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Government: ईडी निदेशक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सबक लेगी सरकार! क्या ये टॉप नौकरशाह खेलेंगे आखिरी पारी?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 12 Jul 2023 02:35 PM IST
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सार
Bureaucrats Extension: केंद्र सरकार में चार ऐसे टॉप नौकरशाह रहे हैं, जिन्हें बार-बार सेवा विस्तार दिया गया। इनमें कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला, रॉ चीफ सामंत गोयल और ईडी निदेशक संजय मिश्रा शामिल हैं...
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Bureaucrats Extension: will Government take lesson from Supreme Court decision on ED Director?
Bureaucrats Extension - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी निदेशक संजय मिश्रा के तीसरे सेवा विस्तार को अवैध करार दे दिया है। ईडी के निशाने पर रहा विपक्ष, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोकतंत्र की जीत बता रहा है। केंद्र सरकार में चार ऐसे टॉप नौकरशाह रहे हैं, जिन्हें बार-बार सेवा विस्तार दिया गया। इनमें कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला, रॉ चीफ सामंत गोयल और ईडी निदेशक संजय मिश्रा शामिल हैं।

इनमें से रॉ चीफ को इस वर्ष सेवा मुक्त कर दिया गया है। संजय मिश्रा के कार्यकाल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अब वे भी इसी माह रिटायर हो जाएंगे। इसके बाद दो टॉप नौकरशाह और बचते हैं। वे हैं कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला। अब सवाल उठ रहा है कि क्या ये दोनों नौकरशाह भी इस साल अपनी आखिरी पारी खेल रहे हैं।

यह भी पढ़ें: ED Director Sanjay Mishra: ईडी निदेशक का कार्यकाल गैरकानूनी, क्या उस दौरान लिए गए फैसले भी माने जाएंगे अवैध?

31 जुलाई तक पदमुक्त हो जाएं ईडी निदेशक

ईडी निदेशक के सेवा विस्तार पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद विपक्षी दल खुश नजर आ रहे हैं। इस फैसले के बाद विपक्ष, केंद्र सरकार पर हमलावर हो गया है। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने मेरे द्वारा दायर की गई याचिका में ईडी निदेशक के दोनों सेवा विस्तार को अवैध व असंविधानिक करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि ईडी निदेशक 31 जुलाई तक पदमुक्त हो जाएं। यह सत्य व न्याय की जीत है। यह इस बात का प्रमाण भी है कि राजनीतिक बदले की भावना में जलती मोदी सरकार ने ईडी का दुरुपयोग केवल विरोधियों को प्रताड़ित करने व भाजपा के राजनीतिक हित साधने के लिए किया है।

क्या अब बदले जाएंगे गृह सचिव और कैबिनेट सचिव

सूत्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सेवा विस्तार के मामलों में केंद्र सरकार पर दबाव संभव है। ऐसे में इस वर्ष कैबिनेट सचिव और केंद्रीय गृह सचिव के पदों पर नए अफसर देखे जा सकते हैं। झारखंड कैडर के 1982 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राजीव गौबा को 2019 में दो साल के लिए कैबिनेट सचिव नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे केंद्रीय गृह सचिव थे। 2021 में राजीव गौबा को पहला सेवा विस्तार मिला। अगस्त 2022 में उन्हें दोबारा से एक साल का सेवा विस्तार प्रदान किया गया। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम का मसौदा तैयार करने में कैबिनेट सचिव गौबा का अहम रोल रहा था। उन्हें केंद्रीय सचिवालय, पीएमओ और विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय बनाने में खासी महारत हासिल है। केंद्र सरकार में ज्वाइन करने से पहले उन्होंने, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बोर्ड में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। संभवत: अगले माह देश को नया कैबिनेट सचिव मिल सकता है।

