ED: डाकघरों पर 'नटवरलाल' का साया, पहले बंद पड़े 606 जमा खाते चालू किए, फिर कर दिए बंद; 18.60 करोड़ का गबन
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), अहमदाबाद जोनल कार्यालय ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जिसमें आरोपी सब पोस्टमास्टरों ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर सरकारी राशि के दुरुपयोग की साजिश रची। खास बात है कि यहां पर 'नटवरलाल' की भूमिका सरकार डाकघरों के अधिकारियों ने निभाई। आरोपियों ने पहले डाक विभाग में बंद पड़े 606 आवर्ती जमा खातों की लिस्ट निकाली। उन्हें दोबारा से चालू किया। कुछ समय बाद उन्हें फिर से बंद कर दिया। इस जालसाजी के खेल में 18.60 करोड़ रुपये का गबन हो गया। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत इस केस की जांच करते हुए गुजरात में 19 स्थानों पर रेड की है। जालसाजों ने सरकारी राशि का दुरुपयोग करने के लिए डाक महकमे के विभागीय सॉफ्टवेयर में सेंध लगाई।
ईडी ने पिछले सप्ताह इस केस में कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस मामले के तहत गुजरात के डाकघरों में सरकारी धन का जमकर दुरुपयोग किया गया। आरोपी सब पोस्टमास्टरों ने इस फर्जीवाड़े में प्राइवेट लोगों को अपने साथ मिलाया। धोखाधड़ी के जरिए, पहले बंद आवर्ती जमा (आरडी) खातों को फिर से खोला गया। उसके बाद धोखाधड़ी से ही उन खातों को बंद कर दिया गया। आरोपी लोगों ने 606 आवर्ती जमा खातों में पड़ी 18.60 करोड़ रुपये की राशि का दुरुपयोग किया।
एक अन्य मामले में, आरोपी ने मेंगनी उप डाकघर, गोंडल डिवीजन, राजकोट, गुजरात में सब पोस्ट मास्टर के रूप में काम करते हुए अन्य लोगों के साथ आपराधिक साजिश रचकर सरकारी धन की राशि 9.97 करोड़ रुपये का दुरुपयोग किया था। इस राशि का दुरुपयोग 2019 से 2022 के बीच हुआ था। आरोपी लोक सेवक ने पुराने केवीपी मूल राशि और पुराने केवीपी ब्याज के मद में मेंगनी उप कार्यालय की दैनिक लेनदेन रिपोर्ट में उपयोगिता उपकरण, एसएपी (विभागीय सॉफ्टवेयर) के माध्यम से मैन्युअल रूप से फर्जी भुगतान अपलोड करने का तरीका अपनाया।
रावलवाड़ी डाकघर में भी आवर्ती जमा (आरडी) खाते में ऐसा ही फर्जीवाड़ा सामने आया। आरोपी लोक सेवक ने धोखाधड़ी से आवर्ती जमा खातों की क्लोजर दस्तावेज रिपोर्ट तैयार की। उच्च मूल्य और जमाकर्ताओं के अलग-अलग नाम पर दो या तीन बार बंद हो चुके उन्हीं खातों को दोबारा से बंद कर दिया गया। स्वीकृत राशि जमा करने के बजाय जालसाज ने जाली आरडी क्लोजर फॉर्म पर पुन: निवेश का उल्लेख करके फर्जी आरडी खातों की क्लोजर राशि को विभिन्न योजनाओं के तहत नए खाते में भेज दिया। ग्राहकों को धोखा देने की यह एक नई तकनीक थी। जालसाज, नए खाते खोलने के लिए अपने ग्राहकों से जमा स्वीकार करते थे। पुरानी पासबुक/नई नकली पासबुक का पुन: उपयोग करके उन्हें पासबुक जारी करते थे। सच्चाई ये थी कि उन्होंने वास्तव में संचय पोस्ट में उनके नाम पर कोई खाता ही नहीं खोला था।
सुरजकुजी उप डाकघर, जामनगर डिवीजन, में भी एक ऐसा मामला सामने आया। वहां भी आरोपी तत्कालीन उप डाकपाल ने जानबूझकर आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से जाली दस्तावेजों का असली रूप में इस्तेमाल किया। डाक विभाग को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए आरोपी ने 2.94 करोड़ रुपये का गबन किया। बचत बैंक डाक सहायक चोटिला उप डाकघर, एलएसजी डाक सहायक, सुरेंद्रनगर मुख्य डाकघर और उप पोस्ट मास्टर, चोटिला में भी आरोपी व्यक्तियों ने आपराधिक साजिश रची। उन्होंने विभिन्न प्रकार के डाक जमा खातों से धन का दुरुपयोग किया। इसके चलते डाकघरों को 1.57 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ईडी ने विभिन्न जगहों पर रेड कर 1 करोड़ रुपये की राशि जब्त की। अभी तक विभिन्न अचल संपत्तियों का विवरण के जरिए करीब 1.5 करोड़ की वसूली हो चुकी है।