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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों के ट्रायल में देरी पर जताई नाराजगी, निचली अदालत को दी नसीहत
Fri, 19 Aug 2022 03:53 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 19 Aug 2022 03:53 PM IST
सार
शीर्ष अदालत ने निचली अदालत को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि निचली अदालत का फैसला इस आदेश के जारी होने की तारीख से एक साल की अवधि के भीतर उपलब्ध हो।
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : PTI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों के ट्रायल में देरी पर नाराजगी जताई है और कहा है कि ट्रायल कोर्ट का यह कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सुनवाई लंबी न हो क्योंकि समय में अंतराल गवाही में समस्या पैदा करता है। न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि निचली अदालत को किसी भी पक्ष की लंबी अवधि को नियंत्रित करना चाहिए। आंध्र प्रदेश में चित्तौड़ जिले के मेयर की हत्या करने वाले आरोपियों को भागने में मदद करने के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत देते समय ये टिप्पणियां आईं।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि वह व्यक्ति पिछले सात वर्षों से जेल में है और अभियोजन पक्ष के गवाहों से पूछताछ की जानी बाकी है। हम इस बात से परेशान हैं कि घटना के सात साल बाद भी अभियोजन पक्ष के गवाहों का परीक्षण नहीं किया गया और मुकदमा शुरू होना बाकी है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। समय का अंतराल गवाहों की गवाही में अपनी समस्याएं खुद पैदा करता है तो चश्मदीद गवाह के लिए भी परेशानी पैदा करता है। पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित करना अभियोजन पक्ष का कर्तव्य है कि अभियोजन पक्ष के गवाह उपलब्ध हों और यह सुनिश्चित करना निचली अदालत का कर्तव्य है कि किसी भी पक्ष को सुनवाई को लंबा खींचने की अनुमति नहीं दी जाए।
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शीर्ष अदालत ने निचली अदालत को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि निचली अदालत का फैसला इस आदेश के जारी होने की तारीख से एक साल की अवधि के भीतर उपलब्ध हो। साथ ही कहा कि हम आरोप पत्र में अपीलकर्ता की भूमिका और हिरासत में बिताई गई कुल अवधि को देखते हुए अपीलकर्ता को जमानत देने के पक्ष में हैं। हम यह भी स्पष्ट करते हैं कि अपीलकर्ता को सभी तारीखों पर ट्रायल कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। पीठ ने कहा कि अगर निचली अदालत को पता चलता है कि अपीलकर्ता सुनवाई में देरी करने का प्रयास कर रहा है या उसके बाद सबूतों से छेड़छाड़ कर रहा है, तो हम निचली अदालत को जमानत रद्द करने का अधिकार देते हैं।
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