ED: जमीन के बदले नौकरी मामले में तेजस्वी के बाद लालू प्रसाद की एक और बेटी से पूछताछ, दर्ज किए गए बयान
एजेंसियों का दावा है कि साल 2004-09 के दौरान भारतीय रेलवे के ग्रुप डी के पदों पर कई लोगों की नियुक्तियां हुईं थी। इसके बदले लोगों ने अपनी जमीन लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों के नाम की थी। सीबीआई का आरोप है कि उस दौरान नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन या सार्वजनिक नोटिस भी जारी नहीं किया गया था।
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रेलवे घोटाले में लालू यादव के परिवार की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं। जमीन के बदले नौकरी देने के कथित आरोपों में ईडी ने पूर्व सीएम की बेटी रागिनी यादव के बयान दर्ज किया है। सूत्रों के अनुसार, रागिनी यादव पूछताछ के लिए एजेंसी के सामने पेश हुईं। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके बयान दर्ज किए गए हैं।
यूपीए की पहली सरकार में हुआ था घोटाला
नौकरी के बदले जमीन देने के आरोप में ईडी ने मार्च में रागिनी यादव उनकी बहन चंदा यादव, हेमा यादव और पूर्व विधायक अबू दोजाना के पटना, फुलवारी शरीफ, दिल्ली एनसीआर, रांची और मुंबई स्थित परिसरों पर छापा मारा था। सोमवार को भी एजेंसी ने रागिनी और तेजस्वी से भी पूछताछ किया था। 25 मार्च को तेजस्वी ने सीबीआई के सामने गवाही दी थी। इसी दिन सांसद मीसा भारती से पूछताछ भी की थी। मामला यूपीए की पहली सरकार का दौर है। इस दौरान लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे।
एजेंसी ने छापेमारी भी की
एजेंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और राबड़ी देवी से भी पूछताछ की और छापेमारी भी की थी। छापेमारी के बाद ईडी ने कहा था कि एक करोड़ नकद और 600 करोड़ रुपए के अपराध का पता चला है। एजेंसी ने कहा था कि टीम रियल एस्टेट सहित अन्य निवेशों का पता लगा रही है। मामले की जांच की जा रही है।
जानिए क्या है आरोप
एजेंसियों का दावा है कि साल 2004-09 के दौरान भारतीय रेलवे के ग्रुप डी के पदों पर कई लोगों की नियुक्तियां हुईं थी। इसके बदले लोगों ने अपनी जमीन लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों के नाम की थी। सीबीआई का आरोप है कि उस दौरान नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन या सार्वजनिक नोटिस भी जारी नहीं किया गया था। बावजूद इसके पटना के निवासियों को मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में स्थित विभिन्न जोनल रेलवे में नियुक्ति दी गई थी। इस दौरान लोगों ने सीधे तौर पर या अपने करीबी परिवार के सदस्यों के माध्यम से लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों को एक चौथाई, एक पांचवें दाम में जमीन बेची। हालांकि, तेजस्वी यादव ने सीबीआई के सभी आरोपों को सिरे से नाकार दिया है।