ED Director: नितिन गुप्ता या गिल हो सकते हैं नए ईडी के मुखिया! इन नामों की हो रही सबसे ज्यादा चर्चा
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विस्तार
ईडी के वर्तमान निदेशक संजय मिश्रा 31 जुलाई तक अपना पदभार छोड़ देंगे। उसके बाद ईडी का नया निदेशक कौन होगा इसे लेकर अब नाम की तलाश भी शुरू हो गई। सूत्रों की मानें तो प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक के तौर पर सीबीडीटी (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) के चेयरमैन नितिन गुप्ता समेत कुछ और नाम भी रेस में हैं। इसमें कुछ राज्यों के वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस समिति केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के कुछ वरिष्ठ सदस्यों के अलावा गुजरात में तैनात रहे प्रमुख वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी के नाम की चर्चा भी हो रही है। फिलहाल जल्द ही ईडी के नए निदेशक का नाम तय कर लिया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने ईडी के निदेशक संजय मिश्रा के तीसरे कार्यकाल को अवैध घोषित कर दिया। वैसे संजय मिश्रा का या कार्यकाल इसी साल नवंबर में पूरा हो रहा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक 31 जुलाई तक ही संजय मिश्रा अपने इस पद पर बने रह सकते हैं, इसलिए केंद्र सरकार की ईडी के चयन की समिति की सिफारिश पर नए निदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू होने वाली है। ईडी के नए निदेशक के तौर पर कई वरिष्ठ प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा और राजस्व सेवा के अधिकारियों का नाम चर्चा में आने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक सबसे पहला नाम केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के चेयरमैन नितिन गुप्ता का चल रहा है। नितिन गुप्ता राजस्व सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और सीबीडीटी के चेयरमैन है। सूत्रों के मुताबिक नितिन गुप्ता की दावेदारी इस पद के लिए उनके अनुभव और राजस्व सेवा में रहने के दौरान वित्तीय मामलों की मजबूत पकड़ और समझ के चलते सबसे मजबूत मानी जा रही है।
गुजरात में रहे एचबीएस गिल का भी नाम रेस में
सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के चेयरमैन नितिन गुप्ता के अलावा कुछ और भी नाम इस पद के लिए चर्चा में हैं। इसमें 1987 बैच के भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी और गुजरात में प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर इनकम टैक्स के पद पर रहे सीबीडीटी के सदस्य एचबीएस गिल समेत एक और इसी बैच के वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी का नाम भी रेस में आगे बताया जा रहा है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट की तय समय सीमा के मुताबिक अब महज बीस दिन तक ही ईडी के निदेशक संजय मिश्रा अपने पद पर रह सकेंगे, इसलिए नए निदेशक के चयन की चर्चा और प्रक्रिया भी तेजी से शुरू हो रही है। सूत्रों का कहना है कि सिर्फ राजस्व सेवा के अधिकारी ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस और असम मेघालय कैडर के एक वरिष्ठ आईपीएस के अलावा गुजरात और कर्नाटक के एक आईएएस अधिकारी का नाम भी चर्चा में है। वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक के तौर पर सिर्फ राजस्व सेवा के अधिकारी ही नहीं बल्कि किसी भी दूसरी सेवा के अधिकारियों को ईडी में लाया जा सकता है।
ऐसे होती है ईडी निदेशक की नियुक्ति
कानूनी मामलों के जानकार और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एचएन जोशी कहते हैं कि केंद्रीय सतर्कता आयोग के अधिनियम 2003 के तहत ईडी निदेशक की नियुक्ति की जाती है। यह नियुक्ति केंद्र की एक समिति की सिफारिश पर की जाती है। इस समिति का अध्यक्ष केंद्रीय सतर्कता आयुक्त यानी सीवीसी होते हैं। इस समिति के सदस्यों में वित्त, गृह और कार्मिक मंत्रालय के सचिव होते हैं। एक परीक्षा और उसमें चयनित उम्मीदवारों को इंटरव्यू के बाद चयन होता है, जिसे अंतिम रूप से एसीसी (अपॉइंटमेंट्स कमेटी ऑफ कैबिनेट) के पास भेजा जाता है। जोशी कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक महज बीस दिनों का कार्यकाल ही संजय मिश्रा का बचा है। ऐसे में देश की प्रमुख एजेंसी में नए निदेशक की तैनाती उनके हटने के साथ ही होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
अमित शाह बोले- परिवारवादियों के भ्रष्टाचार पर ईडी की शक्तियां वहीं
वहीं इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद देश के गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष की ओर से जश्न बनाए जाने पर अपना बयान जारी किया है। गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि ये महत्वपूर्ण नहीं है कि प्रवर्तन निदेशालय का निदेशक कौन है। क्योकि जो कोई भी इस पद पर होगा वह विकास विरोधी मानसिकता रखने वाले परिवारवादियों के भ्रष्टाचार पर नजर बनाए रखेगा और कानून के मुताबिक अपना काम भी करेगा। अमित शाह ने अपने ट्वीट में कहा कि कानून के खिलाफ और भ्रष्ट काम करने वालों पर ईडी की शक्तियां बरकरार हैं। वहीं इस मामले में मामले में कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने सोशल मीडिया के माध्यम से कोर्ट में अपने द्वारा ईडी निदेशक के सेवा विस्तार को दी गई चुनौती और सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले को जीत बताया है। सुरजेवाला ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह फैसला सत्य और न्याय की जीत है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि मोदी सरकार ने ईडी का दुरुपयोग करते हुए विरोधियों को प्रताड़ित करने और अपनी पार्टी का सियासी हित साधने के लिए एजेंसी का इस्तेमाल किया।