Drone: खुफिया डील में पाकिस्तान को मिले चीनी ड्रोन, ढो सकते हैं 25 किग्रा तक वजन, पंजाब में रोज गिर रहे पैकेट
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विस्तार
पाकिस्तान को चीन से भारी मात्रा में ड्रोन हासिल हुए हैं। इन्हीं ड्रोन के जरिए पड़ोसी मुल्क, पंजाब में रोजाना ही ड्रग्स व हथियार भेज रहा है। सीमा पार पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी 'आईएसआई' द्वारा ड्रोन भेजने के लिए वहां के आतंकी संगठनों एवं तस्करों को तकनीकी मदद दी जाती है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी के उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है, पाकिस्तान और चीन का यह खेल तो अब सभी के सामने है। इसमें कहीं कोई शक नहीं है। पाकिस्तान को चीन से ड्रोन की बड़ी खेप हासिल हुई है। हालांकि इन ड्रोन की खरीद का कोई 'वित्तीय आधार' नजर नहीं आता। संभव है कि दोनों मुल्कों के बीच किसी अन्य समझौते की बदौलत ये ड्रोन, पाकिस्तान में पहुंचे हैं।
कुछ महीने पहले तक सप्ताह में पाकिस्तान की तरफ से पंजाब में दो चार ड्रोन आते थे, अब पिछले कुछ समय से लगातार ड्रोन आ रहे हैं। कई बार तो एक ही दिन में कई ड्रोन छोड़े जा रहे हैं। बीएसएफ द्वारा मार गिराए गए अधिकांश ड्रोन, क्वैडकॉप्टर (मॉडल डीजेआई मैविक 3 क्लासिक, मेड इन चाइना) और क्वैडकॉप्टर (मॉडल डीजेआई मैट्रिस 300 आरटीके, मेड इन चाइना) सीरिज के होते हैं। हालांकि पाकिस्तान को अभी तक चीन से '3600' ड्रोन को एक साथ कंट्रोल करने का फॉर्मूला नहीं मिल सका है।
सालाना 15 करोड़ रुपये खर्च करता है पड़ोसी
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान से पंजाब में आने वाले अनेक ड्रोन पहले असेंबल भी किए जाते रहे हैं। पाकिस्तान को चीन से सस्ती दरों पर ड्रोन के पुर्जे मिल जाते हैं। इन्हें पाकिस्तान में जोड़ कर ड्रोन तैयार किया जाता है। चीनी पुर्जो के जरिए डेढ़ से दो लाख रुपये में एक ड्रोन तैयार हो जाता है। पंजाब सेक्टर में बीएसएफ द्वारा मार गिराए गए अनेक ड्रोन 'क्वैडकॉप्टर डीजेआई मैट्रिस 300 आरटीके सीरिज' के रहे हैं। ड्रोन का फ्लाइंग टाइम और भार सहने की क्षमता पर कीमत तय होती है। आर्थिक मार के बावजूद भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने के लिए, पाकिस्तान सालाना 15 करोड़ रुपये खर्च करता है। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी बताते हैं कि पाकिस्तान द्वारा गत दो वर्षों से भारी संख्या में ड्रोन, भारतीय सीमा में भेजे जा रहे हैं। गत वर्ष अकेले पंजाब में ही करीब ढाई सौ ड्रोन आए थे। राजस्थान से लगती सीमा पर भी ड्रोन की गतिविधियां बढ़ रही हैं।
ड्रोन गिराने के लिए कई राउंड फायर
पाकिस्तान से आने वाले चीन निर्मित ड्रोन के सिस्टम में कई तरह के बदलाव किए जा रहे हैं। बीएसएफ से बचने के लिए ड्रोन की आवाज और उसकी लाइट को बंद कर दिया जाता है। पंजाब से लगते भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर जब घना कोहरा छा जाता है, तब दर्जनों ड्रोन भेजने की कोशिश रहती है। ड्रोन की ऊंचाई ज्यादा होने, कम आवाज और ब्लिंकर बंद होने की वजह से बीएसएफ को ड्रोन गिराने में कई राउंड फायर करने पड़ते हैं। मौजूदा समय में ड्रोन को जवानों के फायर से बचाने के लिए उसकी ऊंचाई बढ़ा दी जाती है। हालांकि इसके बावजूद, बीएसएफ उसे छोड़ती नहीं है। बीएसएफ ने पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में जो ड्रोन गिराए हैं, उनकी लंबाई छह सौ फुट तक रही है।
25 हजार एमएएच की बैटरी वाले ड्रोन
कुछ ड्रोन तो ऐसे भी मिले हैं, जिनमें 25 हजार एमएएच की बैटरी लगी थी। मतलब, ऐसे ड्रोन की मदद से 20-25 किलोग्राम सामान कहीं पर पहुंचाया जा सकता है। पहले जो ड्रोन आते थे, उनकी आवाज साफ सुनाई पड़ती थी। साथ ही वह ड्रोन रात को या तड़के आते थे। उस वक्त ड्रोन की लाइट्स नजर आतीं थीं। इससे बीएसएफ को निशाना लगाने में दिक्कत नहीं आती थी। अब ड्रोन में बदलाव के चलते बीएसएफ को हर पल सतर्कता बरतनी पड़ती है। बीएसएफ द्वारा उन सभी सीमावर्ती रास्तों पर विशेष टीमें तैनात की गई हैं, जहां से तस्कर, सीमा की तरफ आ सकते हैं। इसका फायदा यह रहता है कि अगर कोई ड्रोन जो बीएसएफ की नजर में नहीं आया हो, लेकिन वह कहीं आसपास ही उतरा है, तो उस स्थिति में बीएसएफ की टीमें उन तस्करों को सामान सहित पकड़ सकती हैं। सूत्रों का कहना है कि चीन ने '3600' ड्रोन को एक साथ कंट्रोल करने का फॉर्मूला तैयार कर रखा है। पाकिस्तान इस फॉर्मूले को लेने के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहा है। चीन इस फॉर्मूले के जरिए ही सीमा पर निगरानी रखता है।