'नवीन' और दूसरे लोगों के खातों में 60 करोड़ रुपये जमा हुए थे। प्रवर्तन निदेशालय की जांच से पता चला है कि छांगुर बाबा व उनके सहयोगियों को दूसरे मुल्कों से बड़ी मात्रा में धनराशि मिली थी।
ईडी ने एटीएस, लखनऊ द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। इसमें गैरकानूनी धार्मिक रूपांतरण, विदेशी धन का उपयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों से जुड़ी एक बड़े पैमाने पर साजिश का आरोप लगाया गया। छांगुर बाबा और उनके सहयोगियों पर आरोप है कि उन्होंने चांद औलिया दरगाह, बलरामपुर के परिसर से एक व्यापक नेटवर्क स्थापित किया था। जहां उन्होंने नियमित रूप से भारतीय और विदेशी दोनों नागरिकों की बड़ी सभाओं का आयोजन किया था।
पीएमएलए के तहत अब तक हुई जांच से पता चला है कि छांगुर बाबा, नवीन रोहरा और उनके सहयोगियों ने अपने बैंक खातों में 60 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि प्राप्त की है। यह भी पता चला है कि नवीन रोहरा ने अपने बैंक खातों में विदेशों से भी बड़ी मात्रा में धनराशि प्राप्त की थी।
इस मामले में पहले, 17.07.2025 को उत्तर प्रदेश और मुंबई में 15 परिसरों की तलाशी ली गई थी। तलाशी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों से पता चला कि उनके द्वारा प्राप्त धन, जो कि अपराध की आय के अलावा और कुछ नहीं है, का उपयोग नवीन रोहरा द्वारा विभिन्न अचल संपत्तियों को प्राप्त करने और इन संपत्तियों में निर्माण गतिविधियों को करने के लिए किया गया था। यह उल्लेख करना उचित है कि छांगुर बाबा को इस मामले में ईडी द्वारा 28.07.2025 को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है। केस की आगे की जांच जारी है।
तोमर केस में ईडी की बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय, मुख्यालय कार्यालय, नई दिल्ली ने दो अगस्त को चिराग तोमर, उनके परिवार के सदस्यों और संबंधित संस्थाओं से संबंधित 42.8 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क करने का एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया है। अनंतिम रूप से कुर्क की गई संपत्तियों में दिल्ली में 18 अचल संपत्तियां और बैंक खातों में जमा राशि शामिल है। प्रवर्तन निदेशालय ने एक अखबार की रिपोर्ट के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी।
चिराग तोमर नाम के एक भारतीय नागरिक को क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज वेबसाइट कॉइनबेस की नकल करने वाली वेबसाइटों के इस्तेमाल के जरिए 20 मिलियन डॉलर से अधिक की चोरी करने के आरोप में अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था। जांच से पता चला है कि चिराग तोमर, जो वर्तमान में अमेरिका में हिरासत में है, क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज "कॉइनबेस" की वेबसाइट को स्पूफ करके और लगभग 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी चुराकर बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी में शामिल था।
उच्च रिटर्न का झूठा वादा कर आम जनता से वसूले 3 करोड़
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पणजी क्षेत्रीय कार्यालय ने 28 जुलाई को कृष्ण कुमार उर्फ विजय कुमार जायसवाल उर्फ विजय किशन जायसवाल, उनकी पत्नी रश्मि उर्फ रश्मि जायसवाल और उनके द्वारा प्रवर्तित 3 कंपनियों, जिनमें वे निदेशक हैं, सहित 5 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय (पीएमएलए), उत्तरी गोवा में अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह भियोजन शिकायत, पीएमएलए की धारा 3 के तहत परिभाषित धन शोधन के अपराध के लिए दायर की गई है, जो अधिनियम की धारा 4 के तहत दंडनीय है।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, यह मामला कृष्ण कुमार उर्फ विजय कुमार जायसवाल उर्फ विजय किशन जायसवाल और अन्य के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा दर्ज कई एफआईआर से उत्पन्न हुआ है। गोवा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं, गोवा जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण (वित्तीय प्रतिष्ठान) अधिनियम, 1999 और पुरस्कार चिट्स और धन परिसंचरण योजना (प्रतिबंध) अधिनियम, 1978 के तहत अपराधों के लिए, जिनमें से आईपीसी 1860 की धारा 420 और 120 बी पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध हैं।
ED: वसीयत/बिक्री विलेख में धोखाधड़ी कर खरीदी अचल संपत्तियां, बेदाग बता लोगों को बेची, 212.85 करोड़ की अपराध की आय
