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आर्थिक सर्वे: नोटबंदी से आर्थिक विकास की रफ्तार होगी धीमी पर अस्थायी
राजीव जायसवाल/ नई दिल्ली
Updated Thu, 02 Feb 2017 08:02 AM IST
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अरुण जेटली
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संसद में मंगलवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 पहला ऐसा सरकारी दस्तावेज था जिसमें स्वीकार किया गया कि नोटबंदी के कारण देश की आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हुई है और इसकी गति तभी बढ़ाई जा सकती है जब मांग बढ़ाने वाले नीतिगत उपाय अपनाएं जाएं। इसमें कहा गया है कि 8 नवंबर को सरकार के नोटबंदी के फैसले का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है लेकिन यह अस्थायी ही रहेगा।
सर्वे के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) यानी विकास दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है जो पिछले वित्त वर्ष की अनुमानित विकास दर 7.6 फीसदी से बहुत कम है जबकि केंद्रीय सांख्यिकी विभाग (सीएसओ) द्वारा हाल में जारी 7.1 फीसदी के अनुमान से भी कम है। हालांकि सर्वे में उम्मीद जताई गई है कि वर्ष 2017-18 के दौरान देश की अर्थव्यवस्था 6.75 से लेकर 7.5 फीसदी की विकास दर से संभल जाएगी।
अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए सर्वे में कुछ खास उपाय भी प्रस्तावित किए गए हैं जिन्हें वित्त मंत्री जेटली द्वारा पेश बजट भाषण में सुना जा सकता है। इनमें से कुछ खास उपाय होंगे- कर दरों में कमी, स्टाम्प शुल्क में कटौती और कर प्रबंधन में सुधार लाना ताकि लोगों को कर अदायगी के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
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अन्य प्रस्तावों में पुनर्मुद्रीकरण तेज करने और नकद निकासी सीमा को यथाशीघ्र खत्म करने के उपाय शामिल हैं। सर्वे में डिजिटल को बढ़ावा देने की खासियत को स्वीकार किया गया है लेकिन साथ ही लोगों को डिजिटल प्रक्रिया अपनाने के लिए दबाव डालने के बजाय उन्हें पुरस्कार से प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है।
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सर्वे के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) यानी विकास दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है जो पिछले वित्त वर्ष की अनुमानित विकास दर 7.6 फीसदी से बहुत कम है जबकि केंद्रीय सांख्यिकी विभाग (सीएसओ) द्वारा हाल में जारी 7.1 फीसदी के अनुमान से भी कम है। हालांकि सर्वे में उम्मीद जताई गई है कि वर्ष 2017-18 के दौरान देश की अर्थव्यवस्था 6.75 से लेकर 7.5 फीसदी की विकास दर से संभल जाएगी।
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अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए सर्वे में कुछ खास उपाय भी प्रस्तावित किए गए हैं जिन्हें वित्त मंत्री जेटली द्वारा पेश बजट भाषण में सुना जा सकता है। इनमें से कुछ खास उपाय होंगे- कर दरों में कमी, स्टाम्प शुल्क में कटौती और कर प्रबंधन में सुधार लाना ताकि लोगों को कर अदायगी के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
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अन्य प्रस्तावों में पुनर्मुद्रीकरण तेज करने और नकद निकासी सीमा को यथाशीघ्र खत्म करने के उपाय शामिल हैं। सर्वे में डिजिटल को बढ़ावा देने की खासियत को स्वीकार किया गया है लेकिन साथ ही लोगों को डिजिटल प्रक्रिया अपनाने के लिए दबाव डालने के बजाय उन्हें पुरस्कार से प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है।
#MyQuestionToFM पर बजट पर सरकार से सीधे पूछे सवाल
अरुण जेटली