तीसरे सेवा विस्तार पर चल रहे केंद्रीय गृह सचिव

असम-मेघालय कैडर के 1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अजय कुमार भल्ला को अगस्त 2019 में केंद्रीय गृह सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था। भल्ला को नवंबर 2020 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन उससे पहले ही केंद्र सरकार ने अक्तूबर 2020 में उन्हें एक साल का सेवा विस्तार देकर उनका कार्यकाल 22 अगस्त 2021 तक बढ़ा दिया। गत वर्ष उन्हें तीसरा सेवा विस्तार दिया गया। उनका कार्यकाल अगस्त 2023 तक है। उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का विश्वस्त माना जाता है। सूत्र बताते हैं कि अगले माह केंद्र सरकार, किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को केंद्रीय गृह सचिव के पद पर नियुक्त कर सकती है।

'रॉ' चीफ को मिले थे दो सेवा विस्तार

1984 बैच के पंजाब कैडर के आईपीएस सामंत गोयल को 2019 में 'रॉ' चीफ बनाया गया था। दो साल पूरे होने से पहले ही सामंत गोयल का कार्यकाल, एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया। इसके बाद 2022 में कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने सामंत गोयल का कार्यकाल 30 जून 2023 तक बढ़ा दिया। रॉ में उन्हें चार साल तक सेवा करने का अवसर मिला है। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का विश्वस्त माना जाता है। इस साल उनके स्थान पर भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रवि सिन्हा को रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। ईडी के मौजूदा निदेशक संजय कुमार मिश्रा, आयकर कैडर के 1984 बैच के भारतीय राजस्व सेवा 'आईआरएस' के अधिकारी हैं। उन्हें नवंबर 2018 में दो वर्ष की अवधि के लिए जांच एजेंसी का प्रमुख बनाया गया था। नवंबर 2020 में उन्हें पहला सेवा विस्तार मिला। भारत सरकार ने उनके नियुक्ति पत्र में संशोधन कर ईडी निदेशक के दो साल के कार्यकाल को बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया। 2021 में दोबारा से उन्हें एक साल का सेवा विस्तार दिया गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए ईडी और सीबीआई निदेशकों का कार्यकाल दो साल की अनिवार्य अवधि के बाद तीन वर्ष तक बढ़ाने का प्रावधान कर दिया। संजय मिश्रा को तीसरी बार सेवा विस्तार दे दिया गया।

ये एक्सटेंशन नहीं दिया जाना चाहिए

केंद्र में अफसरों को सेवा विस्तार देने बाबत कैबिनेट सचिवालय से सेक्रेटरी 'सिक्योरिटी' के पद से रिटायर पूर्व आईपीएस एवं सीआईसी रहे यशोवर्धन आजाद कहते हैं, ये एक्सटेंशन नहीं दिया जाना चाहिए। ये उस वक्त तो ठीक है, जब देश में आपातकाल हो। सरकार को ट्रांसफर पोस्टिंग करने का समय ही नहीं मिला हो। रिटायरमेंट पर बैठे किसी अधिकारी को सेवा विस्तार देने से कई दूसरे अधिकारियों के हित प्रभावित होते हैं। कई अफसरों की वरिष्ठता खत्म हो जाती है। क्या कुछ अफसरों को राजनीतिक स्वार्थों के चलते सेवा विस्तार मिल रहा है। नौकरशाह का अपना भी कोई हित रहता होगा। लोगों को यह जानने का अधिकार है कि किसी व्यक्ति को एक्सटेंशन मिला है, तो उसके पीछे क्या कारण हैं। उस व्यक्ति में क्या खासियत है। सरकार को उस बारे में लोगों को बताना चाहिए। नौकरशाहों को लोगों के टैक्स से वेतन मिलता है, इसलिए उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि किस अधिकारी को सरकार क्यों सेवा विस्तार दे रही है। हरियाणा के दबंग आईएएस अशोक खेमका ने अपने ट्वीट में लिखा है, सेवा विस्तार, चापलूसी के अलावा जूनियर अधिकारियों की पदोन्नति को अवरुद्ध करता है।

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