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पणजी क्षेत्रीय कार्यालय ने 31 जुलाई को रोहन हरमलकर, अलकांत्रो डिसूजा, एस्टेवन एल्विस डिसूजा, मोहम्मद सुहैल और समीर कालिदास सतार्डेकर के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत विशेष पीएमएलए न्यायालय, मापुसा, गोवा के समक्ष अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है। इस मामले में वसीयत, वंशावली रिकॉर्ड और बिक्री विलेख में धोखाधड़ी कर खरीदी अचल संपत्तियां खरीदी गई। बाद में उन्हें बेदाग बताकर लोगों को बेच दिया। ईडी की जांच के अनुसार, आरोपियों ने ऐसा कर 212.85 करोड़ की अपराध की आय एकत्रित की है।
ईडी ने गोवा पुलिस द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। इस केस में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश, जिसमें बर्देज़ तालुका, उत्तरी गोवा में अचल संपत्तियों का धोखाधड़ी से हस्तांतरण और बिक्री शामिल है, विभिन्न अपराधों को लेकर मामला दर्ज किया गया था। ईडी की जांच से पता चला है कि रोहन हरमलकर के नेतृत्व में आरोपियों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर, वसीयत, सूची कार्यवाही, वंशावली रिकॉर्ड और बिक्री विलेख जैसे जाली दस्तावेज़ों के ज़रिए धोखाधड़ी से कई अचल संपत्तियाँ अर्जित कीं। फिर इन संपत्तियों को बेदाग बताकर तीसरे पक्ष के खरीदारों को बेच दिया गया, जिससे अपराध की आय का शोधन हुआ।
जांच के दौरान, पीएमएलए की धारा 17(1) के तहत आरोपियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई, जिसके परिणामस्वरूप भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए और कई बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए। ईडी की जांच में सामने आया है कि रोहन हरमलकर को 03.06.2025 को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है। जाँच से पता चला है कि उसने जालसाजी को अंजाम देने, नकली दस्तावेज़ तैयार करने और नकद तथा बैंकिंग माध्यमों से पर्याप्त वित्तीय लाभ प्राप्त करने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत चिकित्सा उपकरण और री-एजेंट खरीद घोटाले के मामले में छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में स्थित 20 परिसरों में 30 व 31 जुलाई को छापेमारी की है। जांच एजेंसी का तलाशी और जब्ती अभियान, शशांक चोपड़ा, उनके परिवार के सदस्यों, उनकी व्यावसायिक संस्थाओं और छत्तीसगढ़ राज्य के अधिकारियों सहित अन्य सहयोगियों के आवासीय एवं कार्यालय परिसरों में चलाया गया है। तलाशी अभियान के दौरान, बैंक खातों में जमा शेष राशि, सावधि जमा, डीमैट खातों में शेयर और वाहनों के रूप में 40 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत जब्त/फ्रीज कर दी गईं।
ईडी ने एसीबी/ईओडब्ल्यू, रायपुर द्वारा मेसर्स मोक्षित कॉर्पोरेशन और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससीएल) तथा स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीएचएस) के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कथित आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप में दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की थी। एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा न्यायालय के समक्ष एक आरोप पत्र भी दायर किया गया है। एफआईआर और जांच एजेंसी के आरोपपत्र के अनुसार, शशांक चोपड़ा ने कथित तौर पर डीएचएस और सीजीएसएमसीएल के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके निविदा प्रक्रियाओं में हेरफेर करने, मनगढ़ंत मांग करने और सीजीएमएससीएल को बढ़ी हुई कीमत पर चिकित्सा उपकरण और री-एजेंट की आपूर्ति करने के लिए बड़े पैमाने पर साजिश रची थी।
ईडी की जांच से पता चला कि सीजीएमएससीएल ने चिकित्सा उपकरण और री-एजेंट की खरीद के लिए निविदाएं जारी कीं और मोक्षित कॉर्पोरेशन ने कथित तौर पर सीजीएमएससीएल, डीएचएस और अन्य पात्र फर्मों के अधिकारियों के साथ एक कार्टेल बनाकर पूल टेंडरिंग के माध्यम से ये निविदाएं हासिल कीं। तलाशी अभियान के दौरान, उक्त जब्ती/फ्रीजिंग के अलावा, कई अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए और उन्हें जब्त कर लिया गया। जब्त किए गए दस्तावेज़ों/डिजिटल उपकरणों से, अन्य बातों के अलावा, संदिग्ध लेनदेन, अन्य व्यक्तियों के साथ उसके संबंध और संबंधित अपराध से प्राप्त धन के अन्य उपयोग का पता चला। केस की अभी जांच जारी है।