सर्वे में कहा गया है कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक लाभ होगा क्योंकि इससे भ्रष्टाचार कम होगा, बचत को बढ़ावा मिलेगा और इसके परिणामस्वरूप बेहतर कर अनुपालन और अधिकतम कर राजस्व के साथ जीडीपी दर भी अधिक होगी। सर्वे में कुछ बाहरी गतिविधियों के प्रति भी चेताया गया है।
मसलन, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत वृद्धि और अन्य देशों की राजनीतिक गतिविधियां, जिनका भारत के कारोबार और अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसमें बड़े वैश्विक बाजारों में संरक्षणवाद में तेजी का भी जिक्र है जिसका विपरीत असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता हैं। इसकी मिसाल अमेरिकी सरकार द्वारा वीजा नियमों में सख्ती के संकेत से देखी जा सकती है।
सर्वे में अप्रत्यक्ष कर सुधार, अगले वित्त वर्ष से लागू होने वाले जीएसटी से बड़ी उम्मीद जताई गई है और सुझाव दिया गया है कि जीएसटी के तहत रियल एस्टेट और जमीन को भी लाया जाए। सीआईआई के अध्यक्ष नौशाद फोर्ब्स कहते हैं कि आर्थिक सर्वे में जो विचार सुझाए गए हैं, उनसे उद्योग जगत को उम्मीद जगी है कि बजट पेश होने के बाद अगले कुछ वर्षों में कुछ नए मुद्दों पर चर्चा शुरू हो सकती है। आर्थिक सर्वे पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बजट पेश करने के बाद लोग ट्विटर के जरिये उनसे हैशटैग #MyQuestionToFM पर बजट संबंधी सवाल कर सकते हैं।
मसलन, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत वृद्धि और अन्य देशों की राजनीतिक गतिविधियां, जिनका भारत के कारोबार और अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसमें बड़े वैश्विक बाजारों में संरक्षणवाद में तेजी का भी जिक्र है जिसका विपरीत असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता हैं। इसकी मिसाल अमेरिकी सरकार द्वारा वीजा नियमों में सख्ती के संकेत से देखी जा सकती है।
सर्वे में अप्रत्यक्ष कर सुधार, अगले वित्त वर्ष से लागू होने वाले जीएसटी से बड़ी उम्मीद जताई गई है और सुझाव दिया गया है कि जीएसटी के तहत रियल एस्टेट और जमीन को भी लाया जाए। सीआईआई के अध्यक्ष नौशाद फोर्ब्स कहते हैं कि आर्थिक सर्वे में जो विचार सुझाए गए हैं, उनसे उद्योग जगत को उम्मीद जगी है कि बजट पेश होने के बाद अगले कुछ वर्षों में कुछ नए मुद्दों पर चर्चा शुरू हो सकती है। आर्थिक सर्वे पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बजट पेश करने के बाद लोग ट्विटर के जरिये उनसे हैशटैग #MyQuestionToFM पर बजट संबंधी सवाल कर सकते हैं।
नोटबंदी से डूबेगी 0.5 फीसदी विकास दर
नोटबंदी से डूबेगी 0.5 फीसदी विकास दर
नोटबंदी के कारण चालू वित्त वर्ष की आर्थिक विकास दर 0.25 फीसदी से लेकर 0.5 फीसदी तक कम हो जाएगी। हालांकि अर्थव्यवस्था के लिए यह नोटबंदी दीर्घकालीन लाभ देगी और ब्याज दरों में कमी के साथ ही भ्रष्टाचार भी कम करेगी।
प्रॉपर्टी की कीमतें और गिरेंगी
वर्ष 2016-17 के लिए पेश आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि नोटबंदी के बाद जमीन-जायदाद की कीमतों में और गिरावट आएगी क्योंकि नोटबंदी के कारण अघोषित आय को रियल एस्टेट में निवेश करना बहुत मुश्किल हो गया है।
नोटबंदी के कारण चालू वित्त वर्ष की आर्थिक विकास दर 0.25 फीसदी से लेकर 0.5 फीसदी तक कम हो जाएगी। हालांकि अर्थव्यवस्था के लिए यह नोटबंदी दीर्घकालीन लाभ देगी और ब्याज दरों में कमी के साथ ही भ्रष्टाचार भी कम करेगी।
प्रॉपर्टी की कीमतें और गिरेंगी
वर्ष 2016-17 के लिए पेश आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि नोटबंदी के बाद जमीन-जायदाद की कीमतों में और गिरावट आएगी क्योंकि नोटबंदी के कारण अघोषित आय को रियल एस्टेट में निवेश करना बहुत मुश्किल हो गया है।